बीहड़ों की धरती से उड़ान भरकर सपनों को सच किया और बने आईएएस श्यामवीर सिंह नरवरिया
चंबल क्षेत्र को अक्सर पिछड़ेपन, बीहड़ों और संघर्ष से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन यही चंबल समय-समय पर ऐसी कहानियां भी गढ़ता रहा है, जो पूरे देश के युवाओं को प्रेरित करती हैं। ऐसी ही एक कहानी है आईएएस श्यामवीर सिंह नरवरिया की। श्यामवीर सिंह ने भिंड जिले के गोरमी क्षेत्र के छोटे से गांव प्रतापपुरा से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया।
फौजी परिवार, चंबल की मिट्टी और अनुशासन
श्यामवीर सिंह नरवरिया एक साधारण लेकिन अनुशासित परिवार से आते हैं। उनके पिता सुरेश सिंह नरवरिया भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। फौजी पिता की परवरिश में अनुशासन, ईमानदारी और देशसेवा का भाव बचपन से ही उनके जीवन का हिस्सा था। उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा फौजी से भी ऊंची जिम्मेदारी संभाले। पिता के इसी सपने को ध्यान में रखकर श्यामवीर ने मन लगाकर पढ़ाई शुरू कर दी।
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नौकरी छोड़कर की यूपीएससी की तैयारी
श्यामवीर शुरू से पढ़ाई में गंभीर रहे। स्कूल में हमेशा उनका रिजल्ट अच्छा आता था। उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी भी की। लेकिन उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा लगातार मजबूत होती गई।कॉर्पोरेट नौकरी के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उनका अंतिम लक्ष्य IAS बनना है। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी।
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पहले IRS, फिर IAS
साल 2016 में श्यामवीर सिंह नरवरिया ने पहली बार UPSC परीक्षा पास की। लेकिन उनकी रैंक अपेक्षा से कम रही और उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (IRS) आवंटित हुई। उन्होंने इसे असफलता मानकर निराश होने के बजाय सीखने का अवसर माना।
सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया और तैयारी जारी रखी। लगातार मेहनत और बेहतर रणनीति के साथ दोबारा प्रयास किया और आखिरकार 2018 में ऑल इंडिया रैंक 284 हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का सपना साकार कर लिया।
सेल्फ-स्टडी से क्रैक किया एग्जाम
श्यामवीर सिंह नरवरिया ने आम उम्मीदवारों की तरह महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने सेल्फ-स्टडी को ही अपनी ताकत बनाया और रोजाना करीब 6 घंटे नियमित व अनुशासित तरीके से पढ़ाई करते रहे। सीमित लेकिन भरोसेमंद किताबों से तैयारी की और लगातार रिवीजन कर अपनी समझ मजबूत करते गए।
UPSC एस्पिरेंट्स के लिए टिप्स
- कोचिंग जरूरी नहीं, पढ़ाई की निरंतरता जरूरी है
- करंट अफेयर्स पर अच्छी पकड़ होना जरूरी है
- सीमित लेकिन भरोसेमंद स्टडी मटेरियल लें
- बार-बार रिवीजन और आत्म-विश्लेषण जरूरी
श्यामवीर मंत्री पटेल के हैं दामाद
IAS बनने के बाद IAS Shyambir Singh का विवाह मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की बेटी फलित सिंह पटेल से हुआ।
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करियर एक नजर
- नाम: श्यामवीर सिंह नरवरिया
- जन्मस्थान: जलगांव
- जन्मस्थान: भिंड
- एजुकेशन: बीटेक
- बैच: 2018
- कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
श्यामवीर सिंह को मध्य प्रदेश कैडर मिला, लेकिन वे तीन साल इंटर कॉडर डेप्युटेशन में जम्मू कश्मीर चले गए थे। वे हाल ही में लौटे हैं और अब उन्हें भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA Bhopal) का सीईओ बनाया गया है।
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उनकी कहानी चंबल क्षेत्र के उन युवाओं के लिए खास संदेश देती है, जो यह मान लेते हैं कि बड़े लक्ष्य सिर्फ बड़े शहरों के लिए होते हैं।चंबल की मिट्टी से निकली यह IAS कहानी आज हजारों युवाओं को यह भरोसा देती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो हालात रास्ता नहीं रोक सकते।
चंबल जैसे इलाके में, जहां संसाधन सीमित होते हैं और रास्ते आसान नहीं, वहां से निकलकर IAS बनने का सपना देखना और उसे पूरा करना बड़ी बात है। आज श्यामवीर कई युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
FAQ
- आईएएस श्यामवीर सिंह नरवरिया किस जिले के रहने वाले हैं?
वे मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोरमी क्षेत्र के गांव प्रतापपुरा के रहने वाले हैं। - IAS बनने से पहले श्यामवीर सिंह नरवरिया को कौन-सी सेवा मिली थी?
2016 में उन्हें IRS (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) मिला था, जिसके बाद दोबारा तैयारी कर IAS बने।
(प्रोफाइल 302- 2 मार्च 2026 तक अपडेट)