वेस्टर्न डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर पूरा, जानें राजस्थान को इसका कैसे होगा फायदा?

Saurabh Mishra | Sept 09, 2026, 20:46 IST
राजस्थान को WDFC का किस तरह का फायदा हो सकता है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले वडोदरा में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के आखिरी फेज का उद्घाटन किया था। इससे राजस्थान के 8 जिले सीधे मुंबई के JNPT समेत बड़े बंदरगाहों से जुड़ गए हैं, जिससे उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा।

राजस्थान अब देश के बड़े समुद्री बंदरगाहों से तेज रेल माल परिवहन नेटवर्क के जरिए पूरी तरह जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के आखिरी तीन हिस्सों का उद्घाटन किया था। ये तीनों हिस्से गुजरात और महाराष्ट्र में हैं। इनकी कुल लंबाई 326 किलोमीटर है। इन्हें करीब 20700 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया।



इसके साथ ही नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से उत्तर प्रदेश के दादरी तक करीब 1506 किलोमीटर लंबा पूरा WDFC चालू हो गया। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का सबसे लंबा 561 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान से गुजरता है। यही वजह है कि WDFC का पूरा होना राजस्थान के उद्योगों के लिए गेमचेंजर हो सकता।



राजस्थान के लिए क्यों खास है WDFC?

अब राजस्थान को मुंबई के JNPT के साथ गुजरात के मुंद्रा, कांडला और पीपावाव पोर्ट से तेज रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे प्रदेश से बाहर माल भेजना आसान और तेज हो सकता।राजस्थान के सीमेंट, माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट कारोबार को बड़ा फायदा मिल सकता।



इससे लंबी दूरी की माल ढुलाई में सड़क पर निर्भरता घटेगी। बड़ी खेप रेल से जाएगी और फैक्ट्री से टर्मिनल या टर्मिनल से अंतिम पड़ाव तक सड़क का इस्तेमाल होगा। यानी रेल और सड़क मिलकर माल ढुलाई का नया मॉडल तैयार करेंगे।



इसका सीधा असरसमय और लागतपर पड़ सकता। DFC पर मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा है और WDFC पर अप्रैल-मई में यह 53.6 और 52.3 किलोमीटर प्रति घंटे रही। अलग ट्रैक होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के कारण बार-बार रुकना भी कम पड़ता।



अब सवाल यह है कि राजस्थान इस तैयार नेटवर्क का कितना फायदा उठा पाता। इसके लिए खाटूवास, फुलेरा, भिवाड़ी-नीमराणा जैसे इलाकों में लॉजिस्टिक्स पार्क, कार्गो टर्मिनल और औद्योगिक केंद्र विकसित करना अहम होगा।



राजस्थान के 8 जिलों से गुजरता है कॉरिडोर

WDFC गुजरात से राजस्थान में एंट्री करता है। इसके बाद यह सिरोही, पाली, अजमेर, जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, चूरू और अलवर क्षेत्र से गुजरता है। आगे यह हरियाणा होते हुए दादरी तक पहुंचता है। न्यू पालनपुर-मदार सेक्शन का करीब 333 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान में है। यह सिरोही, पाली और अजमेर जिलों से गुजरता है।



राजस्थान में न्यू किशनगढ़, न्यू फुलेरा और न्यू मारवाड़ जैसे DFC स्टेशन भी अहम हैं। इनसे प्रदेश के औद्योगिक और माल परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिल सकती।



खाटूवास बन सकता बड़ा फ्रेट टर्मिनल हब

राजस्थान में खाटूवास मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र है। राज्य में तैयार सामान को पहले सड़क के जरिए खाटूवास जैसे टर्मिनल तक लाया जा सकता। इसके बाद कंटेनर ट्रेन से इसे बंदरगाह तक भेजा जा सकेगा। इससे सूबे के एक्सपोर्ट बिजनेस को फायदा मिल सकता। खासकर उन उद्योगों को, जिन्हें बड़ी मात्रा में माल देश के दूसरे हिस्सों या विदेश भेजना होता है।



WDFC पूरा होने का राजस्थान को क्या फायदा होगा? जानें


राजस्थान की सीमेंट इंडस्ट्री को सीधा फायदा

WDFC राजस्थान की सीमेंट इंडस्ट्री के लिए भी अहम है। न्यू पालनपुर-मदार सेक्शन में तीन सीमेंट साइडिंग को सीधे कॉरिडोर से जोड़ा जा चुका। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (DFCCIL) के मुताबिक अल्ट्राटेक सीमेंट, बनास सीमेंट और श्री सीमेंट जैसी कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि WDFC सिर्फ कंटेनर ढुलाई के लिए नहीं। इस पर खाद, अनाज, नमक, कोयला, लोहा, स्टील और सीमेंट जैसे भारी सामान की ढुलाई भी बढ़ सकती। इसका फायदा राजस्थान के खनन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मिल सकता।



फुलेरा के आसपास बन सकता बड़ा लॉजिस्टिक्स हब

भारतीय रेल केWDFC का फायदा सिर्फ मालगाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा। कॉरिडोर के आसपास नए लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र भी विकसित किए जा रहे। दिसंबर 2024 में राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग और RIICO के अधिकारियों ने मांडा और फुलेरा में WDFC के आसपास लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक केंद्रों के लिए जमीन देखी थी।



अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो यहां गोदाम, कंटेनर हैंडलिंग और माल परिवहन से जुड़ी दूसरी सुविधाएं विकसित हो सकती। इसका फायदा जयपुर और आसपास की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट यूनिट्स को मिल सकता।



