स्मार्टफोन घटा रहा है दुनिया की आबादी, देखें रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- साल 2007 में पहली बार आईफोन के लॉन्च होने से स्मार्टफोन क्रांति की शुरुआत हुई।
- इसके बाद से अमेरिका, चीन और भारत जैसे बड़े देशों में जन्मदर लगातार गिर रही है।
- भारत में प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.9 पर आ गई है, जो काफी चिंताजनक है।
- स्मार्टफोन की वजह से लोगों का असल जिंदगी में आमने-सामने मिलना-जुलना बेहद कम हो गया है।
- एक्सपर्ट्स के अनुसार डिजिटल जीवनशैली के कारण युवा अब शादी और बच्चे देर से कर रहे हैं।
2007 में क्या बदला
जून 2007 में एप्पल ने पहला आईफोन लॉन्च किया। इसके बाद स्मार्टफोन दुनियाभर में फैल गए। साथ ही सोशल मीडिया, ऑनलाइन पोर्नोग्राफी और डेटिंग ऐप्स का भी विस्तार हुआ।
उसी दौर में दुनियाभर में जन्मदर गिरनी शुरू हुई। अमेरिका में प्रति एक हजार महिलाओं पर बच्चे पैदा होने की दर 2007 से 2024 के बीच 22 फीसदी घट गई। यह आंकड़ा नेशनल सेंटर फॉर हेल्थ स्टैटिस्टिक्स (NCHS – National Centre for Health Statistics) के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया।
दुनिया के बड़े देशों में भी यही हाल
स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या के मामले में चीन पहले नंबर पर है। भारत दूसरे और अमेरिका तीसरे नंबर पर है। इन्हीं देशों में जन्मदर पर सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।
भारत में भी शहरी परिवारों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। 2011 की जनगणना की तुलना में 2021 के आंकड़े यही कहानी कहते हैं।
भारत में क्या है हाल
भारत में SRS (Sample Registration System) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक देश की TFR 1.9 से नीचे आ गई है। यह आंकड़ा चिंताजनक इसलिए है क्योंकि भारत का replacement rate 2.15 है। इसका मतलब है कि अगर TFR 2.15 से नीचे रहे तो आबादी धीरे-धीरे घटने लगती है।
मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1985 में भारत की TFR 4.3 थी। तब से यह हर साल करीब 0.06 की दर से गिर रही है। अगर यही रफ्तार रही तो 2031 तक भारत की TFR 1.6 तक पहुंच सकती है।
कौन से राज्य बचे हुए हैं
भारत में अभी केवल पांच राज्य ऐसे हैं जहां TFR 2.1 से ऊपर है। ये हैं बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़। बाकी राज्यों में जन्मदर replacement level से नीचे जा चुकी है।
भारत में iPhone यूजर कितने हैं
भारत में करीब 1.14 अरब स्मार्टफोन यूजर हैं। इनमें से करीब 4.1 फीसदी यानी लगभग 4.7 करोड़ लोग iPhone इस्तेमाल करते हैं। भारत में iPhone का बाजार हिस्सा करीब 4 से 5 फीसदी है जबकि एंड्रॉइड का 95 फीसदी।
हालांकि iPhone यूजर की संख्या बढ़ रही है। Apple ने भारत में manufacturing शुरू की है और नए मॉडल सस्ते हो रहे हैं। यानी आने वाले सालों में iPhone यूजर और भी बढ़ेंगे।
स्मार्टफोन ने बदली ये आदतें
रिसर्चर जोनाथन हैड्ट ने इस बदलाव पर गहराई से काम किया। उनका कहना है कि स्मार्टफोन ने इंसान के सामाजिक व्यवहार को बदल दिया।
- पहली बात - आमने-सामने मिलना कम हुआ। लोग स्क्रीन पर ज्यादा, असल जिंदगी में कम मिलने लगे। इससे नई पहचान और रोमांटिक रिश्ते बनने कम हो गए।
- दूसरी बात - पोर्नोग्राफी तक आसान पहुंच बढ़ी। इससे असल रिश्तों में रुचि घटी।
- तीसरी बात - गर्भनिरोधक (Contraception) जानकारी आसानी से मिलने लगी।
