शिक्षिका थीं, पत्रकार बनना चाहती थीं, फिर बिना कोचिंग IPS बनीं लेडी सिंघम
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को देश का सबसे कठिन इम्तिहान माना जाता है। जहां लोग दिल्ली-इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों में सालों साल कोचिंग लेकर भी सफलता के लिए तरसते हैं।
लेकिन राजस्थान की एक बेटी ने अपने घर पर रहकर, बिना किसी कोचिंग के, न केवल पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को क्रैक किया बल्कि पुलिस महकमे में अपनी ऐसी धाक जमाई कि आज अपराधी उनके नाम से कांपते हैं।
यह कहानी है साल 2008 बैच की राजस्थान कैडर की बेहद कड़क आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा की। चंबल के बीहड़ों में डकैतों का सफाया करने से लेकर देह व्यापार और मानव तस्करी के रैकेट को ध्वस्त करने वाली प्रीति चंद्रा को जनता प्यार और सम्मान से लेडी सिंघम कहती है।
सीकर की माटी और मां का बड़ा विज़न
आईपीएस प्रीति चंद्रा मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली हैं। उनका परिवार एक सामान्य पृष्ठभूमि से आता है। उनकी मां भले ही खुद ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन वे शिक्षा की ताकत को बहुत अच्छे से पहचानती थीं।
उन्होंने अपनी बेटी को रूढ़िवादी सामाजिक बंधनों से दूर रखकर हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रीति ने अपनी स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा राजस्थान में ही पूरी की। वे पढ़ाई में इतनी बेहतरीन थीं कि उन्होंने बी.एड. के साथ-साथ एम.फिल. की उच्च डिग्री भी हासिल की।
पत्रकार बनने का था सपना, बन गईं स्कूल टीचर
प्रीति चंद्रा का शुरुआती सपना एक बेबाक पत्रकार बनने का था। अपनी पढ़ाई के दौरान वे मीडिया के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने जयपुर में एक लोकल केबल टीवी चैनल में न्यूज़ रीडर के रूप में काम भी किया।
हालांकि, परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि उन्होंने एक स्कूल शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया। वे बच्चों को पढ़ा ही रही थीं कि उनकी मां ने उनकी प्रशासनिक क्षमता को पहचाना और उन्हें सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) की तैयारी करने की सलाह दी।
मां की इसी प्रेरणा ने प्रीति का लक्ष्य बदल दिया और वे शिक्षिका की नौकरी के साथ तैयारी में जुट गईं।
बिना कोचिंग पहले प्रयास में AIR 255
प्रीति चंद्रा की सफलता इस मायने में सबसे अनूठी है कि उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा के लिए किसी नामी कोचिंग संस्थान की शरण नहीं ली। उन्होंने पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी (खुद की पढ़ाई) और अनुशासन के दम पर की।
उनकी यह मेहनत साल 2008 में तब रंग लाई, जब उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 255वीं रैंक हासिल की। उनकी प्राथमिकता और योग्यता के आधार पर उन्हें राजस्थान कैडर में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) आवंटित की गई।
लेडी सिंघम का फील्ड पर खौफ
आईपीएस बनने के बाद प्रीति चंद्रा की पहली पोस्टिंग राजस्थान के अलवर जिले में हुई, जहां उन्होंने शुरुआत से ही अपराधियों पर नकेल कसना शुरू कर दिया। इसके बाद वे जहां भी रहीं, उन्होंने कानून-व्यवस्था की एक नई मिसाल पेश की:
बीहड़ के डकैतों में डर
करौली में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में तैनात रहने के दौरान प्रीति चंद्रा ने वह कर दिखाया जो कई पुरुष अधिकारी नहीं कर पाए थे। उन्होंने चंबल के बीहड़ों में सक्रिय कुख्यात डकैत गिरोहों के खिलाफ एक बड़ा सशस्त्र अभियान चलाया।
उनके इस सख्त और आक्रामक रवैये का ऐसा खौफ पैदा हुआ कि कई बड़े बदमाशों ने खुद पुलिस थाने आकर सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दिया।
मानव तस्करी और देह व्यापार पर प्रहार
बूंदी और अलवर में एसपी रहने के दौरान उन्होंने देह व्यापार से जुड़े एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। इस साहसिक कार्रवाई के तहत उन्होंने कई मासूम लड़कियों को अपराधियों के चंगुल से मुक्त कराया और सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया।
बीकानेर की पहली महिला एसपी
प्रीति चंद्रा के नाम बीकानेर जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक (SP) होने का ऐतिहासिक गौरव दर्ज है।
भ्रष्टाचार पर लगाम
उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा में भी अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने अपनी खुफिया रणनीति से कई भ्रष्ट और रसूखदार अधिकारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोचा।
अपराधियों के साथ-साथ विभाग में भी धाक
बीकानेर में तैनाती के दौरान जब पुलिस महकमे के ही एक दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) ने उनकी जासूसी करने का दुस्साहस किया, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे तुरंत रंगे हाथों पकड़वाकर जेल भिजवा दिया।
इस घटना से पूरे पुलिस महकमे में यह संदेश गया कि मैडम अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।
वर्तमान कमान, आईजी लॉ एंड ऑर्डर
अपनी बेबाक और सख्त कार्यशैली के कारण प्रीति चंद्रा पिछले कुछ समय से तुलनात्मक रूप से शांत पदों (जैसे आर्म्ड बटालियन) पर तैनात थीं।
लेकिन उनकी प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संभालने की अद्भुत क्षमता को देखते हुए, हाल ही में उन्हें आईजी लॉ एंड ऑर्डर जैसे बेहद रसूखदार और महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आईपीएस प्रीति चंद्रा के जीवन से युवाओं के लिए बड़े सबक
कल तक जो प्रीति चंद्रा बच्चों को चॉक और डस्टर से ब्लैकबोर्ड पर पढ़ा रही थीं, आज वे हाथों में खाकी की कमान और कंधे पर अशोक स्तंभ का स्टार लगाकर राजस्थान की कानून-व्यवस्था को संभाल रही हैं।
फील्ड पर वे जितनी सख्त और अनुशासित हैं, व्यक्तिगत जीवन में उतनी ही सादगी पसंद और सरल इंसान मानी जाती हैं।
आईपीएस प्रीति चंद्रा का यह सफर देश की हर उस लड़की के लिए एक खुली प्रेरणा है जो यह सोचती है कि प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए बड़े शहरों और महंगे साधनों की जरूरत होती है। उन्होंने साबित कर दिया कि सिंहासन महलों से नहीं, बल्कि आपके इरादों की मजबूती और आपके काम की गूंज से तय होता है।
ये भी पढ़ें:-
सोशल मीडिया और शौक छोड़े बिना 23 साल की उम्र में IAS बने सिद्धार्थ पलानीचामी
छोटे से गांव से UPSC रैंक 62 तक का सफर, आईएएस जोगाराम की कहानी
अफसरों की बेरुखी से जन्मा संकल्प, ₹5 लाख महीना छोड़ IAS बने धीरज कुमार सिंह
संघर्ष, बीमारी और सपने की उड़ान, आईएएस प्रतिभा वर्मा की सफलता की कहानी