जिद्दी कोलेस्ट्रॉल की छुट्टी? अमेरिका में नई दवा मंजूर, LDL 59% तक घटा, जानें भारत में कब आएगी
दिल की बीमारी से बचने के लिए कई लोग रोज कोलेस्ट्रॉल की दवा खाते हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों का खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम नहीं होता। ऐसे मरीजों के लिए अमेरिका से राहत की खबर आई है। दवा कंपनी मर्क (Merck) ने Lipfendra (enlicitide) नाम की नई गोली बनाई है। क्लिनिकल ट्रायल में इससे LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) में 56 से 59 फीसदी तक कम हो गया। अमेरिकी दवा नियामक US FDA ने जुलाई 2026 में इसे मंजूरी दी थी।
खास बात यह है कि इस तरह काम करने वाली दवाएं अब तक इंजेक्शन के रूप में मिलती थीं। नई दवा रोज एक गोली के रूप में ली जा सकेगी। हालांकि, भारत में यह कब मिलेगी और कितनी महंगी होगी, अभी तय नहीं।
आखिर क्या है जिद्दी कोलेस्ट्रॉल?
हमारे खून में LDL और HDL जैसे कोलेस्ट्रॉल होते हैं। LDL को खराब और HDL को अच्छा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। LDL खून के जरिए कोलेस्ट्रॉल को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाता है। शरीर को कोशिकाएं बनाने और हार्मोन तैयार करने के लिए कुछ कोलेस्ट्रॉल चाहिए लेकिन LDL ज्यादा होने पर यह नसों की दीवारों पर जमा होने लगता है।
इससे खून बहने का रास्ता संकरा हो जाता है। खून का थक्का बनने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता। जब नियमित दवा लेने के बावजूद LDL तय स्तर तक नहीं घटता, तो इसे आम बोलचाल में जिद्दी कोलेस्ट्रॉल कहा जाता।
जिद्दी कोलेस्ट्रॉल को खत्म करने वाली नई दवा Lipfendra कैसे काम करती है?
कोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए आमतौर पर स्टैटिन दवाएं दी जाती। ये लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनना कम करती हैं। Lipfendra अलग तरीके से काम करती है। यह PCSK9 नाम के प्रोटीन को रोकती है, जो लिवर की खून से LDL हटाने की क्षमता कम करता है। इस प्रोटीन का असर रुकने पर लिवर ज्यादा LDL साफ कर पाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर स्टैटिन के साथ नई गोली भी दे सकते हैं।
स्टैटिन दवाएं क्या हैं, किसे और क्यों दी जाती हैं?
स्टैटिन खराब कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाएं हैं। ये नसों में जमा फैट की परत को स्थिर रखने में भी मदद करती हैं, जिससे उसके फटने का खतरा कम होता है। जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल खानपान और एक्सरसाइज से कंट्रोल नहीं होता, उन्हें ये दवाएं दी जाती हैं। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दिल की बीमारी या डायबिटीज वाले कुछ मरीजों को भी डॉक्टर स्टैटिन देते हैं। इनमें एटोरवास्टैटिन, रोसुवास्टैटिन, सिमवास्टैटिन, प्रवास्टैटिन, लोवास्टैटिन और पिटावास्टैटिन शामिल हैं।
नई दवा के क्लिनिकल ट्रायल में क्या सामने आया?
Lipfendra के दो बड़े ट्रायल में 3207 वयस्क शामिल थे। सभी पहले से स्टैटिन की उतनी खुराक ले रहे थे, जितनी उनका शरीर सहन कर सकता था। कुछ मरीजों को नई गोली और बाकी को प्लेसिबो दिया गया। प्लेसिबो दिखने में असली दवा जैसी होती है, लेकिन उसमें इलाज करने वाला सक्रिय तत्व नहीं होता। इससे नई दवा का असर जांचा जाता है। 24 हफ्ते बाद प्लेसिबो लेने वालों के मुकाबले नई गोली लेने वालों का LDL 56 से 59 फीसदी ज्यादा घटा।
ट्रायल में ऐसे मरीज भी थे, जिन्हें परिवार से मिलने वाली बीमारी के कारण कम उम्र से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल रहता है। इसे हेटेरोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (HeFH) कहते हैं। हालांकि, अच्छे नतीजों का मतलब यह नहीं कि हर मरीज पुरानी दवा छोड़कर नई गोली शुरू कर दे। इसके लिए डॉक्टरी सलाह जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल की नई गोली कैसे खानी होगी?