- चौथी बात - डेटिंग ऐप्स ने लोगों को ज्यादा चुनाव दिया, लेकिन गंभीर रिश्ते कम हुए।
देर से शादी, देर से बच्चे
स्मार्टफोन के आने के बाद युवाओं में शादी करने की उम्र बढ़ गई। करियर, सोशल मीडिया और जीवनशैली की प्राथमिकताएं बदलीं।
जब शादी देर से होती है तो बच्चे भी देर से पैदा होते हैं। और कई बार बच्चे होते ही नहीं। यह बदलाव सिर्फ अमेरिका में नहीं, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत के शहरी इलाकों में भी दिखा।
मोबाइल का Fertility पर असर
Heat (गर्मी का असर)
- फोन ज्यादा इस्तेमाल या जेब में रखने से हल्की गर्मी बनती है
- लगातार गर्मी टेस्टिकल्स के तापमान को बढ़ा सकती है
- इससे स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर असर पड़ सकता है
EMF / Radiation (बहस का विषय)
- iPhone से low-level radiofrequency निकलती है
- अभी तक मजबूत वैज्ञानिक सबूत नहीं कि यह सीधे infertility करती है
- लेकिन कुछ स्टडीज़ में long exposure को लेकर “possible risk” बताया गया है
Habit issue (लाइफस्टाइल फैक्टर)
- देर रात फोन इस्तेमाल → नींद खराब
- खराब नींद → hormones (testosterone) पर असर
- यह indirectly fertility को प्रभावित कर सकता है
Phone in pocket रखने की आदत
- लगातार groin area के पास फोन रखने से heat exposure बढ़ता है
- यही सबसे discussed practical risk है
सीधी बात
- iPhone खुद “infertility का कारण” नहीं है
- लेकिन गलत इस्तेमाल + lifestyle factors मिलकर risk बढ़ा सकते हैं
आगे क्या होगा
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक भारत की आबादी 2060 के बाद घटनी शुरू हो सकती है। दक्षिण भारत और पश्चिमी राज्यों में जन्मदर पहले ही बहुत कम है।
जापान और दक्षिण कोरिया पहले से इस संकट में हैं। भारत के पास अभी कुछ वक्त है लेकिन शहरी इलाकों में यह बदलाव साफ दिख रहा है। MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ अभी safe zone में हैं लेकिन ट्रेंड वहां भी बदल रहा है।
एक्सपर्ट कोट्स
- मेलिसा केर्नी (अर्थशास्त्र प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ नोत्रे दाम) के हवाले से फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा कि डिजिटल माहौल ने लोगों में रोमांटिक संबंध बनाने की प्रवृत्ति कम की है।
- डेमोग्राफर लाइमन स्टोन के अनुसार सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताने से लोगों के पार्टनर के बारे में अपेक्षाएं असल जिंदगी से दूर हो जाती हैं।
FAQ
- TFR क्या होती है और भारत में अभी कितनी है?
TFR यानी Total Fertility Rate बताती है कि एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन कितने बच्चे पैदा करती है। भारत में 2024 की SRS रिपोर्ट के मुताबिक यह 1.9 पर आ गई है। replacement level 2.15 से नीचे होने का मतलब है कि आबादी भविष्य में घटेगी। - भारत में कितने लोग iPhone इस्तेमाल करते हैं?
भारत में करीब 4.7 करोड़ iPhone यूजर हैं जो कुल स्मार्टफोन यूजर का लगभग 4.1 फीसदी है। देश में एंड्रॉइड का बाजार हिस्सा 95 फीसदी है। Apple की manufacturing भारत में बढ़ने से यह संख्या आगे और बढ़ेगी। - क्या स्मार्टफोन सीधे जन्मदर गिरने की वजह है?
रिसर्च के मुताबिक स्मार्टफोन एकमात्र वजह नहीं है लेकिन बड़ा कारक है। स्मार्टफोन ने मिलना-जुलना, रिश्ते बनाना और शादी करने की उम्र सब बदल दिए हैं। महंगाई और करियर की प्राथमिकताएं भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
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