यूपी में चलेगी बाबागिरी, एंटी इनकम्बेंसी ने बढ़ाई 100 से ज्यादा विधायकों को टिकट कटने की टेंशन

Arun Tiwari | Oct 05, 2026, 15:53 IST
​यूपी में B​JP का टिकट प्लान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने मौजूदा विधायकों को लेकर व्यापक आंतरिक आकलन शुरू कर दिया है। पार्टी के अंदरूनी आकलन के मुताबिक प्रदेश की कम से कम 100 विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी और एंटी-इनकम्बेंसी की रिपोर्ट सामने आई है।

ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने प्रदेश की उन 255 विधानसभा सीटों पर जमीनी स्तर का आकलन कराया है, जहां वर्तमान में पार्टी के विधायक हैं। इस सर्वे और फीडबैक में विधायकों की क्षेत्र में पकड़, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता, संगठन के साथ उनके संबंध और आगामी चुनाव में उनकी संभावित जीत की स्थिति को प्रमुख आधार बनाया गया है।



पार्टी के वरिष्ठ नेता के मुताबिक करीब 100 विधायक फिलहाल पार्टी के रडार पर हैं। इन विधायकों के बारे में स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के बीच भरोसे की कमी और नाराजगी की रिपोर्ट मिली है। इसके अलावा स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों और विधायकों के बीच मतभेद को भी आकलन में शामिल किया जा रहा है।



जीत की संभावना टिकट का सबसे बड़ा आधार

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी इस बार टिकट वितरण में विनिंग एबिलिटी यानी जीतने की क्षमता को सबसे ज्यादा महत्व देने की तैयारी में है। विधायक कितनी बार चुनाव जीत चुका है, उसका राजनीतिक कद क्या है या वह कितने समय से विधानसभा में है, इन बातों के मुकाबले क्षेत्र में उसकी मौजूदा लोकप्रियता और चुनाव जीतने की संभावना को प्राथमिकता दी जा सकती है।



पार्टी के अंदर इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि लगातार दो कार्यकाल की सरकार के बाद यदि किसी विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष है, तो इसका असर पूरे चुनाव पर पड़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के आकलन में सरकार के खिलाफ नाराजगी से ज्यादा किसी व्यक्तिगत विधायक के खिलाफ स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी चुनावी नुकसान का कारण बन सकती है।




RSS से भी लिया जा रहा फीडबैक :

बीजेपी के मौजूदा विधायकों की उम्मीदवारी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी फीडबैक लिए जाने की बात सामने आई है। पार्टी संगठन की ओर से विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह फीडबैक केवल विधायक की व्यक्तिगत लोकप्रियता तक सीमित नहीं है। इसमें संगठन के साथ उसका तालमेल, क्षेत्र में उपलब्धता, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संबंध और मतदाताओं के बीच उसकी स्थिति जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है।



यूपी विधानसभा चुनाव से पहले BJP का प्लान

2024 लोकसभा चुनाव के अनुभव से सबक

बीजेपी के इस आंतरिक मंथन को 2024 के लोकसभा चुनाव के अनुभव से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2019 के मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटों की संख्या में बड़ी गिरावट आई थी। पार्टी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गई थीं। पार्टी के अंदर इस प्रदर्शन के विश्लेषण में विपक्ष के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण के साथ-साथ कई सीटों पर स्थानीय स्तर की नाराजगी को भी एक कारक माना गया।



2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने 49 मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट दिया था, लेकिन इनमें से 27 चुनाव हार गए। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब विधानसभा चुनाव में इसी तरह के जोखिम को दोहराना नहीं चाहती। यही वजह है कि मौजूदा विधायक होने को टिकट का स्वत: दावा नहीं माना जा रहा है।




दो-तीन बार जीत चुके विधायक भी दायरे में

पार्टी के भीतर यह संदेश दिए जाने की बात कही जा रही है कि सिटिंग एमएलए होने के आधार पर टिकट की गारंटी नहीं होगी। यदि किसी विधायक के खिलाफ जमीनी स्तर पर मजबूत एंटी इनकम्बेंसी का फीडबैक मिलता है तो लगातार दो या उससे अधिक बार चुनाव जीत चुके विधायकों को भी टिकट से वंचित किया जा सकता है। हालांकि जिन मौजूदा विधायकों के पक्ष में मजबूत जनसमर्थन और चुनावी बढ़त का आकलन सामने आएगा उन्हें लंबे समय से विधायक होने के बावजूद दोबारा मौका दिया जा सकता है।



युवाओं, महिलाओं और नए चेहरों पर जोर

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पार्टी के थिंक टैंक की ओर से संगठन से जुड़े युवा, महिला और नए चेहरों को अधिक अवसर देने का सुझाव दिया गया है। इसके जरिए एक तरफ स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी से निपटने और दूसरी तरफ संगठन में पीढ़ीगत बदलाव लाने की कोशिश की जा सकती है। पार्टी अब केवल स्थापित राजनीतिक चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने व्यापक संगठनात्मक कैडर को भी टिकट वितरण में प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रही है।



हालांकि अंतिम उम्मीदवारों का फैसला पार्टी की औपचारिक प्रक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होगा। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी का यह मंथन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य में मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और उनकी स्थानीय स्वीकार्यता को लेकर पार्टी पहले से ही विस्तृत फीडबैक जुटा रही है। आने वाले महीनों में यह प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।



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