स्लम से IPS तक… आईपीएस मयंक गुर्जर के संघर्ष और जिद की कहानी
कभी इंदौर के एक छोटे से स्लम इलाके में रहने वाला एक लड़का… जिसके घर में आर्थिक तंगी, पिता की बीमारी और भविष्य की अनिश्चितता थी। उसी लड़के ने अपनी मेहनत और जिद से न सिर्फ आईआईटी का सपना पूरा किया, बल्कि देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी पास कर आईपीएस अफसर भी बन गया।
यह कहानी छत्तीसगढ़ कैडर के 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी मयंक गुर्जर की है। मयंक बस्तर में अब तक के सबसे बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन को लीड कर चुके हैं। यह ऑपरेशन करेगुट्टा की पहाड़ी पर चलाया गया था।
स्लम में बीता बचपन, संघर्षों के बीच पढ़ाई
मयंक गुर्जर का जन्म 4 जुलाई 1995 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के मुसाखेड़ी इलाके में हुआ। यह इलाका शहर के स्लम एरिया के रूप में जाना जाता है। उनका परिवार मूल रूप से हरदा जिले के डेडगांव का रहने वाला है, लेकिन बेहतर रोजगार की तलाश में उनके पिता गोविंद गुर्जर 1990 में इंदौर आकर बस गए थे।
पिता एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट थे और सीमित आय में परिवार का गुजारा चलता था। मयंक ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मध्य प्रदेश बोर्ड से की। बाद में सीबीएसई स्कूल में दाखिला लिया। इसी दौरान उन्हें 6th क्लास में साइंस सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री भी आ गई।
मां ने संभाली जिम्मेदारी
जब मयंक 11वीं में थे, तभी उनके पिता गंभीर रूप से बीमार रहने लगे। परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। मयंक स्कूल जाने के साथ-साथ अस्पताल जाकर पिता की सेवा भी करते थे। बारहवीं के दौरान जब आईआईटी की प्रवेश परीक्षा के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया। पिता ने निधन से कुछ दिन पहले अपनी मयंक की मां से कहा था, हालात चाहे जैसे हों, मयंक की पढ़ाई मत रुकने देना।
आईआईटी से लेकर UPSC तक
मयंक ने पहले प्रयास में जेईई परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन मनचाहा कॉलेज नहीं मिला। इसलिए उन्होंने एक साल और तैयारी की।
दूसरे प्रयास में उन्होंने आईआईटी मुंबई में केमिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश मिल गया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने स्कॉलरशिप, ट्यूशन और एजुकेशन लोन के सहारे अपना खर्च चलाया। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी के बजाय UPSC की तैयारी का रास्ता चुना।
कोचिंग की बेंच पर गुजारी रातें
दिल्ली में UPSC की तैयारी के दौरान आर्थिक तंगी फिर सामने आई। कुछ समय तक किराए का कमरा नहीं मिलने के कारण मयंक ने कोचिंग की बेंच पर ही रातें गुजारकर पढ़ाई की। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहले ही प्रयास में 455वीं रैंक के साथ UPSC परीक्षा पास कर ली और आईपीएस के लिए चयनित हो गए।
आईपीएस बनने के बाद का सफर
10 अक्टूबर 2020 को मयंक गुर्जर ने आईपीएस सेवा ज्वाइन की। हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी फील्ड ट्रेनिंग छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हुई। डोंगरगांव थाना प्रभारी के रूप में IPS Mayank Gurjar ने जनता के सहयोग से करीब 50 लाख रुपए के सीसीटीवी कैमरा प्रोजेक्ट की शुरुआत कराई।
इसके बाद वे रायपुर में आजाद चौक के सीएसपी रहे। इसके बाद मयंक मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में एडिशनल एसपी के पद पर पदस्थ रहे। यहां से वे बीजापुर के एएसपी ऑपरेशन बने।
रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद अब वे डीसीपी (नार्थ) हैं। मयंक को कैरियर की शुरुआत में ही फिक्की का स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड मिला है। इसके साथ ही उन्हें गृह मंत्री दक्षता अवार्ड भी मिल चुका है। यह अवार्ड काफी सीनियरिटी के बाद मिलता है, लेकिन मयंक को कैरियर की शुरुआत में ही मिल चुका है।
आईपीएस मयंक गुर्जर को कठिन जिम्मेदारियों के बीच कुकिंग करना और गाने सुनना काफी पसंद है।
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