5 बार क्रैक की UPSC परीक्षा और बने IAS, शुभम भाईसारे की सफलता की कहानी
देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को एक बार पास करना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मान लिया जाता है। लेकिन क्या आप एक ऐसे युवा की कल्पना कर सकते हैं, जिसने एक या दो नहीं, बल्कि अलग-अलग केंद्रीय और अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षाओं को 5 बार क्रैक किया? देश की शायद ही कोई ऐसी प्रतिष्ठित तकनीकी या प्रशासनिक सेवा बची हो जिसमें उन्होंने अपनी सफलता का परचम न लहराया हो।
यह कहानी है वर्ष 2022 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी शुभम भाईसारे की। भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES), इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) और भारतीय वन सेवा (IFS) जैसी शीर्ष सेवाओं में चयनित होने के बावजूद उनका दिल सिर्फ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए धड़कता रहा।
आखिरकार अपने छठे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 97 (AIR 97) हासिल कर उन्होंने अपने उस लक्ष्य को पा ही लिया। आइए जानते हैं उनकी इस हैरतअंगेज जर्नी को।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र से शुरुआत
शुभम भाईसारे का जन्म महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले की अहेरी तहसील में हुआ था। उनके पिता श्री अशोक भाईसारे न्यायपालिका में जिला न्यायाधीश (District Judge) के पद पर कार्यरत थे।
पिता के जज होने के कारण उनके लगातार तबादले होते रहते थे। इस वजह से शुभम को बचपन में कई बार अपने स्कूल बदलने पड़े। हालांकि, उन्होंने इसे रुकावट नहीं माना। उनका मानना है कि अलग-अलग स्कूलों में पढ़ने से उन्हें जीवन को करीब से देखने और विविधता को समझने का मौका मिला।
स्कूली शिक्षा के बाद शुभम ने साल 2016 में मुंबई के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने तकनीकी क्षेत्र की सबसे बड़ी परीक्षा भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) की तैयारी शुरू कर दी और साल 2017 की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर वे 2018 बैच के आईईएस (IES) अधिकारी बन गए।
एक बुजुर्ग महिला की लाचारी और IAS बनने का संकल्प
शुभम के पिता जज थे, इसलिए उनके घर पर अक्सर अपनी कानूनी समस्याओं को लेकर परेशान लोग आते रहते थे। एक दिन शुभम के जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसने उनके सोचने का तरीका हमेशा के लिए बदल दिया।
एक दिन शुभम के घर पर 75 वर्ष से अधिक उम्र की एक बुजुर्ग विधवा महिला आई। वह अपने हाथ में सब्जियों की एक छोटी सी थैली लेकर आई थी, जिसे वह शुभम के पिता (जज साहब) को एक भेंट के रूप में देना चाहती थी।
जब शुभम ने उस बुजुर्ग महिला से बात की, तो दर्दनाक हकीकत सामने आई। महिला का बेटा उससे दूर रहता था और उसके कुछ रसूखदार रिश्तेदार उसकी जमीन और संपत्ति पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। वह बेबस महिला न्याय की गुहार लगाने आई थी।
इस घटना ने शुभम को अंदर तक झकझोर दिया। उन्हें अहसास हुआ कि अदालतें तो विवाद होने के बाद न्याय देती हैं, लेकिन यदि प्रशासनिक व्यवस्था और फील्ड ऑफिसर (IAS) मजबूत हों, तो किसी गरीब की संपत्ति पर कब्जा होने की नौबत ही नहीं आएगी। ग्राउंड जीरो पर त्वरित बदलाव लाने और ऐसे मजलूमों की सीधी मदद करने के लिए उन्होंने ठान लिया कि वे आईएएस अधिकारी ही बनेंगे।
जॉब के साथ यूपीएससी
एक बार सरकारी नौकरी (वह भी क्लास-1 ऑफिसर की) मिल जाने के बाद पढ़ाई की कंसिस्टेंसी बनाए रखना सबसे कठिन चुनौती होती है। शुभम के लिए समय का प्रबंधन सबसे बड़ा रोड़ा था।
शुभम दफ्तर आने-जाने के दौरान बस या ट्रेन के रास्ते में अखबार पढ़ते थे। घर लौटने के बाद वे रात-रात भर जागकर किताबों से जूझते थे। उन्होंने सोशल मीडिया को पूरी तरह अलविदा कह दिया था और अपने फोन से ध्यान भटकाने वाले सभी ऐप्स डिलीट कर दिए थे।
वे 6 से 8 महीनों में बमुश्किल एक बार अपने माता-पिता से मिल पाते थे। अपनी ऑफिस की छुट्टियों को वे केवल मेंस परीक्षा और रिवीजन के लिए बचाकर रखते थे।
6 बार यूपीएससी की परीक्षा दी, 5 बार सफलता
साल 2017 में भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) क्रैक की। साल 2019 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर IRTS (इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस) के लिए चुने गए। साल 2020 में दोबारा परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 727 हासिल की।
साल 2020 (IFS) में ही उन्होंने भारतीय वन सेवा (IFS) की कठिन परीक्षा भी पास की और ऑल इंडिया रैंक 63 के साथ तेलंगाना कैडर हासिल किया। वे यहीं नहीं रुके, क्योंकि आंखों में आईएएस का सपना तैर रहा था। 2021 की परीक्षा में उन्होंने अपनी कमियों को पूरी तरह सुधारा और ऑल इंडिया रैंक 97 हासिल कर आखिरकार आईएएस का कैडर अपने नाम कर लिया।
राजस्थान कैडर और प्रशासनिक सफर
आईएएस बनने के बाद शुभम को 2022 बैच के तहत राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। लबासना (LBSNAA) से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी प्रशासनिक यात्रा असिस्टेंट कलेक्टर (ट्रेनी) झालावाड़ में हुई।
इसके बाद उन्हें दिल्ली में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) में असिस्टेंट सेक्रेटरी के पद पर काम करने का मौका मिला, जिससे उन्हें केंद्र सरकार की नीतियों को समझने का अनुभव प्राप्त हुआ। दिल्ली से राजस्थान लौटने पर उन्हें राजधानी जयपुर में उद्योग विभाग में ओएसडी (OSD) के पद पर तैनात किया गया।
कल तक जो शुभम भाईसारे एक लाचार बुजुर्ग महिला की आंखों के आंसू देखकर प्रशासनिक सेवा में आने की कसम खा रहे थे, आज वे इस सेवा का हिस्सा हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में हर तबके के बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने का विजन रखने वाले शुभम देश के करोड़ों युवाओं के लिए परसीवरेंस का प्रतीक हैं। उनकी यह कहानी गवाह है कि अगर आपके इरादों में अटूट जिद और प्रयासों में ईमानदारी हो, तो यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को भी बार-बार घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है।
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