क्रेन, कतार और करुणानिधि की विरासत, क्या तमिलनाडु में 'उगता सूरज' फिर चमकेगा?
एंडिपट्टी (तमिलनाडु) एक विशाल क्रेन संकरी गली में रास्ता बनाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद साफ है-एक भारी-भरकम फूलों का हार उस खास शख्सियत के गले में डालना, जिसका पूरा तमिलनाडु इंतजार कर रहा है। वह शख्स हैं उदयनिधि स्टालिन।
सहयोगी कहते हैं कि यह उदयनिधि की अब तक का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। भीड़ का प्रबंधन किसी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट जैसा है। कोई अफरा-तफरी नहीं, कोई शोर-शराबा नहीं। ट्रकों में भरकर भीड़ नहीं लाई गई है। लोग छोटे-छोटे समूहों में तिपहिया वाहनों से आए हैं, छांव में बैठे हैं और शांति से बोतल बंद पानी पी रहे हैं। यह द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का नया चेहरा है-अनुशासित, शांत और तकनीक से लैस।
जहां इतिहास बदलता है
चुनाव अभियान की शुरुआत एंडिपट्टी से करना कोई इत्तेफाक नहीं है। यह कस्बा एआईएडीएमके (AIADMK) के दो सबसे बड़े दिग्गजों एमजी रामचंद्रन और जे. जयललिता का गढ़ रहा है। इन दोनों ने मिलकर उदयनिधि के दादा एम. करुणानिधि को 24 साल तक सत्ता से बाहर रखा था।
आज जब डीएमके लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, तो एंडिपट्टी पर कब्जा करना केवल जीत नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक बदला है। कार्यकर्ता कहते हैं, अगर हम एंडिपट्टी जीत गए, तो हम अजेय हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों का शोर अपने चरम पर आने के बाद आज शाम थम गया। पूरे प्रदेश में 23 अप्रैल को मतदान है।
उदयनिधि: एक साथ तीन भूमिकाएं
जब उदयनिधि मंच पर चढ़ते हैं, तो उनका स्वागत तीन स्तरों पर होता है। डीएमके के युवा विंग के सचिव के रूप में, राज्य के उपमुख्यमंत्री के रूप में और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे के रूप में।
लेकिन जो बात अनकही है, वह यह कि वे सुप्रीमों इन वेटिंग हैं। 49 साल के उदयनिधि अपने पिता की तुलना में बहुत कैजुअल कपड़ों में हैं। उनकी भाषा किताबी नहीं, बल्कि बातचीत जैसी है। द्रविड़ राजनीति की भारी-भरकम शब्दावली की जगह उन्होंने एक सहज संवाद को चुना है।
नया डिजिटल, पुराना एनालॉग
इस चुनाव में डीएमके का प्रचार बदल गया है। इसे स्टालिन 3.0 कहा जा रहा है। अब विशाल होर्डिंग्स की जगह मोबाइल स्क्रीन के आकार की इमेज का इस्तेमाल हो रहा है। टी-शर्ट की जेबों पर नेताओं के छोटे चेहरे छपे हैं।
लाउडस्पीकर पर घोषणा होती है-नारे मत लगाओ, झंडे मत लहराओ। अगले चेहरे को बस देखने और सुनने दो। आधुनिकता के बीच पुरानी यादें भी जिंदा हैं। 1957 से चला आ रहा चुनाव चिह्न 'उगता सूरज' का प्रतीक आज भी उतना ही प्रभावी है। नागोर हनीफा का कालजयी गाना-जो उगते सूरज का जश्न मनाता है, हर नुक्कड़ पर गूंज रहा है।
दिल्ली बनाम तमिलनाडु बना मुख्य चुनावी मुद्दा
भाषणों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ दिल्ली की राजनीति भी हावी है। उदयनिधि हाथ में एक ए3 साइज का प्रिंटआउट लेकर खड़े होते हैं। यह एक तस्वीर है।
तस्वीर में एआईएडीएमके के नेता दिल्ली के बड़े नेताओं के सामने नतमस्तक हैं। उदयनिधि दहाड़ते हैं कि बीजेपी संसद में ऐसे बिल ला रही है जो तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को कम कर देंगे। आप एआईएडीएमके को वोट कैसे दे सकते हैं, जो मोदी के सामने दंडवत हैं? यह सीधा प्रहार है। वे क्षेत्रीय गौरव (Tamil Pride) को सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं।
वेदासंदुर: जीत का अंतिम पड़ाव
दिन का अंत डिंडीगुल जिले के वेदासंदुर में होगा। दशकों से यह माना जाता रहा है कि वेदासंदुर का चुनाव परिणाम पूरे तमिलनाडु के मूड को बताता है। डीएमके की रणनीति साफ है। इतिहास के पुराने किलों (एंडिपट्टी) को ढहाओ और भविष्य के संकेतों (वेदासंदुर) पर कब्जा करो। एक ऐसे नेता को पेश करो, जो आधुनिक भी है और अपनी जड़ों से जुड़ा भी।
क्या उगता सूरज फिर चमकेगा?
चुनावी बिसात बिछ चुकी है। करुणानिधि का पोता आज उस विरासत को संभाल रहा है जिसने तमिलनाडु की राजनीति को दशकों तक दिशा दी। यह चुनाव केवल मुख्यमंत्री चुनने का नहीं है, बल्कि यह तय करने का है कि क्या द्रविड़ राजनीति का अगला अध्याय उदयनिधि के नाम होगा।
गली में खड़ी वह क्रेन और विशाल हार शायद इसी राजतिलक की तैयारी है। तमिलनाडु के लोग शांत हैं, लेकिन उनका फैसला 23 अप्रैल को ईवीएम में कैद हो जाएगा।
ये भी पढे़:-
हाईवे की हवा खराब: टोल से भर रहा खजाना, लेकिन भ्रष्टाचार की दरारें छीन रही हैं रफ्तार
कनाडाई सपना: बिखरती उम्मीदें-खाली जेबें, आखिर पंजाब के युवाओं का भविष्य क्या
भूमाफिया ने बसा दी बस्तियां, अफसर देखते रहे, जानिए चंबल घड़ियाल अभयारण्य का पूरा हाल
जब 'कद' नहीं, काबिलियत बनती है मिसाल, आज हैं लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल