जेल से ग्लोबल आतंक तक, कैसे अमेरिका-कनाडा ने तोड़ी लॉरेंस गैंग की कमर
New Delhi: जेल के भीतर बैठकर क्या कोई अपराधी अमेरिका और कनाडा जैसे सुपरपावर देशों की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा सकता है? जवाब है- हां। भारत की जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरनेशनल क्राइम नेटवर्क अब पूरी दुनिया के रडार पर है।
पिछले दो साल से कनाडाई एजेंसियां जिस लॉरेंस नेटवर्क के पीछे लगी थीं, उस पर इस हफ्ते अमेरिका की एफबीआई की अगुवाई में चले ऑपरेशन हार्ड बॉल ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। कनाडाई एजेंसियां इस मामले में बहुत पहले से सक्रिय थीं।
इंटरनेशनल स्तर पर बढ़ती निगरानी
साल 2024 में कनाडाई पुलिस ने सार्वजनिक रूप से लॉरेंस गिरोह की पहचान की थी। कनाडा ने इसे एक आतंकी इकाई घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका में भी गैंग को बड़े मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों देशों के जांचकर्ता कनाडा में इसके संचालन को पूरी तरह बंद करने में जुटे हैं। नए आरोप पत्रों में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार का नाम शामिल है। इन पर कनाडाई धरती पर अपराध करने के आरोप हैं।
अमेरिका ने गोल्डी की गिरफ्तारी में मदद करने वाले के लिए 50 हजार डॉलर (करीब 47 लाख रुपए) के इनाम की घोषणा की है। यह अमेरिका और कनाडा में संगठित अपराध, रंगदारी, हिंसा और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत दाखिल तीन अलग-अलग चार्जशीट में 37 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बरार, जग्गू भगवानपुरिया, रविंदर सिंह ढांडा प्रमुख नाम है।
कनाडा में लॉरेंस गैंग की गतिविधियां
कनाडाई अधिकारियों ने पहली बार 14 अक्टूबर, 2024 को लॉरेंस गैंग का जिक्र किया था। वहां की पुलिस (आरसीएमपी) ने कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप और अपराधों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
असिस्टेंट कमिश्नर ब्रिगेट गॉविन ने तब बिश्नोई गैंग की पहचान की थी। जांचकर्ताओं का मानना था कि इस गैंग का इस्तेमाल खालिस्तान समर्थकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के कनाडा के सरे में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। इस घटना से भारत और कनाडा के राजनयिक संबंधों में तनाव आ गया था। शुरुआत में लॉरेंस गैंग पर की गई टिप्पणियों को इसी हत्या से जोड़ा गया था।
हालांकि, बाद में जबरन वसूली और गोलीबारी की घटनाओं ने पुलिस को लॉरेंस के संबंधों की जांच करने पर मजबूर किया।
कनाडा में लॉरेंस के प्रमुख मामले
एक प्रमुख मामले में लॉरेंस गैंग के 26 वर्षीय अभिजीत किंगरा और 24 वर्षीय विक्रम शर्मा आरोपी बने। इन पर कनाडा के सरे में जबरन वसूली के लिए गोलीबारी करने का आरोप था। इसी मामले से जांचकर्ता लॉरेंस गैंग तक पहुंचे।
किंगरा को अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार किंगरा ने माना कि उसने लॉरेंस गैंग के कहने पर आगजनी और हथियारों के अपराध किए थे।
जांचकर्ताओं ने किंगरा को सितंबर 2024 में हुई एक और गोलीबारी से जोड़ा। यह गोलीबारी ब्रिटिश कोलंबिया में पंजाबी गायक एपी ढिल्लों के घर पर हुई थी।
अधिकारियों का आरोप है कि किंगरा ने बॉडी-कैमरे से इस हमले को रिकॉर्ड किया था। फिर उसने इसे ऑनलाइन अपलोड किया, ताकि बिश्नोई गिरोह इसकी जिम्मेदारी ले सके।
जांचकर्ताओं के अनुसार ढिल्लों ने अपने एक म्यूजिक वीडियो में सलमान खान को दिखाया था। इसी के बदले में यह हमला किया गया था। इस काम के लिए किंगरा को लगभग 4,000 कनाडाई डॉलर मिले थे।
किंगरा का निर्वासन, विक्रम के भारत में होने का शक
दूसरा आरोपी विक्रम शर्मा कनाडा से भाग गया। उसके भारत में होने का संदेह है। इस साल जून में किंगरा के निर्वासन की कार्यवाही हुई।
