क्या 2028 तक डूब जाएगा भारतीय बाजार, सिट्रिनी रिसर्च रिपोर्ट ने उड़ा दी निवेशकों की नींद

Kaushiki | Feb 26, 2026, 13:32 IST
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सिट्रिनी रिसर्च की रिपोर्ट ने 2028 तक AI के कारण ग्लोबल मार्केट क्रैश की चेतावनी दी है। इससे भारतीय IT शेयरों और नौकरियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Citrine Research Report: दुनियाभर के शेयर बाजारों में आजकल एक रिपोर्ट की बहुत चर्चा है। इस रिपोर्ट को सिट्रिनी रिसर्च (Citrini Research) ने तैयार किया है। इसका नाम द 2028 ग्लोबल इंटेलिजेंस क्राइसिस रखा गया है। यह रिपोर्ट भविष्य की एक इमेजिनरी लेकिन डरावनी तस्वीर पेश कर रही है।



इसमें बताया गया है कि अगर AI ऐसे ही बढ़ा तो क्या होगा। सिट्रिनी रिसर्च की फाउंडेशन 2023 में जेम्स वैन गीलन ने की थी। उन्होंने अपनी हेल्थकेयर कंपनी बेचकर यह रिसर्च ग्रुप बनाया है। उनके साथ लोटस टेक्नोलॉजी के आलाप शाह भी इस रिपोर्ट के ऑथर हैं।



भारतीय IT सेक्टर पर संकट के बादल

इस रिपोर्ट ने भारतीय इकोनॉमी (भारतीय शेयर बाजार)को लेकर काफी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2028 तक भारत के हालात बिगड़ सकते हैं। भारत का IT सेक्टर अभी सस्ती सेवाओं के मॉडल पर टिका है। लेकिन AI कोडिंग टूल्स ने कोडिंग का खर्च बहुत कम कर दिया है।



इससे (Indian Economy) TCS, इंफोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों को नुकसान हो सकता है। उनके पुराने कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने की रफ्तार 2027 तक बढ़ सकती है। रिपोर्ट का दावा है कि सर्विस एक्सपोर्ट घटने से रुपया कमजोर होगा। डॉलर के मुकाबले रुपया 18% तक गिर सकता है।



नौकरियों और सैलरी पर क्या होगा असर

रिपोर्ट में नौकरियों को लेकर भी बड़ी चेतावनी दी गई है। आने वाले समय में व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। सॉफ्टवेयर और सर्विस सेक्टर में AI का दखल बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।



हालांकि, रिपोर्ट कहती है कि इंसानों की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं होगी। प्रॉम्प्ट इंजीनियर और AI सेफ्टी रिसर्चर जैसी नई नौकरियां भी आएंगी।



लेकिन नई नौकरियों की सैलरी पुराने कामों से काफी कम होगी। एक नई नौकरी के बदले कई पुरानी नौकरियां खत्म हो सकती हैं। इससे मिडिल क्लास के बजट पर गहरा असर पड़ सकता है।



सरकारों के लिए विशेषज्ञों की क्या है सलाह

ग्लोबल इकोनॉमी अभी AI के पूरे असर को समझ नहीं पाई है। रिपोर्ट के को-ऑथर आलाप शाह ने एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने सरकारों को AI टैक्स लगाने पर विचार करने को कहा है। जब कंपनियां AI से ज्यादा मुनाफा कमाएं तो उन पर टैक्स लगे।



इस टैक्स के पैसे से बेरोजगार हुए लोगों की मदद होगी। सरकारें नया सामाजिक ढांचा तैयार कर इस बदलाव को संभाल सकेंगी। शाह का मानना है कि बाजार अब बहुत अस्थिर होने वाला है। सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।



बाजार की ताजा स्थिति और निवेशकों का डर

इस रिपोर्ट के आते ही अमेरिका में हलचल तेज हो गई। IBM के शेयरों में 25 साल की सबसे बड़ी गिरावट आई। भारत में भी विप्रो और टीसीएस के शेयर काफी नीचे गिरे। निवेशक अब AI के लॉन्ग-टर्म असर का आकलन कर रहे हैं।



हालांकि रिपोर्ट कहती है कि ये केवल एक संभावित अनुमान है। इसका मकसद डर फैलाना नहीं बल्कि भविष्य के लिए तैयार करना है। लेकिन शेयर बाजार हमेशा भविष्य की आशंकाओं पर ही रिएक्ट करता है। फिलहाल निवेशकों को संभलकर रहने की सलाह दी जा रही है। economy crisis



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