सितारों की चमक पर दांव, अब सेलिब्रिटी ब्रांड नहीं पूरा बाजार खरीद रहे बड़े रिटेलर
भारत में सेलिब्रिटी ब्रांड्स का दौर नया नहीं है। फिल्म सितारे, क्रिकेटर और फैशन आइकॉन पिछले कई वर्षों से अपने नाम पर फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ब्रांड लांच करते रहे हैं। शुरुआत में इन ब्रांड्स को लेकर जबरदस्त चर्चा होती थी। सोशल मीडिया पर प्रचार, ग्लैमरस कैंपेन और फैंस की उत्सुकता के कारण लॉन्च के समय इनकी खूब चर्चा होती थी। लेकिन समय बीतने के साथ यह भी साफ होता गया कि केवल स्टारडम के दम पर लंबे समय तक कारोबार चलाना आसान नहीं है। अब इसी कहानी में नया मोड़ आया है। भारत के बड़े रिटेल समूह अब इन सेलिब्रिटी ब्रांड्स को सिर्फ स्टार प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बड़े बिजनेस अवसर के रूप में देखने लगे हैं। यही वजह है कि रिलायंस रिटेल, नायका, मिंत्रा और आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल जैसी कंपनियां अब इन ब्रांड्स में हिस्सेदारी खरीद रही हैं या उन्हें पूरी तरह अपने नेटवर्क में शामिल कर रही हैं।
स्टार पावर के जरिए बाजार पर कब्जे की तैयारी
इस ट्रेंड की सबसे ताजा मिसाल रिलायंस रिटेल है। रिलायंस ने हाल ही में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस के ग्लोबल हेयरकेयर ब्रांड अनॉमली का अधिग्रहण किया है। यह कदम केवल एक ब्रांड खरीदने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे रिलायंस के ब्यूटी प्लेटफॉर्म टीरा को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अनॉमली पहले नायका पर भी उपलब्ध था, लेकिन अब इसके टीरा पर एक्सक्लूसिव होने की संभावना है। यानी रिलायंस सिर्फ उत्पाद नहीं खरीद रहा, बल्कि ग्राहकों का ध्यान और वफादारी भी अपने प्लेटफॉर्म की ओर खींच रहा है। रिलायंस पहले से ही कई सेलिब्रिटी ब्रांड्स में निवेश कर चुका है। कंपनी अभिनेत्री आलिया भट्ट के बच्चों के कपड़ों के ब्रांड एड ए मम्मा में बहुमत वाली हिस्सेदारी रखती है। इसके अलावा रिलायंस ने फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के लक्जरी एथनिक ब्रांड एमएम स्टाइल्स में भी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी ले रखी है। यह साफ संकेत है कि रिलायंस अब फैशन और ब्यूटी बाजार में केवल रिटेलर नहीं, बल्कि ब्रांड कलेक्टर की भूमिका में उतर चुका है।
नायका की नजर दीपिका के ब्रांड पर
ब्यूटी रिटेल कंपनी नायका (nykaa) भी इसी राह पर बढ़ती दिख रही है। कंपनी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के स्किनकेयर ब्रांड 82°E में बहुमत वाली हिस्सेदारी खरीदने की बातचीत कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि 82°E का प्रदर्शन बहुत मजबूत नहीं रहा। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की आय लगभग 30 प्रतिशत गिरकर 14.7 करोड़ रुपए रह गई, जबकि कंपनी को 12.26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। इसके बावजूद नायका इस ब्रांड में संभावना देख रही है। वजह साफ है दीपिका पादुकोण की स्टार वैल्यू और प्रीमियम ग्राहकों के बीच उनकी मजबूत पहचान। रिटेल कंपनियां अब यह मानने लगी हैं कि अगर किसी ब्रांड के पास पहले से उपभोक्ताओं का ध्यान और भरोसा है, तो बड़े वितरण नेटवर्क और पूंजी के जरिए उसे बड़े स्तर पर पहुंचाया जा सकता है।
पहले भी हुए बड़े सौदे
यह ट्रेंड अचानक नहीं आया। पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े रिटेलर सेलिब्रिटी ब्रांड्स में हिस्सेदारी ले चुके हैं। मिंत्रा ने 2016 में अभिनेता ऋतिक रोशन के फिटनेस ब्रांड HRX में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी थी। बाद में HRX भारत के सबसे चर्चित फिटनेस और एक्टिववियर ब्रांड्स में शामिल हुआ। इसी तरह नायका ने अभिनेत्री कैटरीना कैफ के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर के ब्यूटी लॉन्च किया, जिसमें नायका की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह ब्रांड आज भारतीय ब्यूटी बाजार में सफल सेलिब्रिटी ब्रांड्स में गिना जाता है। दूसरी ओर आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड ने क्रिकेटर विराट कोहली के युवा फैशन ब्रांड रॉन्ग में हिस्सेदारी लेकर उसे बड़े स्तर पर विस्तार दिया। आज रॉन्ग देश के प्रमुख यूथ फैशन ब्रांड्स में शामिल है। इन उदाहरणों ने बड़े रिटेल समूहों को यह भरोसा दिया कि अगर सही सपोर्ट सिस्टम मिले, तो सेलिब्रिटी ब्रांड्स केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि मजबूत कारोबार भी बन सकते हैं।