किंगरा ने दावा किया कि गिरोह ने उसे और भारत में उसके परिवार को धमकियां दी हैं। गिरोह को लगता था कि उसने पुलिस का सहयोग किया है।
हालांकि, कनाडा के आव्रजन बोर्ड ने उसे एक आपराधिक संगठन का सदस्य माना। उसके निर्वासन का आदेश दे दिया।
जबरन वसूली का बढ़ता नेटवर्क
साल 2025 के मध्य तक जांच का पूरा ध्यान संगठित जबरन वसूली पर फोकस हो गया। ब्रिटिश कोलंबिया में दक्षिण एशियाई व्यापारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा था। ये घटनाएं इतनी बढ़ गईं कि राजनीति गरमा गई।
17 जून, 2025 को ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने संघीय सरकार से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हिंसा से न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा कम हो रहा है।
अगस्त 2025 में एबॉट्सफोर्ड पुलिस को बिश्नोई गिरोह का एक पत्र मिला। इससे यह मांग और तेज हो गई। पत्र में दावा किया गया था कि कनाडा भर में गोलीबारी करने के लिए गिरोह के पास 1,000 पैदल सैनिक (फुट सोल्जर्स) तैयार हैं।
यह पत्र बाद में आव्रजन बोर्ड की कार्यवाही में सामने आया। एडमंटन पुलिस के एक जांचकर्ता ने इसे गिरोह के डर और पहुंच के सबूत के रूप में पेश किया।
कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी फिनट्रैक (FINTRAC) ने भी इस पर रिपोर्ट दी। उसने गिरोह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) को पकड़ा।
एजेंसी ने बताया कि ग्रेटर टोरंटो और मेट्रो वैंकूवर के व्यापारियों को पहले धमकियां मिलती थीं और फिर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
आखिरकार, 29 सितंबर, 2025 को कनाडा ने लॉरेंस गिरोह को आधिकारिक तौर पर एक आतंकी इकाई के रूप में सूचीबद्ध कर दिया। यह कहा गया कि इस गिरोह ने हत्या, गोलीबारी, आगजनी और जबरन वसूली जैसी आतंकवादी गतिविधियों को जानबूझकर अंजाम दिया। इससे दक्षिण एशियाई समुदाय में डर का माहौल बना।
सीमा पार जांच और अमेरिकी एक्शन
आरसीएमपी की जांच इसके बाद सीमाओं के पार पहुंच गई। एक पीड़ित ने भारत में दो ब्लैकमेलरों को गिरफ्तार करवाने में पुलिस की मदद की थी। इसके बाद वह कनाडा शिफ्ट हो गया।
कनाडा आने पर उसे कैलिफोर्निया के निवासी जसमीत सिंह से जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। अमेरिकी अधिकारियों ने बाद में जसमीत पर लॉरेंस गिरोह की ओर से धमकी देने का आरोप लगाया।
दिसंबर 2023 में सैक्रूमेंटो एफबीआई कार्यालय का एक मामला सामने आया था। इसके अनुसार, लॉरेंस ने खुद एक पीड़ित से संपर्क किया था। बाद में उस पीड़ित के घर के बाहर उसकी गाड़ी पर गोलियां चलाई गई थीं।
इस साल जनवरी में ग्लोबल न्यूज ने आरसीएमपी के एक गुप्त राष्ट्रीय सुरक्षा मूल्यांकन की रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट में लॉरेंस गैंग को कनाडा और अन्य देशों में एक सक्रिय और लगातार बढ़ता हिंसक आपराधिक संगठन बताया गया।
इस पूरी अवधि में पुलिस ने अपराध का एक ही पैटर्न देखा। अपराधी फोन या मैसेजिंग ऐप पर धमकी देते थे। मांग पूरी न होने पर वे आगजनी या गोलीबारी करते थे।
इन्हीं सब जांचों के आधार पर इस सप्ताह अमेरिका और कनाडा ने मिलकर ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत कार्रवाई की।
गोल्डी बरार की भूमिका पर नया मोड़
नवीनतम घटनाक्रम में अमेरिकी न्याय विभाग ने बड़ी बात कही है। उसने आरसीएमपी के समर्थन से गोल्डी बरार को बिश्नोई नेटवर्क का नॉर्थ अमेरिकन कमांडर बताया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक गोल्डी बरार जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई की आवाज बनकर काम करता है। भारत, कनाडा और अमेरिका में जितने भी शूटर्स या फुट सोल्जर्स हैं, उन्हें क्या करना है और किसे निशाना बनाना है, इसके सारे निर्देश गोल्डी बरार ही देता है।
