पीएम मोदी की संयम की अपील के पीछे असली संकट क्या है?
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध की आग अब भारतीय आम आदमी की जेब तक पहुंचने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10-11 मई को देशवासियों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने, कार-पूलिंग अपनाने, विदेश यात्रा घटाने और वर्क-फ्रॉम-होम को वापस लाने की अपील की है।
यह महज एक नेक सलाह नहीं है। यह उस बड़े तूफान की आहट है, जिसमें पेट्रोल-डीजल की कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं। बता दें तेल कंपनियां हर महीने 30 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठा रही हैं। महंगाई की एक नई लहर आने की आशंका है। यह एक्सप्लेनर आपको बताएगा कि संकट कितना गहरा है। सरकार क्या कर सकती है और आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा।
आंकड़े बताते हैं- क्यों जरूरी है स्वैच्छिक संयम
कच्चे तेल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। इससे IOC, BPCL और HPCL को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
PM मोदी ने इसे दशक का सबसे बड़ा संकट करार देते हुए नागरिकों से ईंधन बचाने और घरेलू उत्पाद प्राथमिकता देने की अपील की है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल में 20% तक की बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है। हालांकि तत्काल 4-5 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की संभावना है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल, 90% LPG और 65% प्राकृतिक गैस आयात करता है। इससे ग्लोबल कीमतों का सीधा असर पड़ता है।
सरकार की स्वैच्छिक संयम की अपील इतिहास में नीतिगत कदमों की भूमिका रही है, जैसा कोविड के दौरान जनता कर्फ्यू से पहले हुआ था।
Background से समझें पूरी कहानी
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। देश की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में युद्ध के कारण आने वाली रुकावट भारत के लिए सीधे ऊर्जा संकट बन जाती है।
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत पर ऊर्जा दबाव आया था, लेकिन तब रूसी तेल की सस्ती उपलब्धता ने राहत दी। अब ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया में एक नया और व्यापक संकट उभरा है।
इस संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में भारी व्यवधान हुआ है। इससे भारत के मुख्य ऊर्जा आपूर्ति मार्ग प्रभावित हो गए।
इस बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें करीब दो साल से स्थिर रखी गई थीं। चुनावी मजबूरियों और महंगाई को काबू में रखने के इरादे से सरकार ने उत्पाद शुल्क घटाकर पेट्रोल पर तीन रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दिया। इस कारण हर महीने 14 हजार करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ है।
क्या तेल कंपनियां डूब रही हैं
भारत की सरकारी तेल कंपनियों IOC, BPCL और HPCL को मार्च के मध्य से अब तक लगभग एक लाख करोड़ रुपए का अनुमानित नुकसान हो चुका है। यह नुकसान इसलिए हो रहा है, क्योंकि ये कंपनियां बाजार में जितने में तेल खरीद रही हैं, उससे कम दाम पर आपको बेच रही हैं। इसे अंडर-रिकवरी कहते हैं।
KPMG के ग्लोबल एनर्जी हेड अनीश डे के मुताबिक, तेल कंपनियों का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा रहा है। उनकी बैलेंस शीट बेहद कमजोर हो गई है। इसे जल्द से जल्द ठीक करने की जरूरत है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने माना है कि OMC (तेल विपणन कंपनियां) कच्चा तेल और LPG ऊंचे दाम पर खरीद रही हैं। वहीं उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए सस्ते दाम पर बेच रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अनुमानित अंडर-रिकवरी दो लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।
क्यों हो रहा है: युद्ध का ग्लोबल असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। यहां व्यवधान के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। यह पांच महीने में करीब 80% की बढ़ोतरी है।
पश्चिम एशिया युद्ध अब अपने तीसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। कोई कूटनीतिक समाधान नहीं दिख रहा, जिससे ऊर्जा बाजारों में लंबे समय तक अस्थिरता का डर बना हुआ है।
कौन प्रभावित: हर वर्ग पर मार
FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) कंपनियों ने पहले ही 3-5% की कीमत बढ़ोतरी कर दी है। आगे और बढ़ाने की तैयारी है। लॉजिस्टिक्स लागत, कच्चे माल की कीमतें और मुद्रा अवमूल्यन मिलकर आम उपभोक्ता को निचोड़ रहे हैं।
किसान, ट्रांसपोर्टर, छोटे कारोबारी और मध्यम वर्ग को महंगाई का सामना करना होगा। खाद्य पदार्थों की ढुलाई महंगी होने से थाली की कीमत भी बढ़ेगी।
विभिन्न दृष्टिकोण
सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि उसने हर दिन पेट्रोल पंप पर आने वाले 6 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं की रक्षा की है। उत्पाद शुल्क घटाकर 14 हजार करोड़ रुपए प्रति माह का राजस्व नुकसान उठाया है।
विशेषज्ञों का पक्ष: ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, यह स्थिति लंबे समय तक बनाए नहीं रखी जा सकती। किसी न किसी मोड़ पर OMC और सरकार को ईंधन कीमतें बढ़ाने का फैसला लेना ही होगा।
विपक्ष का नजरिया: विपक्ष का तर्क है कि भाजपा ने बंगाल-तमिलनाडु चुनावों में ताबड़तोड़ मुफ्त उपहारों के वादे किए, जिसने राजकोषीय संकट (fiscal crisis) को और गहरा किया। अब उन्हीं वादों को पूरा करने के बोझ तले आम आदमी को महंगाई झेलनी होगी।
आम नागरिक: सोशल मीडिया पर मोदी की वर्क फ्रॉम होमअपील को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ इसे देशभक्ति की भावना से स्वीकार कर रहे हैं। वहीं कुछ पूछ रहे हैं कि जो मजदूर पैदल या साइकिल से काम पर जाते हैं उनके लिए यह अपील किस काम की?