इन ब्रांड्स में ऐसा क्या
असल में इन कंपनियों का आकर्षण मौजूदा मुनाफे से ज्यादा ब्रांड रिकॉल और एस्पिरेशनल वैल्यू है। सोशल मीडिया के दौर में लोगों का ध्यान सबसे महंगी चीज बन चुका है। जब कोई सेलिब्रिटी किसी ब्रांड से जुड़ता है, तो उस ब्रांड को शुरुआत से पहचान बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। करोड़ों फॉलोअर्स पहले से उसके संभावित ग्राहक बन जाते हैं। यही वजह है कि बड़े समूह इन ब्रांड्स को अपने विशाल सप्लाई नेटवर्क, ऑफलाइन स्टोर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़कर तेजी से विस्तार देना चाहते हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस या मैरिको जैसे बड़े समूहों के पास वितरण, सप्लाई चेन और पूंजी की ताकत होती है। वे उन ब्रांड्स को भी स्केल कर सकते हैं, जो अकेले स्टार्टअप के रूप में संघर्ष कर रहे हों।
बाजार की सीमाएं भी बनी वजह
भारत में डायरेक्ट टू कंज्यूमर ब्रांड्स ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से वृद्धि की। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कई नए ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हुए। क्रिसिल रेटिंग्स की 82 एफएमसीजी कंपनियों पर आधारित एक स्टडी के अनुसार 2021 से 2024 के बीच डायरेक्ट टू कंज्यूमर कंपनियों ने लगभग 40 प्रतिशत सीएजीआर की दर से वृद्धि की, जबकि स्थापित एफएमसीजी कंपनियों की वृद्धि करीब 9 प्रतिशत रही। तेजी से बढ़ने के बावजूद अधिकांश डायरेक्ट टू कंज्यूमर ब्रांड्स एक सीमा के बाद संघर्ष करने लगे। अध्ययन के मुताबिक अधिग्रहण से पहले केवल 15 प्रतिशत डायरेक्ट टू कंज्यूमर कंपनियां ही 250 करोड़ रुपए के राजस्व का आंकड़ा पार कर पाई। यानी डिजिटल चर्चा और सोशल मीडिया लोकप्रियता को स्थायी और बड़े कारोबार में बदलना आसान नहीं रहा। यही वह जगह है जहां बड़े रिटेल समूह अवसर देख रहे हैं।
पहली पीढ़ी के सेलिब्रिटी ब्रांड क्यों नहीं टिक पाए
भारत में सेलिब्रिटी ब्रांड्स की पहली लहर बहुत सफल नहीं रही। अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का फैशन ब्रांड नश , अभिनेता शाहिद कपूर का स्कल्ट और दीपिका पादुकोण का आल अबाउट यू जैसे कई ब्रांड शुरुआती चर्चा के बाद अपनी गति बनाए नहीं रख पाए। विशेषज्ञों का मानना है कि उस दौर में अधिकतर सेलिब्रिटी केवल प्रचार चेहरा बनकर रह गए थे। असली संचालन एजेंसियों और पार्टनर्स के हाथ में था। सप्लाई चेन, प्राइसिंग, प्रोडक्ट क्वालिटी और ग्राहक अनुभव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि लांच का शोर खत्म होते ही ग्राहकों की रुचि भी कम होने लगी।
अब बदल गया है पूरा मॉडल
अब नया दौर अलग है। यहां सेलिब्रिटी केवल ब्रांड एंबेसडर नहीं, बल्कि बड़े रिटेल इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं। बड़े समूह इन ब्रांड्स को अपने डेटा, सप्लाई चेन, स्टोर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ रहे हैं। यानी अब स्टारडम अकेले कारोबार नहीं चला रहा, बल्कि उसके पीछे कॉरपोरेट मशीनरी भी पूरी ताकत से काम कर रही है। भारत के रिटेल बाजार में यह बदलाव आने वाले वर्षों की नई तस्वीर दिखा रहा है। अब किसी ब्रांड की कीमत केवल उसके मुनाफे से तय नहीं होगी। अगर किसी नाम के पीछे करोड़ों लोगों की चाहत, सोशल मीडिया की ताकत और ग्लैमर जुड़ा है, तो वह घाटे में होने के बावजूद भी बड़े रिटेल समूहों के लिए बेहद कीमती संपत्ति बन सकता है।
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