बस एक इंजेक्शन और हमेशा के लिए कंट्रोल हो जाएगा कोलेस्ट्रॉल
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिकीकंपनियों ने कोलेस्ट्रॉल के लिए नई जीनथेरेपी टेस्ट की है।
- इसका नाम VERVE-102है, यह एक बार काइंजेक्शन है।
- यह लीवर के PCSK9 जीन कोहमेशा के लिए बंद कर देता है।
- ट्रायल मेंबैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL62प्रतिशत तक घटा है।
- यह थेरेपी अभी शुरुआतीट्रायल में है, बाजार में आने में देरलगेगी।
रोज सुबह एक गोली खाना कई मरीजों के लिए बड़ी झंझट है। अगले दिन फिर वही गोली याद रखनी पड़ती है। साल दर साल यह सिलसिला चलता रहता है। अब वैज्ञानिकों ने इसका हल खोजने की कोशिश की है।
अमेरिकी कंपनी एली लिली और उसकी सहायक कंपनी वर्व थेराप्युटिक्स ने एक नई जीन एडिटिंग थेरेपी का शुरुआती डेटा जारी किया है। इस थेरेपी का नाम VERVE-102 है। यह एक बार लगने वाला इंजेक्शन है। यह शरीर के PCSK9 जीन को लीवर के अंदर हमेशा के लिए बंद कर देता है। इसी जीन की वजह से खून में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।
आपसे क्यों जुड़ा है यह
यदि परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ है, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट यह साफ बताती है। यह रिपोर्ट 2022-24 की है। इसके मुताबिक देश में हर तीसरी मौत की वजह हृदय रोग है। हृदय रोग में कोलेस्ट्रॉल की भूमिका सबसे बड़ी मानी जाती है। कई मरीज रोज दवा लेना भूल जाते हैं। कुछ मरीज इंजेक्शन से भी डरते हैं। ऐसे मरीजों के लिए एक बार का इलाज बड़ा बदलाव ला सकता है।
पहले के इलाज विकल्प
अभी तक कोलेस्ट्रॉल कम करने के तीन रास्ते रहे हैं। पहला है स्टेटिन, यानी रोज खाने वाली गोलियां। दूसरा है PCSK9 इनहिबिटर इंजेक्शन, जो हर दो से चार हफ्ते में लगता है। तीसरा है जीन आधारित कुछ दवाएं, जो साल में दो बार दी जाती हैं। इन सभी में एक ही दिक्कत है। असर बनाए रखने के लिए बार-बार दवा लेनी पड़ती है।
वर्व थेराप्युटिक्स ने पहले एक थेरेपी आजमाई थी, नाम था VERVE-101। लेकिन एक मरीज में लिवर एंजाइम बढ़ने की दिक्कत सामने आई। प्लेटलेट भी गिरने लगे थे। इसके बाद कंपनी ने वह प्रोग्राम रोक दिया। कंपनी ने डिलीवरी सिस्टम बदलकर VERVE-102 पर काम शुरू किया।
कैसे काम करती है थेरेपी
PCSK9 (Proprotein Convertase Subtilisin Kexin type 9) एक प्रोटीन है, जो लीवर में बनता है। यह LDL रिसेप्टर को खत्म कर देता है। इससे खून से बैड कोलेस्ट्रॉल साफ नहीं हो पाता। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनमें यह जीन शुरू से कमजोर होता है। ऐसे लोगों का LDL जीवनभर कम रहता है। इनमें हार्ट डिजीज का खतरा भी कम पाया जाता है। यही बात वैज्ञानिकों को इस थेरेपी तक ले आई।
VERVE-102 mRNA (Messenger Ribonucleic Acid) आधारित तकनीक पर काम करता है। इसमें एक बेस एडिटर प्रोटीन बनाने का निर्देश होता है। साथ में एक गाइड RNA भी होता है, जो सीधे PCSK9 जीन को निशाना बनाता है। यह सब एक लिपिड नैनोपार्टिकल में पैक किया जाता है। फिर इसे नस के जरिए शरीर में चढ़ाया जाता है। एक बार अंदर जाकर यह जीन में एक अक्षर बदल देता है। बस इतना ही जीन को हमेशा के लिए बंद करने के लिए काफी है। इसे यूं समझिए। किसी फैक्ट्री की खराब मशीन को रोज बंद करने की जगह उसकी वायरिंग ही काट दी जाए।
ट्रायल में क्या मिला नतीजा
ट्रायल में कुल छह अलग-अलग डोज आजमाई गईं। सबसे कम डोज पर LDL सिर्फ 9 प्रतिशत गिरा। सबसे ज्यादा डोज पर यह गिरावट 62 प्रतिशत तक पहुंची। यह डोज एक मिलीग्राम प्रति किलो वजन की थी। मतलब मरीजों में औसतन 78 mg/dL की सीधी कमी देखी गई। PCSK9 प्रोटीन का स्तर भी 88 प्रतिशत तक गिर गया। यह असर 18 महीने तक बना रहा।