जल्द ही क्या असर पड़ने वाला है
अल्पकालिक असर (Short-term): मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोल-डीजल में 4-5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी जल्द संभव है। साथ ही घरेलू LPG भी महंगी हो सकती है। इससे सब्जी, दूध, किराना समेत हर चीज की कीमत पर दबाव पड़ेगा।
शेयर बाजार पर पहले ही असर दिखा है। BSE Sensex मोदी की अपील के बाद 1,312 अंक गिरा।
दीर्घकालिक असर (Long-term): विशेषज्ञों के मुताबिक जितनी बड़ी अंडर-रिकवरी है, उसे पूरी तरह खत्म करने के लिए 20% यानी करीब 15-20 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है। इतनी बड़ी वृद्धि महंगाई को दहाई अंकों तक धकेल सकती है और उपभोग मांग को कुचल सकती है।
आपकी जेब पर असर: वहीं अगर पेट्रोल पांच रुपए महंगा हुआ और साथ में LPG भी बढ़ी, तो एक मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक बजट 800 से 1,500 रुपए तक बढ़ सकता है।
टाइमलाइन से समझें
मार्च 2026 (मध्य): पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान, कच्चा तेल 75 डॉलर से ऊपर उठने लगा।
अप्रैल 2026 (अंत): Kotak Equities की रिपोर्ट- पेट्रोल 25-28 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। सरकार ने इसे फेक न्यूज कहा है।
8 मई 2026: अंतर-मंत्रालयी बैठक, पेट्रोलियम मंत्रालय ने माना कि OMC की वित्तीय स्थिति दबाव में है।
10 मई 2026: PM मोदी ने हैदराबाद में जनसभा में नागरिकों से ईंधन बचाने, WFH अपनाने और विदेश यात्रा घटाने की अपील की।
11 मई 2026: मोदी ने वड़ोदरा में फिर यही संदेश दोहराया, BSE Sensex 1,312 अंक टूटा।
12 मई 2026 (अब तक): सरकारी सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में मूल्य वृद्धि पर चर्चा जारी है।
निष्कर्ष
मोदी की संयम की अपील दरअसल आने वाले कड़े फैसलों की पूर्वपीठिका है। इतिहास गवाह है कि कोविड से पहले जनता कर्फ्यू, फिर पूर्ण लॉकडाउन। इस बार भी स्वैच्छिक संयम की अपील के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ना लगभग तय मानी जा रही हैं।
सवाल सिर्फ यह है कि बढ़ोतरी कितनी होगी और कब होगी। कीमत बढ़ोतरी का समय और आकार वैश्विक कच्चे तेल के रुझानों और सरकार के महंगाई-राजकोषीय दबाव के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल आम आदमी को अपना बजट दुरुस्त रखना होगा। साथ ही सरकार को दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम करना होगा।
(लेखक- आर रंगनाथ प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक हैं)
Sources: Times of India
Business Standard, GoodReturns
Indian PSU, Pune Pulse
FAQ
- पीएम मोदी ने संयम क्यों अपनाने को कहा?
पीएम ने पश्चिम एशिया युद्ध से तेल संकट बताया। कच्चा तेल 126 डॉलर पहुंचा। तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ मासिक घाटा। भारत 40 फीसदी तेल आयात करता। ईंधन बचाने से कीमतें नियंत्रित रहेंगी। घर से काम और कार पूलिंग से तेल खपत कम होगी। यह दशक का बड़ा संकट है। - पेट्रोल-डीजल कितना महंगा होगा?
जल्द 4-5 रुपए प्रति लीटर बढ़ोतरी संभव। विशेषज्ञ 20 फीसदी यानी 15-20 रुपए कहते। एलपीजी भी महंगा। दो साल से कीमतें स्थिर। सरकार टैक्स घटाकर राहत दी। अब घाटा दो लाख करोड़ तक। लंबे समय में महंगाई बढ़ेगी।
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