राशन की दुकान ने दिया IAS बनने का सपना, निशांत जैन की वह कहानी जो हर छात्र को पढ़नी चाहिए
2015 बैच के आईएएस निशांत जैन की कहानी एक साधारण शुरुआत से शिखर तक पहुंचने की अद्भुत यात्रा है। मेरठ के एक छोटे से मोहल्ले में जन्मे निशांत ने अपनी मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास से यह साबित किया कि अगर मन में ठान लिया जाए तो कोई भी मुश्किल रास्ता आपको रोक नहीं सकता।
आज वे राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्हें इसी अप्रैल महीने में 65 आईएएस अधिकारियों के हुए तबादले में बीकानेर कलेक्टर पदस्थ किया है। उनका आईएएस बनने का सफर सिर्फ किताबों के अध्ययन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जीवन की कठिन परिस्थितियों, आर्थिक तंगहाली और मानसिक चुनौतियों से जूझते हुए सफलता की ओर बढ़ने की यात्रा है।
साधारण पृष्ठभूमि और बड़े सपने
निशांत का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके दादाजी कचहरी में पेशकार थे और पिता एक प्राइवेट नौकरी करते थे। घर में संसाधनों की कमी थी, लेकिन मां ग्रेजुएट थीं, इसीलिए पढ़ाई का माहौल अच्छा था। निशांत ने अपनी शुरुआती शिक्षा हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से पूरी की।
निशांत जैन जब 8वीं-9वीं कक्षा में थे तो घर का राशन लेने सरकारी दुकान पर जाते। वहां दुकानदार गायब रहता, हेराफेरी के किस्से आम थे। निराश होकर जब वे राशन कार्ड देखते तो उस पर लिखा होता—खाद्य और रसद अधिकारी। उसी उम्र में उनके मन में विचार आया कि अगर मैं यह अधिकारी बन जाऊं तो सिस्टम की कितनी समस्याएं दूर कर सकता हूं।
उस समय मेरठ के डीएम अवनीश अवस्थी थे। अखबार में उनके अच्छे कामों के बारे में पढ़कर निशांत का यह सपना और पक्का हो गया था।
संघर्ष के वो दिन...
तीन भाई-बहनों में मंझले निशांत ने मेरठ कॉलेज से इतिहास, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी साहित्य के साथ बीए किया। बीए वह प्रतिष्ठित कॉलेज से करना चाहते थे लेकिन आर्थिक तंगी के चलते दिल्ली या इलाहाबाद नहीं जा सके। कॉलेज के दौरान खर्च चलाने के लिए किताबों की प्रूफ रीडिंग, क्रिएटिव राइटिंग जैसे पार्ट टाइम काम किए। कुछ समय डाक विभाग में असिस्टेंट की नौकरी भी की।
उनके एक सीनियर थे, जो उनके अच्छे दोस्त भी थे। वे अक्सर निशांत का हाल-चाल पूछते और मोटिवेट करते। उन्होंने बल्ब वाला उदाहरण देकर निशांत को समझाया –ज़मीन पर रखा बल्ब कम रोशनी देता है, उसे ऊपर लटकाओ तो पूरा कमरा रोशन हो जाता है। तुममें ऊंचाई पर जाने की क्षमता है। यह बात निशांत के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
पहली असफलता और वो दर्द
एमए करने के बाद निशांत ने UGC NET-JRF पहले प्रयास में पास कर ली। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से M.Phil किया। इसके बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पढ़ने में होशियार निशांत अब तक दी गई सभी परीक्षाओं में सफल हुए थे, लेकिन यूपीएससी परीक्षा के पहले प्रयास में प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाए।
वे बताते भी हैं, एक बार तो लगा जैसे सब टूट गया। हिम्मत टूट रही थी, मन अवसाद से ग्रस्त होने लगा। यह मेरी यात्रा का बेहद कठिन दौर था।
इस समय में उनके परिवार ने सहारा दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्हीं दिनों में लोकसभा सचिवालय में अनुवादक पद पर उनका चयन हो गया। इस नौकरी ने उन्हें आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास दोनों दिए।
दो परीक्षाएं एक साथ, फिर जीत का सफर
2014 में उन्होंने यूपीएससी और यूपीपीसीएस दोनों की प्रीलिम्स दी। दोनों परीक्षाओं को पास किया। मेन्स में एक माह का अंतर था, फिर भी उन्होंने दोनों का मेन्स लिखा। एक बार की असफलता ने निशांत को काफी कुछ सिखा दिया था। इसीलिए उन्होंने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। इसका फल
यह हुआ कि यूपीएससी और यूपीपीसीएस की ओर से उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। 4 जुलाई 2015 की दोपहर। निशांत मेरठ घर पर थे। फोन आया– यूपीएससी में चयन हो गया है! 13वीं रैंक और हिंदी माध्यम में पहला स्थान।
आईएएस बनने के बाद निशांत ने बताईं सफलता की पांच चाबियां
तनावमुक्त होकर तैयारी करें– पढ़ाई को एंजॉय करें, रटें नहीं।
घंटे गिनने से बेहतर है गुणवत्ता देखें– आप क्या पढ़ रहे हैं, यह ज्यादा मायने रखता है।
कर्म करो, फल की चिंता मत करो – गीता का यह सार अपनाएं।
समग्र दृष्टिकोण रखें – जैसे ईरान युद्ध से भारत पर पड़ने वाले असर पर विचार करें। विषयों को आपस में जोड़ें।
प्रामाणिक किताबें चुनें – NCERT, IGNOU, सरकारी वेबसाइट्स उपयोगी हैं।
थोड़ी अंग्रेजी भी है जरूरी
निशांत जैन का मानना है कि अंग्रेजी का थोड़ा ज्ञान जरूरी है, क्योंकि कई वेबसाइट्स पर अच्छे नोट्स और कई किताबें केवल इंग्लिश में होती हैं। हमें उन्हें समझना आना चाहिए ताकि हम अपनी भाषा में उस ज्ञान को लिख सकें। हालांकि, वे अपने हिंदी माध्यम के होने पर गर्व करते हैं और कहते हैं कि अपनी मातृभाषा में हम जितना प्रभावी उत्तर लिख सकते हैं, उतना दूसरी भाषा में नहीं। निशांत की सलाह है कि हिंदी में मजबूत पकड़ बनाएं और मात्रा की गलतियां न करें।
एक लेखक के रूप में भी बनाई पहचान
IAS बनने के बाद निशांत जैन ने दो चर्चित किताबें लिखीं है– मुझे बनना है यूपीएससी टॉपर और रुक जाना नहीं। आज वे न केवल एक अधिकारी हैं, बल्कि लाखों युवाओं के प्रेरणास्रोत भी।
वर्तमान पोस्टिंग
निशांत जैन वर्तमान में बीकानेर कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे जेडीए सचिव, जालोर कलेक्टर, पर्यटन निदेशक और माउंट आबू के एसडीएम जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी कार्यशैली संवेदनशीलता और कुशल प्रशासन के लिए जानी जाती है।
निशांत अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए कहते हैं –जो खुद पर विश्वास करते हैं और बिना रुके निरंतर प्रयास करते हैं, उन्हें सफलता जरूर मिलती है। देर लग सकती है, लेकिन सही दिशा में किए गए प्रयास खाली नहीं जाते।
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