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NEWS IN SHORT
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खात्मे का जिक्र किया।
- बीजापुर के एक गांव में 25 साल बाद बस पहुंची, लोगों ने खुशी का जश्न मनाया।
- हथियार छोड़ चुके नक्सली अब पंडुम कैफ़े चला रहे और मुख्य धारा में लौट रहे हैं।
- माओवाद प्रभावित जिले 126 से घटकर केवल 8 जिले रह गए, 2 हजार से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
- आदिवासी विरासत को संरक्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ में शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय लोकार्पित और संविधान का संथाली में अनुवाद।
NEWS IN DETAIL
रायपुर : बजट सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संसद में दिये गये अभिभाषण में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खात्मे का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि नक्सलियों और आतंक पर करारे प्रहार के बाद प्रभावित इलाकों में परिवर्तन आज पूरा देश देख रहा है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इसे गौरव का क्षण बताया।
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पंडुम कैफे चला रहे सरेंडर नक्सली:
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर के एक गांव में 25 साल बाद बस पहुंची तो लोगों ने किसी उत्सव की तरह खुशी मनाई।
बस्तर ओलंपिक में युवा बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। हथियार छोड़ चुके व्यक्ति अब जगदलपुर के पंडुम कैफ़े में लोगों की सेवा कर रहे हैं।
लोग आतंक और हथियार छोड़कर जीवन की मुख्य धारा में लौट रहे हैं।
माओवाद आज 126 से घटकर 8 जिलों तक रह गया है:
राष्ट्रपति मुर्मू ने माओवादियों को लेकर कहा कि माओआतंकी पर भी निर्णायक कार्रवाई की गई है। माओवाद आज देशभर में 126 से घटकर 8 जिलों तक रह गया है।
सिर्फ 3 जिले इसमें गंभीर रूप से प्रभावित हैं। 2 हजार से ज्यादा माओवादियों ने अब तक आत्मसमर्पण किया है।
वह दिन दूर नहीं जब देश से आतंक पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाया :
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में आगे यह भी कहा कि मेरी सरकार देश की आदिवासी विरासत को सुरक्षित करने के लिए आदिवासी म्यूजियम भी बनवा रही है।
इसी क्रम में हाल ही में छत्तीसगढ़ में शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय को लोकार्पित भी किया गया है।
मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि मेरी सरकार ने देश के संविधान का संथाली भाषा में अनुवाद करवा कर आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाया है।
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