तृणमूल कांग्रेस में घमासान, बदल सकते हैं संसद के समीकरण

Jinesh Jain | Jun 12, 2026, 19:09 IST
तृणमूल कांग्रेस में सांसदों की टूटन संसद के समीकरणों में बड़ा फेरबदल
तृणमूल कांग्रेस में सांसदों की टूटन संसद के समीकरणों में बड़ा फेरबदल ला सकती है। इसका सीधा प्रभाव मोदी सरकार के एजेंडे पर आएगा। आइए पूरे सियासी खेल को विस्तार से जानते हैं:

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मचे राजनीतिक घमासान से संसद का गणित पूरी तरह बदल सकता है। इसका नरेंद्र मोदी सरकार के विधायी एजेंडे पर गहरा असर पड़ सकता है। इसमें अगले मानसून सत्र के दौरान विवादित परिसीमन विधेयक (Delimitation Legislation) को दोबारा पेश करने की योजना भी शामिल है।



बागी नेताओं का दावा है कि उन्हें टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 का समर्थन हासिल है। इसके अलावा इस साल की शुरुआत में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। मौजूदा संकट के बीच टीएमसी के तीन और सदस्यों ने उच्च सदन (राज्यसभा) से इस्तीफा दे दिया है।



विपक्ष के संसदीय ढांचे में 2022 के शिवसेना विभाजन और 2023 के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बिखराव के बाद का यह सबसे बड़ा फेरबदल है।



ये घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं, जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके (DMK) का गठबंधन पहले ही टूट चुका है। क्योंकि, कांग्रेस ने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) से हाथ मिला लिया है। इस वजह से विपक्ष पहले से ही कमजोर स्थिति में है।



लोकसभा में 300 के पार जा सकता है एनडीए (NDA)

543 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए के पास फिलहाल करीब 293 सांसदों का समर्थन है। टीएमसी के बागी नेता अपने साथ 20 सांसदों के होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए हैं। अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं तो सरकार का प्रभावी समर्थन आधार 293 से बढ़कर 313 सांसदों का हो जाएगा।



​इस बदलाव की अहमियत को अप्रैल में हुए परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन के मतदान से समझा जा सकता है। उस समय एनडीए के सभी सहयोगियों और कई गैर-गठबंधन दलों के समर्थन के बावजूद सरकार केवल 298 वोट ही जुटा सकी थी। वह विधेयक पारित कराने में विफल रही थी।


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अब टीएमसी के 20 सांसदों के जुड़ने से सरकार का समर्थन आधार सैद्धांतिक रूप से 298 से बढ़कर 318 वोटों तक पहुंच जाएगा। इसके कारण पिछले प्रयास की तुलना में उसकी स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।



​टीएमसी संकट की टाइमिंग भी सरकार के लिए काफी अनुकूल है। विपक्ष का संसदीय ढांचा पहले ही दबाव में था। तमिलनाडु में कांग्रेस के टीवीके (TVK) के साथ जाने से कांग्रेस-डीएमके गठबंधन टूट चुका है।



तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) टूटने के कगार पर


कैसे बदल रहा है संसद का गणित?

​लोकसभा में बदलाव: एनडीए के पास फिलहाल 293 सांसद हैं। 20 बागी टीएमसी सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या 313 हो सकती है। इससे एनडीए पहली बार 300 का आंकड़ा पार करेगा।


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2022-23 के बाद सबसे बड़ा फेरबदल: विपक्ष में यह बिखराव शिवसेना और एनसीपी के विभाजन जैसा ही बड़ा है।



​राज्यसभा में हलचल: आप (AAP) के 7 राज्यसभा सांसद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। टीएमसी के 3 सांसदों के इस्तीफे से उच्च सदन में पार्टी की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है।



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गठबंधन दरका: तमिलनाडु चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके का मजबूत गठबंधन टूट चुका है।


​इस टूट ने इंडिया (INDIA) ब्लॉक के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक को कमजोर कर दिया है।



इसके बाद, कुछ खास विधायी मुद्दों पर डीएमके और सरकार के बीच मुद्दों पर आधारित सहयोग (Issue-based cooperation) की संभावनाएं खुल गई हैं। डीएमके के पास 22 लोकसभा सांसद हैं।



​यदि डीएमके परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करती है तो सरकार का संभावित समर्थन आधार 313 से बढ़कर 335 सांसदों का हो जाएगा। यह संख्या मौजूदा लोकसभा में


दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ 25 सीटें दूर होगी।



​आंकड़ों का खेल

पूरी 543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है। हालांकि, वर्तमान में तीन लोकसभा सीटें पश्चिम बंगाल की बशीरहाट, मेघालय की शिलांग और असम की नगांव खाली हैं। इसके चलते सदन की प्रभावी संख्या घटकर 540 रह गई है, जिससे दो-तिहाई बहुमत का प्रभावी आंकड़ा 360 पर आ जाता है।



​भले ही 335 का आंकड़ा संविधान संशोधन पारित कराने की पूरी गारंटी नहीं देता, लेकिन यह सरकार को जरूरी जादुई आंकड़े के बेहद करीब ले आएगा। इससे मतदान के दिन भाजपा नेतृत्व के लिए फ्लोर मैनेजमेंट (सदन के भीतर रणनीतिक प्रबंधन) करना काफी आसान हो जाएगा।


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व्यावहारिक रूप से सरकार को अब किसी संविधान संशोधन के लिए नए सिरे से पूरा गठबंधन बनाने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय उसे विपक्ष में सेंध लगाकर या कुछ सांसदों को अनुपस्थित रखकर/वोटिंग से दूर (Abstain) रखकर केवल कुछ अतिरिक्त वोटों का ही इंतजाम करना होगा।



तृणमूल कांग्रेस में सांसदों की टूटन संसद के समीकरणों में बड़ा फेरबदल ला सकती है


​राज्यसभा पर तत्काल प्रभाव

​उच्च सदन (राज्यसभा) में आंकड़े चरणों में बदल रहे हैं। आम आदमी पार्टी के सात पूर्व राज्यसभा सांसदों के विलय के बाद भाजपा की अपनी ताकत बढ़कर 113 हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप एनडीए का कुल आंकड़ा लगभग 148 सदस्यों तक पहुंच गया था।


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अब टीएमसी संकट ने एक और अवसर दे दिया है। टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से पार्टी की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है। ये तीन सीटें अब खाली हो गई हैं।



अगर आगामी उपचुनावों में एनडीए समर्थित उम्मीदवार इन तीनों सीटों पर जीत दर्ज करते हैं तो राज्यसभा में एनडीए की संख्या लगभग 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 163 सदस्यों का है।



​पश्चिम बंगाल और भविष्य का खेल

​सबसे बड़ा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में देखने को मिल रहा है। बागी नेताओं का दावा है कि उन्हें टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 का समर्थन प्राप्त है। इसके बाद ममता बनर्जी के पाले में केवल 22 विधायक रह जाते हैं।



​इन आंकड़ों का भविष्य के राज्यसभा चुनावों पर सीधा असर पड़ेगा। राज्यसभा की चुनाव प्रणाली के तहत किसी पार्टी की सांसद चुनने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि राज्य विधानसभा में उसके पास कितने विधायक हैं।



महज 22 विधायकों के साथ ममता बनर्जी का धड़ा भविष्य के चुनाव चक्रों में स्वतंत्र रूप से राज्यसभा सदस्य चुनने के लिए संघर्ष करता नजर आएगा।


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टीएमसी के मौजूदा राज्यसभा सांसद भले ही तुरंत न हटें, लेकिन उनके कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह संख्या लगातार कम हो सकती है। पश्चिम बंगाल में राज्यसभा सीटों के अगले चुनाव 2029, 2030 और 2032 में होने हैं।



​यदि मौजूदा राजनीतिक समीकरण बरकरार रहता है और बागी गुट एनडीए का समर्थन करना जारी रखता है तो भविष्य में इनमें से कई सीटें विपक्ष के हाथ से निकलकर सरकार के पाले में जा सकती हैं।



FAQ

  1. क्या तृणमूल कांग्रेस में टूटन का संसद की सीट गणित पर असर पड़ सकता है?
    543 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए के पास अभी 293 सांसदों का समर्थन है। टीएमसी के बागी नेता अपने साथ 20 सांसदों के होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को समर्थन देने की बात कही है। अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं तो सरकार का समर्थन 293 से बढ़कर 313 सांसदों का हो सकता है।
  2. तृणमूल कांग्रेस के घमासान का मोदी सरकार को क्या फायदा मिलेगा?
    इसका केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विधायी एजेंडे पर गहरा असर पड़ सकता है। इसमें अगले मानसून सत्र के दौरान विवादित परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने की योजना भी शामिल है।
  3. तृणमूल कांग्रेस में टूटन का विपक्ष पर कितना असर पड़ेगा?
    विपक्ष की संसदीय स्ट्रेंथ में 2022 के शिवसेना विभाजन और 2023 के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बिखराव के बाद का यह सबसे बड़ा फेरबदल है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं, जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके (DMK) का गठबंधन पहले ही टूट चुका है। ऐसे में विपक्ष बहुत कमजोर स्थिति में आ जाएगा।

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