यूपीएससी टॉपर्स का रिपोर्ट कार्ड, क्या रैंक-1 होना शानदार करियर की गारंटी ?
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में प्रथम स्थान प्राप्त करना मशहूर होने की गारंटी तो है, लेकिन यह सफलता का अंतिम पड़ाव नहीं है। 20 टॉपर्स के करियर ग्राफ को देखें तो उनमें काफी विविधता नजर आती है। कुछ अधिकारियों ने प्रशासनिक सेवा में नए मानक स्थापित किए। वहीं कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने लो-प्रोफाइल रहकर अपना काम करना पसंद किया।
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के पूर्व निदेशक संजीव चोपड़ा का कहना है कि टॉपर्स में कुछ भी असाधारण नहीं होता। उनके अनुसार कुछ बहुत अच्छा करते हैं और कुछ बहुत खराब। परीक्षा के अंकों और फील्ड की परफॉर्मेंस के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। मैंने ऐसे टॉपर्स भी देखे हैं जो जेल तक गए।
'द प्रिंट' ने पिछले दो दशक के 20 यूपीएससी टॉपर्स के करियर का गहराई से विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण से एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, परीक्षा में टॉप करना और सार्वजनिक सेवा में प्रभावी होना, दो अलग-अलग बातें हैं। इस विश्लेषण में हाल ही में टॉपर आए आदित्य श्रीवास्तव, शक्ति दुबे और अनुज अग्निहोत्री को शामिल नहीं किया, क्योंकि वे अभी ट्रेनिंग पीरियड में हैं।
सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर का दौर
पिछले पांच साल में यूपीएससी टॉपर्स का क्रेज और भी बढ़ गया है। कुछ अधिकारी आज बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बन चुके हैं। हालांकि, इसके साथ विवाद भी जुड़े हैं। एक तरफ जहां युवाओं के लिए ये प्रेरणा हैं, वहीं दूसरी ओर इनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठते हैं।
कुछ महीने पहले एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक मशहूर टॉपर गणतंत्र दिवस परेड पर गलत दिशा में सलामी दे रही थीं। एक अन्य मामला ऐसा भी रहा, जहां एक अधिकारी ने इस्तीफा दिया, राजनीति में कदम रखा, गिरफ्तार हुईं और फिर वापस सरकारी सेवा में लौट आईं।
जमीनी हकीकत बनाम परीक्षा की रैंक
टॉपर्स का मानना है कि जब वे फील्ड में उतरते हैं, तो उनकी रैंक बेमानी हो जाती है। शाह फैसल के अनुसार, रैंक तो बस एक स्मृति बन जाती है। मायने यह रखता है कि आपने कितने लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
2006 की टॉपर मोना प्रुथी का मानना है कि आज की दुनिया बहुत बदल चुकी है। लोग अब तत्काल समाधान चाहते हैं। उन्होंने एक लोक सेवक के लिए चार महत्वपूर्ण शब्दों नियम, नीयत, नियति और नित्य का जिक्र किया।
2013 के टॉपर राजस्थान कैडर के गौरव अग्रवाल कहते हैं कि असली चुनौती जमीनी समस्याओं को हल करना है। असली सवाल यह है कि क्या बच्चे वास्तव में कुछ सीख रहे हैं? क्या व्यवस्था में सुधार हो रहा है? टॉप करना सिर्फ एक पहचान है, समाधान नहीं।
हर दिन टॉप करना होगा
नंदिनी केआर (2016) ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, परीक्षा में आप एक बार टॉप कर सकते हैं। लेकिन फील्ड में आपको हर दिन टॉप करना पड़ता है। उनके अनुसार, जनता तक सेवा पहुंचाने के लिए केवल योग्यता काफी नहीं है। इसके लिए करुणा और सकारात्मक रवैये की आवश्यकता होती है।
इसी तरह अनुदीप दुरिशेट्टी (2017) स्वीकार करते हैं कि परीक्षा पास करते समय उन्हें सेवा का वास्तविक अर्थ नहीं पता था। सालों के अनुभव के बाद उन्हें समझ आया कि असली संतुष्टि लोगों की समस्याओं को सुलझाने में है।
पर्दे के पीछे की सेवा
हाल के वर्षों के टॉपर्स जैसे कनिष्क कटारिया और शुभम कुमार का मानना है कि असली काम अक्सर पर्दे के पीछे ही होता है। राजस्थान कैडर के कनिष्क कटारिया कहते हैं, यह एक बार होने वाली घटना है। बाद में कोई नहीं पूछता कि आपकी रैंक क्या थी।
टॉपर शुभम कुमार का मानना है कि सार्थक सेवा अक्सर शांत और अदृश्य होती है। पहचान से ज्यादा काम जरूरी है। इसी तरह प्रदीप सिंह मलिक के अनुसार ग्रामीण इलाकों में बुनियादी चीजें मुहैया कराना भी बड़ा असर डालता है।
क्या टॉपर होना काफी है?
