IAS लगा रहे डिजिटल अटेंडेंस, 75 फीसदी शिक्षकों ने नहीं लगाई हाजिरी, डीपीआई का अल्टीमेटम

छत्तीसगढ़ में डिजिटल अटेंडेंस ऐप में 75 प्रतिशत शिक्षक शामिल नहीं हो रहे। डीपीआई ने शिक्षकों को 100 प्रतिशत डिजिटल उपस्थिति का अल्टीमेटम दिया है।

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Arun Tiwari
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News in Short

  • ऐप की हाजिरी फेल
  • 72 फीसदी रजिस्ट्रेशन के बावजूद सिर्फ 24 फीसदी शिक्षक ऑनलाइन
  • मुंगेली–सक्ती में सबसे खराब स्थिति
  • डीपीआई ने शत-प्रतिशत उपस्थिति का अल्टीमेटम दिया

News in Detail

RAIPUR.  छत्तीसगढ़ में डिजिटल अटेंडेंस को लेकर बड़ा झमेला चल रहा है। मंत्रालय जाने वाले आईएएस तो डिजिटल अटेंडेंस लगा रहे हैं, लेकिन मास्साब को सरकार का फरमान मंजूर नहीं है।

डीपीआई को मिली रिपोर्ट में यह सामने आया है कि 75 फीसदी शिक्षक एप के जरिए हाजिरी नहीं लगा रहे हैं। डीपीआई ने एक दिन की हाजिरी देखी तो वो हैरान करने वाली थी। कहीं-कहीं के जिलों में तो दो से तीन फीसदी ही डिजिटल उपस्थिति है।

मुंगेली और सक्ती जिले में सबसे खराब स्थिति है। डीपीआई ने शिक्षकों को अल्टीमेटम दिया है कि वे या तो डिजिटल उपस्थिति दर्ज कराएं नहीं तो इसे अनुशासनहीनता मानी जाएगी।  

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मास्साब की मनमर्जी 

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ऐप के जरिए लागू ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर शिक्षक गंभीर नहीं हैं। 72 फीसदी शिक्षकों ने रजिस्ट्रेशन कराया है लेकिन ऑनलाइन उपस्थिति केवल एक तिहाई शिक्षक ही दर्ज कर रहे हैं। 19 जनवरी को मुंगेली जिले और सक्ती में सबसे कम शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज रही।

डीपीआई ने ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर शिक्षकों की नाफरमानी पर नाराजगी जताते हुए शत-प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति के निर्देश दिए हैं। उपस्थिति का लक्ष्य पूरा नहीं होने पर डीपीआई ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिए वीएसके ऐप बनाया गया है।

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72 फीसदी शिक्षकों ने रजिस्ट्रेशन कराया 

पहले पांच जिलों में प्रयोग के तौर पर ऑनलाइन उपस्थिति शुरू की गई थी, लेकिन अब इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया है। ऐप के जरिए रोजाना शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की मॉनिटरिंग की जा रही है।

ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर शिक्षक गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। 19 जनवरी को ऐप में केवल 24.10 फीसदी शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की गई। इसमें सबसे कम 2.3 फीसदी ऑनलाइन उपस्थिति मुंगेली जिले की रही और 3.2 फीसदी सक्ती जिले की। मुंगेली में 20 फीसदी और सक्ती जिले में 34.3 फीसदी शिक्षकों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है।

रजिस्ट्रेशन के मामले में दंतेवाड़ा जिला टॉप पर है। इस जिले के 99.4 फीसदी शिक्षकों ने ऐप में रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी तरह रायगढ़ में 95.6 और कोंडागांव में 95 फीसदी शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

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इन जिलों में सबसे कम हाजिरी...

DistrictPercentage
मुंगेली2.3%
सक्ती3.2%
गरियाबंद5.2%
बिलासपुर6.6%
दुर्ग7.4%
कोरबा7.5%
कवर्धा7.6%
बेमेतरा8.4%
मोहेला मानपुर चौकी10.4%
बलौदा बाजार11.3%

इन जिलों में सबसे ज्यादा उपस्थिति... 

DistrictPercentage
सरगुजा51.3%
दंतेवाड़ा50.0%
राजनांदगांव49.9%
कोंडागांव41.9%
सूरजपुर40.7%
खैरागढ़38.2%
जांजगीर चांपा37.1%
जशपुर35.5%
कांकेर34.7%
सुकमा34.4%

शिक्षकों का विरोध 

वीएसके ऐप के जरिए शिक्षकों एवं बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। शिक्षकों का कहना है कि ऐप के बजाय स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीन लगाकर उपस्थिति दर्ज कराई जाए। केवल ऐप आधारित व्यवस्था कई शिक्षकों के लिए व्यवहारिक नहीं है।

वहीं बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर में लगाई गई है। इसके कारण कई शिक्षक वीएसके ऐप में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं। वहीं मतदान प्रशिक्षण कार्य की वजह से शिक्षक स्कूल में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शत-प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति कैसे होगी। 

अब आगे क्या 

शिक्षा संचालनालय कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों से स्पष्टीकरण मांगेगा। जिला शिक्षा अधिकारियों और बीईओ पर जवाबदेही तय की जा सकती है। ऑनलाइन उपस्थिति लगातार दर्ज नहीं कराने वाले शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस, वेतन रोके जाने या सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

लगातार विरोध और व्यवहारिक दिक्कतों के चलते वीएसके ऐप में बदलाव, समय-सीमा में छूट या बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार हो सकता है।

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 thesootr knowledge 

वीएसके ऐप (VSK App) छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकसित एक डिजिटल मॉनिटरिंग एप्लिकेशन है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति को ऑनलाइन दर्ज करना, स्कूलों की कार्यप्रणाली पर रियल-टाइम निगरानी रखना और फर्जी/कागजी उपस्थिति पर रोक लगाना है। यह ऐप स्कूल शिक्षा संचालनालय (DPI) के नियंत्रण में है और इसे पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू किया गया है।

निष्कर्ष 

जिला-वार आंकड़ों से साफ है कि सरगुजा, दंतेवाड़ा और राजनांदगांव जैसे कुछ जिलों में ऑनलाइन उपस्थिति 50 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि कई जिलों में यह अभी भी 10 प्रतिशत से नीचे अटकी हुई है। यही असमानता शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

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