तुम सिविल सेवा के लिए बने हो... टीचर के इस एक वाक्य ने बना दिया आईएएस अमन वैष्णव

Abhilasha Saksena Chakraborty | Feb 05, 2026, 11:57 IST
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IAS Aman Vaishnav
IAS Aman Vaishnav

झांसी के अमन वैष्णव ने यूपीएससी से ठीक 24 दिन पहले हुए गंभीर एक्सीडेंट के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और पहले ही प्रयास में आईएएस बन गए। उनकी सफलता साबित करती है कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी हार मान लेते हैं।

कभी-कभी जिंदगी खुद परीक्षा लेती है, और जो उसमें पास हो जाता है, वही इतिहास बनाता है। इसी कहावत को सही साबित किया है झांसी के नगरा जैसे छोटे कस्बे के आईएएस अमन वैष्णव ने। जिन्होंने हालातों से हार नहीं मानी और देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी को पहले ही प्रयास में क्लियर किया। यह चमत्कार नहीं, उनकी जिद, धैर्य और भरोसे की जीत है। 22 साल की उम्र में उन्होंने ये सफलता हासिल कर ली। आज अमन हर उस युवा के लिए प्रेरणा हैं जो परिस्थियों का सामना कर जीतने की हिम्मत रखते हैं।

रेलवे में मुख्य लोको निरीक्षक थे पिता

अमन के पिता रामसेवक श्रीवास रेलवे में मुख्य लोको निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जबकि मां ग्रहणी हैं। रेलवे में छोटे पद पर कार्य करते हुए भी रामसेवक ने कभी अपने बेटे की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी। माता-पिता ने हमेशा उन्हें अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित किया।

एग्जाम के 24 दिन पहले हो गया एक्सिडेंट, 17 17 घंटे पढ़ाई कर रेलकर्मी का  बेटा ऐसे बना IAS अफसर | railway workers son aman vaishnav faced accident  studied for 17 hours
एग्जाम के 24 दिन पहले हो गया एक्सिडेंट, 17 17 घंटे पढ़ाई कर रेलकर्मी का बेटा ऐसे बना IAS अफसर | railway workers son aman vaishnav faced accident studied for 17 hours


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टीचर ने बदली राह

दसवीं तक अमन भी दूसरे बच्चों की तरह इंजीनियर, डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। लेकिन, उनके जीवन ने मोड़ तब लिया, जब स्कूल की भूगोल शिक्षिका ने उनकी काबिलियत पहचानी। 2011 में 10वीं में 92.8% अंक आने के बाद उन्होंने अमन से कहा कि तुम सिविल सर्विस के लिए बने हो। यही एक वाक्य उनके भीतर बस गया। उनने आईएएस बनने का मन बना लिया।
2013 में 96% अंकों के साथ इंटरमीडिएट पास किया और झांसी के दूसरे टॉपर बने। आगे पढ़ाई के लिए वे दिल्ली पहुंचे और हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए (ऑनर्स) किया। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने यूपीएससी की अधिकांश तैयारी पूरी कर ली थी।

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कुछ दिन पहले हुआ हादसा

प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद अमन मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट गए थे। लेकिन, परीक्षा से सिर्फ 24 दिन पहले, अमन का गंभीर एक्सीडेंट हो गया। उनका एक हाथ बुरी तरह घायल था। किताब पकड़ना भी मुश्किल था। किसी और के लिए यह रुकने का बहाना होता, लेकिन अमन के लिए यह खुद को साबित करने का वक्त था।

इसके बावजूद अमन ने हार नहीं मानी। दिन के 16–17 घंटे पढ़ाई, दिल्ली छोड़कर घर जाने के बजाय माता-पिता को अपने पास बुला लिया। एक हाथ से लिखना आसान नहीं था, लेकिन इरादे पूरे मजबूत थे। इसलिए पहले ही प्रयास में उन्हें 155 रैंक मिली और वो आईएएस बने।

हर दिन तीन घंटे तक पढ़ते थे अखबार

छोटी जगह से आने के कारण अमन मानते हैं कि शुरुआत में उनकी अंग्रेजी कमजोर थी। लेकिन, उन्होंने इसको अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। हर दिन अंग्रेजी अखबार और अंग्रेजी के उपन्यास पढ़कर कुछ ही समय में इसमें सुधार कर लिया। इंटरव्यू के पहले उन्होंने कोचिंग से भी अंग्रेजी सीखी।
हालांकि, अखबार लेने के लिए रोज करीब चार किलोमीटर बाइक से जाना पड़ता था, लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की।

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कोचिंग को दिशा देने तक ही सीमित रखें

अमन में दिल्ली में एक साल की कोचिंग की थी। लेकिन वो कहते हैं मेरे चयन की असली वजह सेल्फ-स्टडी है। अमन साफ कहते हैं कि कोचिंग सहारा है, जीत खुद की मेहनत से मिलती है। हां, शुरू में परीक्षा के बारे में जानकारी मिलने के साथ ही कोचिंग में दोस्त भी मिल जाते हैं।

इंटरव्यू में होती है आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की पहचान

IAS Aman Vaishnav कहते हैं इंटरव्यू के दौरान पैनल न सिर्फ उम्मीदवार के ज्ञान, बल्कि उसके आत्मविश्वास और सोच की गहराई को भी परखता है। अमन बताते हैं कि इंटरव्यू में उनसे एक सवाल किया गया था।

आज के दौर में कुछ राजनेता पहले गंदगी फैलाते हैं और फिर नई झाड़ू लेकर सफाई करते नजर आते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? इस पर अमन ने संतुलित और सकारात्मक जवाब दिया, 70 साल बाद आज राजनेता झाड़ू तो उठा रहे हैं, यही सही दिशा में पहला कदम है। इस पर पैनल के सभी लोग काफी खुश हुए।

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सफलता के टिप्स

  • अपनी कमजोरियों को पहचानें और उन्हें सुधारने पर लगातार काम करें।
  • किसी भी परिस्थिति में निराश न हों, असफलता को सीख का जरिया बनाएं।
  • विचारों को स्पष्ट करने के लिए ग्रुप डिस्कशन में नियमित भाग लें।
  • बिना भटके आगे बढ़ने के लिए हमेशा स्पष्ट लक्ष्य (टारगेट) तय करें।
  • इंटरव्यू के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखें, यही आपकी सबसे बड़ी ताकत होती है।

    करियर एक नजर

  • नाम: अमन वैष्णव
  • जन्म: 15-6-1995
  • जन्मस्थान: झाँसी, उत्तरप्रदेश
  • एजुकेशन: बीए ऑनर्स
  • बैच: 2018
  • कैडर: मध्य प्रदेश

पदस्थापना

आईएएस अमन वर्तमान नीमच में जिला पंचायत CEO के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके पहले वो धार में सहायक कलेक्टर, अनूपपुर में अपर कलेक्टर और रतलाम में जिला पंचायत CEO, नरसिंहगढ़ में एसडीएम रह चुके हैं।अमन वैष्णव की सफलता साबित करती है किअगर इरादा मजबूत हो, तो हादसे भी रास्ता नहीं रोक पाते।

(प्रोफाइल 300- 2 मार्च 2026 तक अपडेट)

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