इस मामले में एक अजीब बात भी सामने आई है। गोल्डी बरार को मई 2023 में कनाडा के शीर्ष 25 सबसे वांछित भगोड़ों की सूची में शामिल किया गया था। लेकिन साल 2024 में उसका नाम इस सूची से चुपचाप हटा दिया गया।
इस कदम पर भारतीय अधिकारियों ने कड़ा विरोध जताया था। भारतीय पुलिस मई 2022 में पंजाब में हुए सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में गोल्डी बरार की तलाश कर रही है। गोल्डी पंजाब में फरीदकोट का रहने वाला है। उसका असली नाम सतिंदरजीत सिंह है।
हमारे पास 1,000 फुट सोल्जर्स तैयार
कनाडा के भीतर इस गैंग का दबदबा इस कदर था कि अगस्त 2025 में कनाडा की एबॉट्सफोर्ड पुलिस को एक चिट्ठी मिली।
इस चिट्ठी में बिश्नोई गैंग ने खुलेआम चुनौती दी। इसमें दावा किया कि कनाडा भर में जबरन वसूली और गोलीबारी को अंजाम देने के लिए हमारे पास 1,000 सोल्जर्स तैयार बैठे हैं।
कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी FINTRAC ने भी इस बात की पुष्टि की। उसने माना कि ग्रेटर टोरंटो और मेट्रो वैंकूवर के बड़े दक्षिण एशियाई बिजनेसमैन को पहले फोन और मैसेज पर धमकियां दी जाती थीं।
बात न मानने पर उनके घरों पर सीधे आगजनी या गोलीबारी की जाती थी। इसके बाद करोड़ों रुपए की रंगदारी को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए घुमाया जाता था।
जब कनाडा ने घोषित किया आतंकी संगठन
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हुई हत्या के बाद भारत और कनाडा के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण हो गए थे।
तब कनाडाई जांचकर्ताओं ने दावा किया था कि बिश्नोई गैंग का इस्तेमाल कनाडा की धरती पर खालिस्तान समर्थकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
बढ़ते दबाव और साउथ एशियाई व्यापारियों में फैले खौफ को देखते हुए 29 सितंबर, 2025 को कनाडा सरकार ने लॉरेंस गैंग को आधिकारिक तौर पर आतंकी यूनिट घोषित कर दिया।
अमेरिका की एंट्री और ऑपरेशन हार्ड बॉल
यह नेटवर्क सिर्फ कनाडा तक सीमित नहीं रहा। जब एक पीड़ित व्यक्ति भारत में दो ब्लैकमेकर्स को गिरफ्तार करवाकर सुरक्षित रहने कनाडा शिफ्ट हुआ, तो उसे कैलिफोर्निया (अमेरिका) में बैठे जसमीत सिंह नाम के शख्स से धमकियां मिलने लगीं।
यहां तक कि खुद बिश्नोई ने सैक्रामेंटो (अमेरिका) के एक पीड़ित को सीधे फोन किया। इसके बाद उस पीड़ित की गाड़ी पर गोलियां बरसाई गईं।
जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो अमेरिकी और कनाडाई खुफिया एजेंसियों ने हाथ मिलाया। उन्होंने ऑपरेशन हार्ड बॉल लॉन्च किया।
इस ऑपरेशन के तहत अब सीमा पार फैले इस पूरे सिंडिकेट पर शिकंजा कस दिया गया है। कई बड़े मुकदमों के जरिए इस अंतरराष्ट्रीय गैंग की रीढ़ तोड़ने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
क्लासिफाइड नेशनल सिक्योरिटी रिपोर्ट्स के मुताबिक यह गैंग अब सिर्फ क्रिमिनल ग्रुप नहीं, बल्कि कई देशों में फैला एक ग्लोबल थ्रेट बन चुका है। इसे खत्म करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी एजेंसियां एक साथ मैदान में उतरी हैं।
कौन है लॉरेंस बिश्नोई?
लॉरेंस बिश्नोई पंजाब के फाजिल्का जिले का रहने वाला है। उसके पिता हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल थे। लॉरेंस ने पंजाब के अबोहर में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। फिर डीएवी कॉलेज में पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ आ गया।
वह पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय हो गया। इसी दौरान उसकी मुलाकात गोल्डी बरार से हुई। बाद में दोनों ने आपराधिक नेटवर्क बनाया।
एक मामले में लॉरेंस को 2014 में जेल भेजा गया। वह गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में है। यही से वह पूरी दुनिया में आपराधिक नेटवर्क चलाता है।
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