यह डेटा 35 मरीजों पर हुए फेज 1बी ट्रायल से आया है। रिजल्ट न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में 25 मई 2026 को छपे। लंदन स्थित ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के प्रोफेसर डेविड न्यूबी इस ट्रायल के सह-लेखक हैं। उन्होंने बताया कि पारंपरिक इलाज में असर बनाए रखने के लिए दवा लगातार लेनी पड़ती है। उनके मुताबिक इस थेरेपी में लीवर की कोशिकाओं में एक बार का बदलाव ही असर को बनाए रखता है।
कौन बना रहा है दवा
एली लिली इस थेरेपी को आगे बढ़ा रही है। कंपनी ने पिछले साल करीब एक अरब डॉलर में वर्व थेराप्युटिक्स को खरीदा था। ट्रायल में वही मरीज शामिल किए गए हैं, जिन्हें जन्म से हाई कोलेस्ट्रॉल की बीमारी है। कुछ मरीजों को कम उम्र में ही हार्ट डिजीज हो चुकी है।
अमेरिकी FDA (Food and Drug Administration) ने इस थेरेपी को फास्ट ट्रैक दर्जा दिया है। इससे रिव्यू प्रोसेस तेज हो सकता है। दूसरी तरफ एम्जेन जैसी कंपनियां भी इस बाजार में हैं। एम्जेन का PCSK9 इनहिबिटर रिपाथा पहले से बाजार में मौजूद है। लेकिन उसे हर दो से चार हफ्ते में इंजेक्शन चाहिए होता है।
फायदे और खतरे दोनों
जो लोग इसे क्रांतिकारी मानते हैं, उनका तर्क सीधा है। दवा भूलना या इंजेक्शन से बचना इंसानी स्वभाव है। यही वजह है कि आधे मरीज एक साल बाद इलाज छोड़ देते हैं। एक बार का इलाज इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकता है। लेकिन सावधान रहने वालों की बात भी उतनी ही वाजिब है। यह जीन में एक स्थायी बदलाव है। अगर कोई दिक्कत सामने आई, तो उसे वापस नहीं किया जा सकता।
अभी तक सिर्फ 18 महीने का फॉलो-अप डेटा मौजूद है। दशकों तक असर बने रहने का दावा अभी साबित होना बाकी है। खुद वर्व का पहला प्रयोग सुरक्षा कारणों से रोकना पड़ा था। इसलिए कंपनी ने सभी ट्रायल मरीजों को अगले 15 साल तक फॉलो करने की योजना बनाई है।
आगे क्या होगा अब
एली लिली इस साल के अंत तक फेज दो ट्रायल शुरू करने की तैयारी में है। अगर वहां भी नतीजे सुरक्षित और असरदार रहे, तो अगला कदम बड़े पैमाने के ट्रायल होंगे। इसमें कई साल लग सकते हैं। फिलहाल यह इलाज आम मरीजों के लिए बाजार में उपलब्ध नहीं है। स्टेटिन या मौजूदा इंजेक्शन छोड़ने की अभी कोई वजह नहीं बनती। डॉक्टर की सलाह से इलाज जारी रखना ही सही रास्ता है। अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट भी नियमित रूप से कराते रहें।
रोचक तथ्य जो कम पता हैं
बहुत कम लोग जानते हैं कि PCSK9 जीन की खोज असल में कुछ खास परिवारों से शुरू हुई थी। इन परिवारों के सदस्यों का LDL कोलेस्ट्रॉल जन्म से ही बेहद कम था। इन लोगों को हार्ट डिजीज लगभग छूती ही नहीं थी। वैज्ञानिकों ने बीस साल पहले इसका राज खोला था। तभी से यह सवाल उठा कि क्या शरीर की यह प्राकृतिक सुरक्षा दवा के जरिए दोहराई जा सकती है। VERVE-102 उसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है।
FAQ
- VERVE-102 थेरेपी क्या है?
VERVE-102 एक जीन एडिटिंग थेरेपी है, जो सिर्फ एक बार इंजेक्शन के जरिए दी जाती है। यह लीवर के PCSK9 जीन को स्थायी रूप से बंद कर देती है। इससे खून में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर लंबे समय तक कम रहता है। यह अभी फेज 1बी ट्रायल में है और आम मरीजों के लिए बाजार में उपलब्ध नहीं है।
ये खबरें भी पढ़िए...
ICMR का सबसे बड़ा खुलासा: 87% से ज्यादा भारतीयों का कोलेस्ट्रॉल लेवल खराब
क्या है VERVE-102 दवा: सिंगल डोज में कोलेस्ट्रॉल का खेल खत्म, जानें कैसे
छह महीने तक कंट्रोल में रहेगा कोलेस्ट्रॉल का लेवल: नई दवा से दिल की बीमारी पर काबू पाएंगे मरीज