भिवाड़ी-नीमराणा में भी कार्गो टर्मिनल की तैयारी

WDFC के आसपास दूसरा बड़ा विकास खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराणा क्षेत्र में हो रहा। सालारपुर औद्योगिक क्षेत्र में गति शक्ति कार्गो टर्मिनल की योजना है। 2026 में RIICO ने DFC के साथ कार्गो टर्मिनल कॉरिडोर के लिए करीब 4.17 हेक्टेयर निजी जमीन के प्रस्तावित अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है।इससे राजस्थान में खाटूवास के अलावा DFC के आसपास नए फ्रेट टर्मिनल विकसित होने की संभावना बढ़ी है।



वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान से गुजरता है।


DFC से जुड़े 5 बड़े औद्योगिक क्षेत्र

राजस्थान में WDFC को दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के साथ भी जोड़ा जा रहा।



राज्य में इसके तहत पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र चिन्हित हैं-



  • खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराणा
  • जोधपुर-पाली-मारवाड़
  • जयपुर-दौसा
  • अजमेर-किशनगढ़
  • राजसमंद-भीलवाड़ा

इनमें जोधपुर-पाली-मारवाड़ क्षेत्र करीब 6570 एकड़ और खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराणा क्षेत्र 1378 एकड़ में विकसित किया जा रहा। यानी WDFC सिर्फ रेलवे लाइन नहीं है। इसके आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, गोदाम, कार्गो टर्मिनल और औद्योगिक क्षेत्र विकसित होते हैं तो इसका असर राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता।



जयपुर को क्या फायदा होगा?

WDFC जयपुर शहर के बीच से नहीं गुजरता, लेकिन फुलेरा इसकी अहम कड़ी। दूसरी तरफ जयपुर-दौसा को DMIC के औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल किया गया है। अगर फुलेरा के आसपास प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स हब विकसित होता है तो जयपुर और आसपास की औद्योगिक और निर्यात इकाइयों को रेल से माल भेजने और कंटेनर संभालने की सुविधाएं नजदीक मिल सकती।



DFC की जरूरत क्यों पड़ी?

DFC बनाने की बड़ी वजह पुराने रेल नेटवर्क पर बढ़ता दबाव था। हावड़ा-दिल्ली और मुंबई-दिल्ली जैसे प्रमुख रूट पर यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती थीं। इन रूट के कई हिस्सों में लाइन की क्षमता का इस्तेमाल 115 से 150% तक पहुंच गया था। ऐसे में नई मालगाड़ियां चलाना और उनकी रफ्तार बढ़ाना मुश्किल हो रहा था। इसी समस्या को दूर करने के लिए ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए गए।



अब मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक मिलने से पुराने रेल नेटवर्क पर दबाव पहले के मुकाबले कम होने की उम्मीद है। इससे यात्री ट्रेनों के लिए भी क्षमता खाली हो सकती ।



WDFC की शुरुआत कब हुई थी?

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की योजना आज की नहीं है। इसकी पहली बड़ी चर्चा अप्रैल 2005 में भारत-जापान बैठक के दौरान हुई थी। इसके बाद अक्टूबर 2007 में परियोजना की शुरुआती रिपोर्ट तैयार हुई। कॉरिडोर के निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) बनाया गया।



इस परियोजना के लिए विश्व बैंक से करीब 14900 करोड़ रुपए और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से करीब 38722 करोड़ रुपए के कर्ज की सहायता मिली। अब WDFC का आखिरी हिस्सा भी चालू हो गया है। यानी JNPT से दादरी तक पूरा कॉरिडोर तैयार है।



अब तीसरे DFC की तैयारी

केंद्र सरकार अब तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की तैयारी भी कर रही। 2026 के बजट में पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक नए फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही।



राजस्थान के लिए असली चुनौती अब शुरू

JNPT तक आखिरी कड़ी जुड़ने के बाद WDFC की पूरी सीरीज तैयार हो गई। राजस्थान के खाटूवास जैसे माल परिवहन केंद्र अब गुजरात और महाराष्ट्र के बड़े बंदरगाहों से सीधे डेडिकेटेड फ्रेट नेटवर्क से जुड़े हैं। इसका फायदा राजस्थान के उद्योगों को तभी बड़े पैमाने पर मिलेगा, जब कॉरिडोर के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, कार्गो टर्मिनल, गोदाम और औद्योगिक केंद्र तेजी से विकसित हों।



FAQ

  1. वेस्टर्न डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर क्या है?
    मालगाड़ियों के लिए बनाई गई एक विशेष और आधुनिक इलेक्ट्रिक रेलवे लाइन है जो उत्तर प्रदेश के दादरी को महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से जोड़ती है।
  2. WDFC के आखिरी तीन सेक्शन कहां से कहां तक हैं?
    WDFC के आखिरी तीन सेक्शन गुजरात और महाराष्ट्र के बीच हैं। इसमें न्यू साणंद (एन)-न्यू मकरपुरा, न्यू उम्बरगांव-न्यू सफले, न्यू सफले-न्यू जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) शामिल हैं।
  3. WDFC के पूरा होने से राजस्थान को क्या फायदा होगा?
    कॉरिडोर का 1560 में से 567 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान से गुजरता है। इसके पूरा होने से राजस्थान को मुंबई के JNPT के साथ गुजरात के मुंद्रा, कांडला और पीपावाव पोर्ट से तेज रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।

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