आईएएस मनीषा धार्वे ने मेहनत से बदली किस्मत, खरगोन की बेटी बनीं प्रदेश की पहली आदिवासी महिला IAS
Abhilasha Saksena Chakraborty | Feb 01, 2026, 15:14 IST
IAS Danisha Dharve
सीमित संसाधनों में पली-बढ़ी मनीषा ने अपने सपनों को हौसले की उड़ान दी। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर न सिर्फ अपना लक्ष्य हासिल किया, बल्कि प्रदेश की पहली आदिवासी महिला IAS बनकर पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया।
हालात जितने कठिन होते हैं, सपनों की जड़ें उतनी ही गहरी होती हैं। यह कहावत मध्य प्रदेश की मनीषा धार्वे की सफलता को परिभाषित करने के लिए सटीक है। सीमित संसाधनों, बार-बार की असफलताओं और ग्रामीण चुनौतियों के बावजूद भी उनका विश्वास कभी डगमगाया नहीं। आदिवासी समाज से आने वाली मनीषा ने यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि प्रदेश की पहली आदिवासी महिला IAS बनकर इतिहास भी रच दिया।
आईएएस मनीषा धार्वे का जन्म 30 जून 1999 को खरगोन जिले के झिरनिया ब्लॉक के छोटे से गांव बोंदरन्या में हुआ। वे जनजातीय समुदाय से आने वाली अपने गांव की पहली बेटी हैं, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की।उनकी यह उपलब्धि पूरे आदिवासी समाज के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गई है।
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मनीषा की सफलता के पीछे उनके परिवार की सोच और संस्कारों की बड़ी भूमिका रही। उनकी मां जमना धार्वे और पिता गंगाराम धार्वे दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं।पिता गंगाराम कभी इंदौर में इंजीनियर थे, लेकिन समाज के बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर शिक्षक बनने का फैसला किया।
यही कारण रहा कि उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई भी सरकारी स्कूलों में ही करवाई।मनीषा घर की बड़ी बेटी हैं। उनका एक छोटा भाई विकास धार्वे है, जो दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है।
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मनीषा की पढ़ाई की शुरुआत गांव की आंगनबाड़ी से हुई, जहां उन्होंने अपने बचपन के पांच साल बिताए।
कक्षा 1 से 8वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद 9वीं से 12वीं तक उन्होंने खरगोन के उत्कृष्ट स्कूल से शिक्षा प्राप्त की।
सीखने की ललक इतनी थी कि 11वीं में उन्होंने मैथ्स और बायोलॉजी दोनों विषय चुने। 10वीं में 75 प्रतिशत और 12वीं में 78 प्रतिशत हासिल किए।आगे की पढ़ाई के लिए मनीषा इंदौर गईं। उन्होंने होलकर कॉलेज से बीएससी कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की।
कॉलेज के दौरान मनीषा ने पहले MPPSC की तैयारी शुरू की थी। लेकिन दोस्तों ने उनकी क्षमताओं को पहचानते हुए उन्हें यूपीएससी की तैयारी की सलाह दी।यहीं से मनीषा ने तय कर लिया कि अब उनका लक्ष्य सिर्फ एक है कलेक्टर बनना।
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यूपीएससी की यात्रा मनीषा के लिए आसान नहीं रही। 2020 में पहला प्रयास दिया, लेकिन कुछ अंकों से चूक गईं। 2021 में दूसरा प्रयास प्रयास दिया लेकिन यहां भी असफलता हाथ लगी। इंदौर में रहकर तैयारी की और तीसरी बार परीक्षा दी। लेकिन सफलता नहीं मिली।
हर असफलता के बाद वे टूटने के बजाय और मजबूत होती गईं। गांव में बिजली की समस्या के कारण वे झिरनिया शिफ्ट हुईं, ताकि बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें।आखिरकार 2023 में चौथे प्रयास में मेहनत रंग लाई और मनीषा ने ऑल इंडिया रैंक 257 हासिल कर ली।
IAS Manisha Dharve का मानना है कि जब सरकारी योजनाएं सही तरीके से गांवों तक पहुंचती हैं, तो लोगों की जिंदगी सच में बदल सकती है। उन्होंने खुद इन योजनाओं का लाभ लिया है।इसी अनुभव के आधार पर वे भविष्य में ग्रामीण विकास, शिक्षा और आदिवासी उत्थान पर विशेष रूप से काम करना चाहती हैं।
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IAS Manisha Dharve वर्तमान में उत्तरप्रदेश के मितौली में खंड विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की मनीषा धार्वे की कहानी मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की एक जीवंत मिसाल है। आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली आईएएस मनीषा धार्वे ने कठिन संघर्षों को पार करते हुए अपनी अलग और प्रेरक पहचान स्थापित की है।उनकी सफलता आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
छोटे गांव से बड़े सपनों की शुरुआत
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परिवार में हमेशा शिक्षा का रहा महत्व
यही कारण रहा कि उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई भी सरकारी स्कूलों में ही करवाई।मनीषा घर की बड़ी बेटी हैं। उनका एक छोटा भाई विकास धार्वे है, जो दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है।
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आंगनबाड़ी से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर
कक्षा 1 से 8वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद 9वीं से 12वीं तक उन्होंने खरगोन के उत्कृष्ट स्कूल से शिक्षा प्राप्त की।
सीखने की ललक इतनी थी कि 11वीं में उन्होंने मैथ्स और बायोलॉजी दोनों विषय चुने। 10वीं में 75 प्रतिशत और 12वीं में 78 प्रतिशत हासिल किए।आगे की पढ़ाई के लिए मनीषा इंदौर गईं। उन्होंने होलकर कॉलेज से बीएससी कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की।
कॉलेज से UPSC तक का सपना
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चौथी कोशिश में साकार हुआ सपना
हर असफलता के बाद वे टूटने के बजाय और मजबूत होती गईं। गांव में बिजली की समस्या के कारण वे झिरनिया शिफ्ट हुईं, ताकि बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें।आखिरकार 2023 में चौथे प्रयास में मेहनत रंग लाई और मनीषा ने ऑल इंडिया रैंक 257 हासिल कर ली।
गांव और आदिवासी समाज के लिए सपना
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करियर एक नजर
- नाम: आईएएस मनीषा धार्वे
- जन्म: 30 जून 1999
- जन्मस्थान: बोंदरन्या, झिरनिया ब्लॉक, खरगोन
- एजुकेशन: बीएससी (कंप्यूटर साइंस)
- बैच: 2024
- कैडर: उत्तरप्रदेश
पदस्थापना
FAQ
- मनीषा धार्वे ने यूपीएससी किस वर्ष और किस रैंक के साथ पास की?
मनीषा धार्वे ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया रैंक 257 हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया। - मनीषा धार्वे की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
मनीषा धार्वे ने इंदौर के होलकर कॉलेज से बीएससी (कंप्यूटर साइंस) की डिग्री हासिल की है। - मनीषा धार्वे की सफलता क्यों ऐतिहासिक मानी जाती है?
मनीषा धार्वे प्रदेश की पहली आदिवासी महिला IAS हैं, जिनकी सफलता ने आदिवासी समाज और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए नई प्रेरणा और उम्मीद जगाई है।
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