/sootr/media/media_files/2026/01/20/ias-vivek-kv-2026-01-20-22-03-11.jpg)
यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास कर आईएएस बनने का सपना तो कई लोग देखते हैं, लेकिन कुछ लोग ही अपने सपनों को हकीकत में बदल पाते हैं। आईएएस विवेक केवी उन विरले लोगों में से हैं, जो केवल सपने देखने तक सीमित नहीं रहे। उन्हें साकार करने का साहस भी दिखाया। उन्हें स्वयं पर यह विश्वास था कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, वो अपना बेहतर भविष्य गढ़कर रहेंगे।
इसी आत्मविश्वास और संकल्प ने उन्हें इतिहास रचने वाला बना दिया। वे अनुसूचित वन्नन समुदाय से आने वाले पहले व्यक्ति बने, जिन्हें सिविल सेवा में प्रवेश का अवसर मिला।
चुनौतीपूर्ण था बचपन
केरल के कासरगोड जिले के छोटे से गांव कुट्टीकोल में जन्मे विवेक का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उनका घर मिट्टी का था, जिस पर नारियल के पत्तों का अस्थायी शेड लगा हुआ था। बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।
पारिवारिक माहौल भी बेहद चुनौतीपूर्ण था। पिता की नशे की लत के कारण घर में अक्सर तनाव और अशांति बनी रहती थी। आर्थिक तंगी और असुरक्षित वातावरण ने विवेक के शुरुआती वर्षों को बेहद कठिन बना दिया।
उनके गांव में वन्नन समुदाय के पुरुष पारंपरिक रूप से ‘थेय्यम’ उत्सव से जुड़े रहे हैं। शरीर पर रंग लगाकर, विशेष वेशभूषा में नृत्य किया जाता है और नंगे पांव जलते अंगारों पर चला जाता है। इस पीड़ा को सहने के लिए लोग शराब का सहारा लेते थे, जो धीरे-धीरे लत में बदल जाती थी। विवेक ने इस सामाजिक चक्र को बचपन में बहुत नजदीक से देखा।
/sootr/media/post_attachments/edexlive/import/2019/4/11/original/Vivek-685577.jpg?w=1200&h=675&auto=format%2Ccompress&fit=max&enlarge=true)
ये भी पढ़ें:
IAS दीपक सक्सेना के नाम पर फर्जी फेसबुक आईडी, ठगी की आशंका
मां बनीं बदलाव की धुरी
इस कठिन वातावरण में विवेक की मां एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी रहीं। वे पढ़ी-लिखी थीं और पास के पोस्ट ऑफिस में क्लर्क के रूप में कार्यरत थीं। जब हालात लगातार बिगड़ते गए, तो उन्होंने बच्चों को लेकर मायके जाने का साहसिक फैसला लिया।
विवेक का दाखिला एक अच्छे स्कूल में कराया गया, जो घर से लगभग 25 किलोमीटर दूर था। रोजाना दो बस और एक ट्रेन बदलकर करीब 50 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी।
ये भी पढ़ें:
आईएएस कंसोटिया के इशारे पर संतोष वर्मा की साजिश, अजाक्स ने झाड़ा पल्ला
मेधा और मेहनत का संगम
IAS Vivek KV शुरू से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट रहे। कक्षा 12वीं के बाद उन्होंने एनआईटी त्रिचि से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद आईआईएम कलकत्ता से एमबीए किया।
उन्होंने सैमसंग कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन मन कहीं और था। समाजशास्त्र से परिचय होने पर उन्हें यह समझ आया कि उनके पिता की शराब की लत गहरे सामाजिक ढांचे और असमानता का परिणाम थी।
जातिगत भेदभाव और सामाजिक विषमता को उन्होंने अपने जीवन में बहुत करीब से देखा था। यही अनुभव उन्हें सिविल सेवा की ओर खींच ले गया।
/sootr/media/post_attachments/wp-content/uploads/sites/2/2020/06/24225047/vivek-2-223367.jpg?impolicy=abp_cdn&imwidth=640)
नौकरी छोड़ी, जोखिम उठाया
शुरुआत में विवेक ने नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी की, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि यह परीक्षा पूर्ण समर्पण मांगती है। करीब डेढ़ साल बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उस समय आर्थिक हालात बेहद कमजोर थे। तैयारी के खर्च के लिए उन्हें अपना पीएफ तक निकालना पड़ा।
पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। इसी दौरान, अगले प्रीलिम्स से मात्र 15 दिन पहले, उनके पिता का निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था। बावजूद इसके, उन्होंने खुद को संभाला और परीक्षा दी।
लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर विवेक ने यूपीएससी की तीनों परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं और 667वीं रैंक प्राप्त की। हालांकि रैंक अपेक्षा से कम थी, इसलिए उन्होंने एक बार फिर खुद को परखने का फैसला किया। 2019 में उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 301वीं रैंक हासिल की।
ये भी पढ़ें:
निरंतर मेहनत और खुद पर भरोसा है भोपाल के आईएएस अभिषेक सराफ का सक्सेस मंत्र
सिनेमा और फोटोग्राफी का शौक
काम के साथ-साथ विवेक को सिनेमा और फोटोग्राफी का भी गहरा शौक है। बचपन में वे मां के साथ सिनेमा देखने जाते थे, वहीं से इस रुचि की शुरुआत हुई। आज भी जहां जाते हैं, कैमरा साथ रखना नहीं भूलते। यह शौक उन्हें जीवन को एक अलग नजरिये से देखने की दृष्टि देता है।
/sootr/media/post_attachments/56cf08fd-6c9.png)
टाइम मैनेजमेंट जरूरी है
IAS Vivek KV कहते हैं हर जगह सफलता के लिए सबसे जरूरी टाइम मैनेजमेंट है। वो स्कूल के दिनों से ही अपने समय का सही सदुपयोग करना समझ गए थे। वो कहते हैं समय की कमी के चलते मैंने चलती बस और ट्रेन में ही पढ़ाई करने की आदत डाल ली थी। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
ये भी पढ़ें:
आईएएस डॉ सौरभ सोनवणे: प्रशासन में किताबी ज्ञान नहीं, ऑन-द-स्पॉट निर्णय क्षमता आती है काम
करियर एक नजर
नाम: विवेक केवी
जन्म: 14/08/1988
जन्मस्थान: कासरगोड, केरल
एजुकेशन: बीटेक, एमबीए
बैच: 2020
कैडर: मध्यप्रदेश
पदस्थापना
आईएस विवेक केवी वर्तमान में मध्य प्रदेश के सागर जिला पंचायत सीईओ के पद पर कार्यरत है।
आईएएस विवेक की सफलता यह दर्शाती है कि हम कहां पैदा हुए, यह हमारे नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन अपने हालात बदलना पूरी तरह हमारे हाथ में होता है। ईमानदारी से मेहनत, मजबूत इच्छाशक्ति और खुद पर अटूट भरोसे के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
FAQ
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us