OTT की बादशाहत खत्म, अब शुरू होगा नया खेल
भारतीय मनोरंजन उद्योग में इस समय एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ साल पहले तक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स यानी ओटीटी (OTT) दिग्गज जैसे नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और सोनीलिव के बीच इस बात की होड़ लगी रहती थी कि कौन सबसे ज्यादा एक्सक्लूसिव कंटेंट अपने प्लेटफॉर्म पर लाएगा। जो कंटेंट एक प्लेटफॉर्म पर है, वह कहीं और नहीं मिल सकता था, लेकिन अब क्रिएटर इकोनॉमी के तेजी से बढ़ने के साथ ही यह पुराना फॉर्मूला पूरी तरह बदल रहा है। अब एक्सक्लूसिव डील्स का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और उसकी जगह एक नया साझेदारी का मॉडल ले रहा है, जहां प्रीमियम स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और स्वतंत्र यूट्यूब क्रिएटर्स एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस नए बदलाव ने पूरे मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को एक नए रास्ते पर खड़ा कर दिया है।
एक्सक्लूसिविटी का खात्मा, नए जमाने की शुरुआत
पहले के समय में, कंटेंट का डिस्ट्रीब्यूशन ही सबसे बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज माना जाता था। जिस प्लेटफॉर्म के पास डिस्ट्रीब्यूशन के अधिकार होते थे, वही मार्केट पर राज करता था। इसीलिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स किसी भी नए शो या मूवी के लिए मोटी रकम चुकाकर एक्सक्लूसिविटी खरीदते थे ताकि दर्शकों को उनके प्लेटफॉर्म पर आना ही पड़े। अब दौर बदल रहा है। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स अब एक्सक्लूसिव प्रीमियर के लिए दबाव नहीं बना रहे हैं। इसके बजाय वे क्रिएटर्स के साथ राइट्स शेयर करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, ताकि वही शो उनके खुद के यूट्यूब चैनलों पर भी एक साथ डेब्यू कर सके।
इस बदलते दौर का सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण मशहूर कॉमेडियन समय रैना का शो इंडियाज गॉट लेटेंट है। इस शो का नया सीजन नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर एक साथ, एक ही समय पर प्रीमियर किया गया। यह भारतीय डिजिटल एंटरटेनमेंट के इतिहास में एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है। इसके अलावा, सोनीलिव ने हाल ही में परफेक्ट फैमिली नाम के शो को अपने सब्सक्रिप्शन कैटलॉग में शामिल किया है, जो पहले ही यूट्यूब पर धूम मचा चुका था। पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म्स यूट्यूब के हिट शोज को बाद के सीजन के लिए पिक करते थे, लेकिन अब पहली बार ऐसा हो रहा है कि वही कंटेंट एक ही साथ यूट्यूब पर फ्री में और एक प्रीमियम स्ट्रीमिंग सर्विस पर सब्सक्रिप्शन के साथ लॉन्च हो रहा है।
यूट्यूब मनोरंजन की डिस्कवरी लेयर
इस पूरे बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण दर्शकों का व्यवहार और ऑर्गेनिक अटेंशन है। आज के दौर में यूट्यूब भारतीय मनोरंजन के लिए एक डिस्कवरी लेयर बन चुका है। किसी भी शो का माहौल, उसकी बातें, और उससे जुड़े मीम्स सबसे पहले यूट्यूब और सोशल मीडिया पर ही वायरल होते हैं। जब छोटे-छोटे क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं, तभी किसी शो को लेकर आम जनता में एक जबरदस्त उत्साह पैदा होता है। मनोरंजन उद्योग के बड़े अधिकारियों का मानना है कि यूट्यूब वह जगह है जहां बातचीत शुरू होती है, क्लिप्स वायरल होती हैं, और यहीं से किसी शो को ऑर्गेनिक अटेंशन की पहली लहर मिलती है। अगर कोई शो सिर्फ एक पेड ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बंद रहेगा, तो उसकी पहुंच एक सीमित पेड ऑडियंस तक ही रह जाएगी। यूट्यूब पर आने से उसकी पहुंच कई गुना बढ़ जाती है, जिसका फायदा आखिरकार दोनों ही प्लेटफॉर्म्स को मिलता है।
लो-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड मॉडल
इस नए मॉडल से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को एक बहुत बड़ा फायदा यह होता है कि उनका रिस्क यानी जोखिम काफी कम हो जाता है। किसी नए और अनजाने कॉन्सेप्ट पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बजाए प्लेटफॉर्म्स अब उन क्रिएटर्स को चुन रहे हैं जिनके पास पहले से ही एक बहुत बड़ी और वफादार ऑडियंस मौजूद है। जब कोई क्रिएटर अपने स्थापित फैन बेस के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आता है, तो नए सब्सक्राइबर्स के जुड़ने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को एक कम रिस्क वाला रास्ता देता है। उन सब्सक्राइबर्स को आकर्षित करने का जो पहले से ही उन क्रिएटर्स के दीवाने हैं। वहीं दूसरी तरफ, क्रिएटर्स को इससे अपना दायरा बढ़ाने और उस नई ऑडियंस तक पहुंचने का मौका मिलता है जो शायद पहले उन्हें यूट्यूब पर नहीं देखती थी। यह एक तरह का वैल्यू एक्सचेंज है जहां दोनों ही पक्ष टेबल पर कुछ ना कुछ बड़ा और महत्वपूर्ण लेकर आते हैं।
कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन से आईपी मोनेटाइजेशन
क्रिएटर इकोनॉमी का यह बदलाव सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि वीडियो कहां और किस स्क्रीन पर देखा जा रहा है। असल में यह कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से हटकर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी आईपी मोनेटाइजेशन मॉडल की तरफ एक बड़ा कदम है। पहले बात सिर्फ इस पर होती थी कि कंटेंट को लोगों तक पहुंचाया कैसे जाए, लेकिन आज के दौर में बात इस पर होती है कि जो आईपी या ब्रांड क्रिएटर ने कड़ी मेहनत से बनाया है, उससे पैसे कैसे कमाए जाएं।
समय रैना, नेटफ्लिक्स और यूट्यूब की यह पार्टनरशिप इस बात का साफ संकेत है कि भारत में क्रिएटर लेड आईपी को अब एक बिल्कुल नए तरीके से मोनेटाइज किया जाएगा। जब एक क्रिएटर के पास अपनी खुद की बनाई हुई आईपी होती है, तो वह सिर्फ किसी एक प्लेटफॉर्म के भरोसे नहीं रहता। वह अपने ब्रांड को अलग-अलग मीडियम्स पर ले जा सकता है और हर जगह से रेवेन्यू जेनरेट कर सकता है।
क्रिएटर इकोसिस्टम का हिस्सा बनें
पुराने दौर में जहां डिस्ट्रीब्यूशन को सबसे बड़ी ताकत माना जाता था, वहीं आज के दौर में ऑडियंस ओनरशिप ही सबसे बड़ा किला यानी सुरक्षा कवच बन चुका है। इसका मतलब यह है कि अगर आपके पास एक ऐसी ऑडियंस है जो आप पर भरोसा करती है और आपके कंटेंट को हर हाल में देखना चाहती है, तो आप मार्केट में सबसे मजबूत स्थिति में हैं। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को भी अब यह समझ आ गया है कि एक सिंगल एक्सक्लूसिव कंटेंट विंडो खरीदने से ज्यादा फायदा इस बात में है कि वे क्रिएटर के पूरे इकोसिस्टम का हिस्सा बनें। जब एक क्रिएटर एक मजबूत कम्युनिटी बना लेता है, तो एक्सक्लूसिविटी ही वैल्यू क्रिएट करने का अकेला रास्ता नहीं रह जाती। प्लेटफॉर्म्स अब क्रिएटर के साथ उस रिश्ते को आगे बढ़ाने और उस आईपी को नई ऑडियंस तक पहुंचाने में मदद करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
बारगेनिंग पावर और भविष्य
इस नए बदलाव ने स्वतंत्र क्रिएटर्स को एक ऐसी ताकत दे दी है जो पहले कभी उनके पास नहीं थी। आज के क्रिएटर्स के पास न सिर्फ बेहतरीन कंटेंट बनाने की काबिलियत है, बल्कि उनके पास अपनी एक तैयार और समर्पित ऑडियंस भी है। जब क्रिएटर्स के पास कंटेंट और ऑडियंस दोनों होते हैं, तो उनकी बारगेनिंग पावर यानी प्लेटफॉर्म्स के साथ मोलभाव करने की क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। अब उन्हें किसी एक सिंगल डिस्ट्रीब्यूटर पर निर्भर रहने की कोई जरूरत नहीं है। वे अपनी शर्तों पर बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ डील्स साइन कर सकते हैं और अपनी आईपी पर अपना पूरा हक रख सकते हैं। आने वाले समय में हमें ऐसे और भी कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे जहां पारंपरिक बॉलीवुड फिल्में और बड़ी वेब सीरीज भी इस हाइब्रिड मॉडल को अपना सकती हैं। हाल ही में कुछ ऐसी फिल्में भी देखने को मिली हैं जो यूट्यूब पर फ्री में और पेड स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक साथ उपलब्ध कराई गई हैं। यह साफ दर्शाता है कि आने वाला कल किसी एक प्लेटफॉर्म की तानाशाही का नहीं, बल्कि क्रिएटर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बीच एक बराबरी, सम्मान और बेहद रोचक साझेदारी का होने वाला है।
FAQ
- OTT और YouTube के बीच नया बदलाव क्या है?
भारतीय मनोरंजन उद्योग में अब OTT प्लेटफॉर्म और YouTube क्रिएटर्स एक्सक्लूसिव कंटेंट मॉडल से हटकर साझेदारी के मॉडल पर काम कर रहे हैं। कई शो अब YouTube और प्रीमियम स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म दोनों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। - क्रिएटर इकोनॉमी क्या है ?
क्रिएटर इकोनॉमी वह मॉडल है जिसमें स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स अपनी ऑडियंस और कंटेंट के जरिए कमाई करते हैं। इससे अब क्रिएटर्स की ताकत बढ़ी है और वे OTT प्लेटफॉर्म्स के साथ बेहतर डील कर पा रहे हैं।
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