विश्लेषण यह साफ करता है कि यूपीएससी की रैंक केवल एक प्रवेश द्वार है। इसके बाद का सफर कांटों भरा और चुनौतीपूर्ण होता है। कुछ अधिकारी 17 साल की सेवा के बाद भी जिला मजिस्ट्रेट (DM) नहीं बन पाए। वहीं कुछ ने इंजीनियरिंग और डॉक्टरी जैसे करियर छोड़कर इस सेवा को चुना ताकि वे बदलाव ला सकें।
इरा सिंघल के शब्दों में, सफलता इस बात से मापी जाती है कि आपने हाशिए पर मौजूद लोगों के लिए कितनी बाधाएं दूर कीं। यूपीएससी का टॉपर होना एक व्यक्तिगत उपलब्धि हो सकती है, लेकिन एक आदर्श लोक सेवक होना निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। जनता के लिए आपकी रैंक नहीं, बल्कि आपकी संवेदनशीलता और कार्यकुशलता मायने रखती है।
आईएएस रूपा मिश्रा
रूपा मिश्रा से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईएएस एस नागराजन
नागराजन से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।।
आईएएस मोना प्रुथी
2006 के बाद से बहुत बदलाव आया है। सेवाओं में भी उसी के अनुरूप परिवर्तन हुए हैं। आज की लोगों की अपेक्षाएं तत्काल उत्तर और तत्काल समाधान की मांग करती हैं। मेरा मानना है कि एक लोक सेवक इस कर्मभूमि में कैसे कार्य करता है, यह नियम, नीयत, नियति और नित्य पर निर्भर करता है -मोना प्रुथी
आईएएस मुत्यालाराजू रेवु
मुत्यालाराजू रेवु से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईएएस अदापा कार्तिक
अदापा कार्तिक से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईएएस शुभ्रा सक्सेना
शुभ्रा सक्सेना से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईएएस शाह फैसल
देश सेवा करने का एक असाधारण अवसर मिलता है। यानी यह सेवा राष्ट्र की सार्थक और स्थायी रूप से सेवा करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। अंततः यूपीएससी में मिली रैंक तो बस एक स्मृति बनकर रह जाती है। मायने रखता है काम की गुणवत्ता और उन लोगों के जीवन को जिन्हें हम प्रभावित कर पाते हैं - आईएएस शाह फैसल
आईएएस एस दिव्यादर्शनी
आईएएस एस दिव्यादर्शनी से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईएएस शेना अग्रवाल
लोक सेवा आपको व्यापक अनुभव और सकारात्मक प्रभाव डालने का अवसर देती है। सरकारी कर्मचारी होने के नाते लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना सबसे बड़ा सौभाग्य है -शेना अग्रवाल
आईएएस हरिथा वी कुमार
हरिथा वी कुमार ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
आईएएस गौरव अग्रवाल
परीक्षा में टॉप करने से भले ही पहचान मिले, लेकिन जनसेवा का मतलब असल समस्याओं को हल करना है। जैसे कि क्या बच्चे वास्तव में सीख रहे हैं और क्या व्यवस्था में सुधार हो रहा है - गौरव अग्रवाल
आईएएस इरा सिंघल
परीक्षा में टॉप करना अवसरों के द्वार खोल सकता है, लेकिन सार्वजनिक सेवा में वास्तविक सफलता इस बात से मापी जाती है कि आप दूसरों के लिए, विशेषकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से हाशिए पर हैं, कितनी बाधाओं को दूर करते हैं -इरा सिंघल
आईएएस टीना डाबी
टीना डाबी से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईएएस नंदिनी केआर
आप परीक्षा में एक बार टॉप कर सकते हैं, लेकिन फील्ड में आपको लगातार टॉप करते रहना होगा। इस क्षेत्र में काम करना और जनता तक अपनी सेवाएं पहुंचाना समर्पण की मांग करता है। इसके लिए सिर्फ आपकी योग्यता ही काफी नहीं है। इसके लिए करुणा, काम के प्रति सकारात्मक रवैया और कई अन्य चीजों की भी आवश्यकता होती है - नंदिनी केआर
आईएएस अनुदीप डुरीशेट्टी
जब मैंने परीक्षा में टॉप किया, तब मुझे सार्वजनिक सेवा का वास्तविक अर्थ बहुत कम ही पता था। लेकिन कई वर्षों के अनुभव के बाद, मुझे एहसास हुआ कि परीक्षा पास करना एक बात है-असली चुनौती और असली संतुष्टि तो लोगों की समस्याओं को हल करने और उनके जीवन में बदलाव लाने में निहित है -अनुदीप दुरिशेट्टी
आईएएस कनिष्क कटारिया
परीक्षा में टॉप करना महज़ एक घटना है। यह एक बार होती है। इसके बाद किसी को याद नहीं रहता कि आपने टॉप किया या आप सबसे आखिर में चुने गए। मुख्य बात है सेवा में प्रवेश करना और अपने स्तर पर आप क्या छोटे-छोटे सुधार कर सकते हैं - कनिष्क कटारिया
आईएएस प्रदीप सिंह
परीक्षा में टॉप करने से आपको पहचान मिलती है। जब आप सेवा में शामिल होते हैं, तब आपको जमीनी हकीकत का पता चलता है। अगर हम कोई छोटी सी चीज भी मुहैया कराते हैं तो उसका बड़ा असर होता है, क्योंकि लोगों के पास बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं हैं -प्रदीप सिंह मलिक
आईएएस शुभम कुमार
लोक सेवा में सरकारी प्रणालियों और लोगों के साथ निरंतर संपर्क शामिल होता है। अधिकांश वास्तविक कार्य पर्दे के पीछे ही होता है। परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने से पहचान तो मिलती है, लेकिन सार्थक सेवा अक्सर शांत और अदृश्य ही रहती है
-शुभम कुमार
आईएएस श्रुति शर्मा
श्रुति शर्मा ने कहा कि अभी उनकी सेवा की शुरुआत ही हुई है, इसलिए वे अपने करियर पर टिप्पणी नहीं कर सकतीं।
आईएएस इशिता किशोर
इशिता किशोर से करियर की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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