अमेरिका में मंजूर दवा के निर्देशों के अनुसार रोज सुबह खाली पेट 20 मिलीग्राम की एक गोली लेनी होगी। गोली पानी, बिना दूध की कॉफी या सादी चाय के साथ निगलनी होगी। गोली तोड़नी, चबानी या पीसनी नहीं है। गोली लेने के बाद कम से कम 30 मिनट तक कुछ नहीं खाना है। इस दौरान पानी, ब्लैक कॉफी या सादी चाय के अलावा कुछ नहीं पीना है। बिना डॉक्टर की सलाह के यह दवा नहीं लेनी चाहिए।
इंजेक्शन से LDL की नई दवा की तुलना कैसे की जा सकती ?
भारत में डॉक्टर उन मरीजों को कोलेस्ट्रॉल कम करने के इंजेक्शन भी देते हैं, जिनका कोलेस्ट्रॉल सामान्य दवाओं से कंट्रोल नहीं हो पाता। इनमें Inclisiran नाम का इंजेक्शन भी शामिल है। इसका पहला इंजेक्शन लगने के तीन महीने बाद दूसरा इंजेक्शन दिया जाता है। इसके बाद हर छह महीने में एक इंजेक्शन लगवाना होता है।
Inclisiran और नई दवा Lipfendra दोनों खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम करती हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका अलग है। Inclisiran लिवर में PCSK9 नाम के प्रोटीन को कम बनने देता है, जबकि Lipfendra इस प्रोटीन को अपना असर दिखाने से रोकती है।
ट्रायल में Lipfendra से खराब कोलेस्ट्रॉल में 56 से 59 फीसदी तक अतिरिक्त कमी देखी गई। वहीं, Inclisiran के ट्रायल में करीब 50 फीसदी कमी दर्ज की गई। हालांकि, दोनों दवाओं को एक ही ट्रायल में आमने-सामने नहीं परखा गया है। इसलिए अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इनमें से कौन-सी दवा ज्यादा असरदार है।
किन मरीजों को नई दवा से फायदा मिल सकता है?
मुंबई के सर एचएन रिलायंस अस्पताल के डॉक्टर अजीत मेनन के मुताबिक, जिन मरीजों का LDL स्टैटिन से भी कम नहीं होता, उनके लिए किफायती गोली फायदेमंद हो सकती। इनमें हार्ट अटैक झेल चुके, एंजियोप्लास्टी या बायपास करा चुके और जन्मजात ज्यादा कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज शामिल हैं।
नानावटी मैक्स अस्पताल के डॉक्टर समीर पगाड के मुताबिक, नई दवा देने से पहले डॉक्टर देखते हैं कि मरीज पुरानी दवा नियमित और सही खुराक में ले रहा है या नहीं। जरूरत पड़ने पर Ezetimibe जैसी दूसरी दवा भी दी जा सकती, जो आंतों में कोलेस्ट्रॉल का अवशोषण कम करती।
भारत के लिए जिद्दी कोलेस्ट्रॉल की नई दवा क्यों जरूरी है?
भारत में भी बड़ी संख्या में लोग बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की परेशानी से जूझ रहे। ICMR-INDIAB के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में करीब 18.6 करोड़ भारतीयों का खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) सामान्य से ज्यादा था। जुलाई में आई एक रिपोर्ट में भी चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए। इसके मुताबिक, 87 फीसदी वयस्कों के खून में कोलेस्ट्रॉल या फैट से जुड़ी कम से कम एक गड़बड़ी मिली। वहीं, 66.8 फीसदी लोगों का अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) जरूरत से कम था।
खास बात यह है कि यह परेशानी सिर्फ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या मोटापे वाले लोगों तक सीमित नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों समस्याओं से दूर रहने वाले करीब 40 फीसदी लोगों की कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट भी सामान्य नहीं थी।
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ाता है। INTERHEART स्टडी के मुताबिक, दक्षिण एशियाई देशों में लोगों को पहला हार्ट अटैक औसतन 53 साल की उम्र में आया, जबकि दूसरे देशों में यह उम्र करीब 59 साल थी। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल को समय रहते कंट्रोल करना बेहद जरूरी है।
नई दवा के साइड इफेक्ट कितने हैं?
नई दवा Lipfendra के बड़े ट्रायल में इसके साइड इफेक्ट भी जांचे गए। इसमें कुछ मरीजों को असली दवा और कुछ को बिना दवा वाले असर की गोली (प्लेसिबो) दी गई। दोनों समूहों में साइड इफेक्ट की शिकायतें लगभग बराबर रहीं। हालांकि, जिन मरीजों को जन्म से ही ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या थी, उनमें दस्त और चक्कर आने की शिकायत थोड़ी ज्यादा देखी गई।
अमेरिका में नई दवा की कीमत कितनी, भारत में कितना खर्च होगा?
Lipfendra की कीमत भी मरीजों के लिए बड़ी चिंता हो सकती। अमेरिका में मर्क कंपनी ने इसकी एक दिन की दवा की कीमत 10.50 डॉलर रखी है। यानी 30 दिन की दवा पर 315 डॉलर खर्च होंगे। अगर एक डॉलर की कीमत 95 रुपए मानें, तो भारत में इस दवा का एक महीने का खर्च करीब 30 हजार रुपए और सालभर का खर्च लगभग 3.64 लाख रुपए होगा। हालांकि, यह अमेरिका में तय कीमत का भारतीय रुपए में हिसाब है। भारत में दवा की कीमत अभी तय नहीं हुई।
वहीं, भारत में कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाला Inclisiran इंजेक्शन Sybrava नाम से मिलता है। इसके एक इंजेक्शन की कीमत करीब 93,990 रुपए है। पहले साल तीन इंजेक्शन लगते हैं, जिन पर लगभग 2.82 लाख रुपए खर्च होते हैं। इसके बाद हर साल दो इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं, जिनका खर्च करीब 1.88 लाख रुपए आता है। हालांकि, छूट और इंजेक्शन लगवाने के खर्च के हिसाब से यह रकम कम या ज्यादा हो सकती है।
डॉक्टर समीर पगाड का कहना है कि अगर Lipfendra की कीमत इतनी ही ज्यादा रही, तो आम मरीजों के लिए इसे खरीदना मुश्किल होगा। ऐसे में इस बात की उम्मीद है कि भारत में इस दवा की कीमत अमेरिका के मुकाबले कम रखी जा सकती।
भारत में जिद्दी कोलेस्ट्रॉल की नई दवा कब तक आएगी?
कीमत के साथ बड़ा सवाल यह भी है कि Lipfendra भारत में कब मिलेगी। फिलहाल इसकी कोई पक्की तारीख सामने नहीं आई। अमेरिका में दवा को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन भारत में इसे बेचने के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी। यह मंजूरी भारत में दवाओं की जांच और उनकी बिक्री की अनुमति देने वाली संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन यानी CDSCO देती है।
CDSCO के रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 को MSD Pharmaceuticals को इस दवा के भारत में क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति मिली थी। यानी कंपनी भारत में दवा की जांच कर सकती है, लेकिन अभी इसे बेचने की मंजूरी नहीं मिली है।
डॉ. चरण लांजेवार के मुताबिक, अगर किसी दवा के विदेश में हुए ट्रायल के नतीजे अच्छे हैं, तो कुछ मामलों में भारत में दोबारा ट्रायल करने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, यह छूट हर दवा को नहीं मिलती। इस पर फैसला अलग-अलग मामलों को देखकर लिया जाता है। इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि Lipfendra भारतीय मरीजों को कब तक मिलने लगेगी।
US FDA क्या है और मरीजों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
US FDA यानी अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन। यह दवाओं की सुरक्षा, असर और गुणवत्ता जांचकर अमेरिका में मंजूरी देता है। कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना लक्षण के बढ़ता है। इसका पता लिपिड प्रोफाइल जांच से चलता है। दवा के साथ तंबाकू छोड़ना, नियमित एक्सरसाइज, नमक कम करना और फल-सब्जियां खाना भी जरूरी है।
नई गोली उन मरीजों के लिए उम्मीद है, जिनका LDL मौजूदा इलाज से कंट्रोल नहीं हो रहा। हालांकि, इसके लंबे समय के फायदे और सुरक्षा पर नजर रखना जरूरी है। भारत में इसकी उपलब्धता मंजूरी और कंपनी के लॉन्च पर निर्भर करेगी।
FAQs
- Lipfendra (enlicitide) दवा क्या है और यह किस प्रकार काम करती है?
Lipfendra (enlicitide) एक नई दवा है जो LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करती है। यह PCSK9 प्रोटीन को रोकती है, जिससे लिवर की LDL को साफ करने की क्षमता बढ़ जाती है। - भारत में Lipfendra दवा कब उपलब्ध होगी और इसकी कीमत क्या होगी?
भारत में Lipfendra की उपलब्धता अभी तय नहीं है। अमेरिका में इसकी कीमत रोज 10.50 डॉलर है, जो भारतीय रुपये में करीब 29,925 रुपये प्रति महीने होगी, लेकिन भारतीय बाजार में इसकी लागत अभी निश्चित नहीं है। - किस मरीजों को Lipfendra दवा से लाभ हो सकता है?
Lipfendra उन मरीजों के लिए लाभकारी हो सकती है जिनका LDL स्टैटिन दवाओं के माध्यम से कम नहीं होता, जैसे हार्ट अटैक झेल चुके या जन्मजात हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज।