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IAS Sanskriti Soman
आज भी माना जाता है कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा छोटे शहरों के छात्रों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन संस्कृति सोमानी ने मध्य प्रदेश के बदनावर से निकलकर आईआईटी बीएचयू और यूपीएससी 2022 में AIR 49 हासिल की।
अनुशासन, मोबाइल से दूरी और सटीक रणनीति के सहारे उन्होंने दिखा दिया कि सच्ची मेहनत के सामने कोई बाधा टिक नहीं पाती। आज संस्कृति ना सिर्फ अपने गांव, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई मंजिल दूर नहीं होती।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
संस्कृति सोमानी का जन्म मध्य प्रदेश के धार जिले में हुआ। उनके पिता बीजेपी जिला अध्यक्ष मनोज सोमानी और मां किरण सोमानी हैं। दोनों ने हमेशा शिक्षा और मूल्यों को जीवन में सर्वोच्च स्थान दिया। संस्कृति मानती हैं कि परिवार का भरोसा और निरंतर प्रोत्साहन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा।
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शुरू से रहीं हैं होनहार छात्रा
संस्कृति शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं। वर्ष 2011 में उन्होंने काश्यप विद्यापीठ से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद 2013 में 12वीं में उन्होंने 90.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
उन्होंने आईआईटी जीईई में ऑल इंडिया रैंक 2235 हासिल की और देश के प्रतिष्ठित IIT बीएचयू, वाराणसी में दाखिला पाया। संस्कृति ने 2018 में IIT BHU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।
कॉलेज के दौरान उन्हें IIT COLOR अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इंटर-IIT वॉलीबॉल टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीतकर खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
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कॉरपोरेट की जॉब छोड़कर शुरू की तैयारी
IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद संस्कृति ने गोल्डमैन सैक्स जैसी वैश्विक कंपनी में काम किया। कॉरपोरेट करियर में सफलता के बावजूद उनका सपना हमेशा से आईएएस अधिकारी बनने का रहा। उन्होंने बिना किसी जल्दबाजी के पूरी रणनीति के साथ यूपीएससी (UPSC) की तैयारी शुरू की। इसके लिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का कठिन निर्णय लेने में देरी नहीं लगाई।
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तीसरे प्रयास में मिली सफलता
संस्कृति सोमानी का यूपीएससी सफर आसान नहीं रहा। पहले प्रयास में वे लिखित परीक्षा पास कर गईं, लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो पाया। असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया। तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा 2022 में AIR 49 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनका वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध था।
मोबाइल से बनाई थी दूरी
आज के समय में ज्यादातर युवा मोबाइल फोन के बिना अपनी दिनचर्या की कल्पना भी नहीं कर पाते। संस्कृति ने तकनीक से दूरी बनाकर पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाया। वो बताती हैं कि पढ़ाई का कोई तय समय नहीं था। नींद के अलावा जो भी वक्त मिलता, वह उसे विषयों को गहराई से समझने में लगाती थीं। आज उनकी यह लगन और अनुशासन ही कामयाबी की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है।
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प्रत्याशियों के लिए टिप्स
- कम किताबें पढ़ें, लेकिन बार-बार दोहरायें
- समय मिलाकर आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करें
- ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट देने की कोशिश करें
- न्यूजपेपर और मैगजीन नियमित रूप से पढ़ें
करियर एक नजर
- नाम: आईएएस संस्कृति सोमानी
- जन्म: 27-03-1995
- जन्मस्थान: धार, मध्य प्रदेश
- एजुकेशन: बीटेक
- बैच: 2023
- कैडर: असम
पदस्थापना
संस्कृति सोमानी को असम के लखीमपुर जिले के नवगठित उप-जिले धकुआखाना में सब-डिविजनल कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया गया है।
संस्कृति सोमानी की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा, अनुशासन और धैर्य से हर कुछ संभव है. छोटे शहर से निकलकर देश की सर्वोच्च सेवा तक पहुंचने वाली संस्कृति आज हर किसी के लिए प्रेरणा हैं।
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FAQ
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