SC छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए 7 साल इंतजार! MP समेत 6 राज्यों के मुख्य सचिवों पर विशेषाधिकार हनन की तैयारी

Sandeep Kumar | Oct 16, 2026, 19:16 IST
अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति में बड़ी लापरवाही सामने आई है।
अनुसूचित जाति(SC) के छात्रों की छात्रवृत्ति में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कुछ छात्रों को भुगतान के लिए सात साल से अधिक इंतजार करना पड़ा। संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने इस पर नाराजगी जताई है। मध्य प्रदेश समेत छह राज्यों के मुख्य सचिव समिति के सामने पेश नहीं हुए। अब PAC ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई का आग्रह करने का फैसला किया है।

SC छात्रवृत्ति में देरी पर PAC सख्त

अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों की छात्रवृत्ति (Scholarship) में देरी पर संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने छह राज्यों के मुख्य सचिवों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताई है। इन अधिकारियों को छात्रवृत्ति वितरण में देरी और अनियमितताओं पर जवाब देने के लिए बुलाया गया था। समिति के मुताबिक निर्देश मिलने के बावजूद मुख्य सचिव पेश नहीं हुए। अब समिति ने लोकसभा अध्यक्ष से उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई शुरू कराने का आग्रह करने का फैसला किया है। PAC अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।



किन छह राज्यों के मुख्य सचिवों पर सवाल?

इस मामले में उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और बिहार के मुख्य सचिवों पर सवाल उठे हैं। इन राज्यों में SC छात्रवृत्ति वितरण की समीक्षा की गई थी। समिति जानना चाहती थी कि पात्र छात्रों को समय पर भुगतान क्यों नहीं मिला। इसके अलावा छात्रवृत्ति वितरण में सामने आई अनियमितताओं पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।



छात्रवृत्ति के लिए 89 महीने तक इंतजार

PAC अध्यक्ष के मुताबिक ऑडिट में छात्रवृत्ति भुगतान में गंभीर देरी सामने आई है। कुछ छात्रों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Pre-Matric Scholarship) के लिए 48 महीने तक इंतजार करना पड़ा। यानी चार साल तक राशि नहीं मिली। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Post-Matric Scholarship) में देरी 89 महीने तक पहुंच गई। यह अवधि सात साल पांच महीने के बराबर है। इतनी लंबी देरी से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि, ये ऑडिट में सामने आए उदाहरण हैं। इन्हें सभी छात्रों की औसत देरी नहीं माना जा सकता।



पात्र छात्रों को नहीं मिला पैसा

समिति अध्यक्ष ने छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। उनके मुताबिक कुछ पात्र छात्रों को सहायता राशि नहीं मिली। दूसरी ओर अपात्र लोगों को भुगतान किए जाने के मामले सामने आए। आरोप है कि आवेदन के दौरान आय और जाति संबंधी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। इससे वास्तविक पात्र छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, अपात्र भुगतान के मामलों की राज्यवार जानकारी उपलब्ध नहीं है। इन आरोपों की पुष्टि विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट से हो सकेगी।



तीन महीने बाद भी नहीं मिली रिपोर्ट

लोक लेखा समिति ने संबंधित राज्यों से कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी थी। इसमें छात्रवृत्ति वितरण की गड़बड़ियों पर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी थी। PAC अध्यक्ष के मुताबिक तीन महीने बाद भी रिपोर्ट नहीं मिली। इसके बाद मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए। समिति के अनुसार इसके बावजूद अधिकारी उपस्थित नहीं हुए। इसी गैरहाजिरी को गंभीर मानते हुए विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई का आग्रह करने का फैसला लिया गया।



PAC अध्यक्ष ने क्या कहा?

PAC अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने छात्रवृत्ति वितरण में लापरवाही पर नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे को उठाया। उनका कहना है कि छात्रवृत्ति गरीब विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता है। भुगतान में देरी से छात्रों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ती हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति वितरण में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। साथ ही पात्र विद्यार्थियों को समय पर सहायता देने पर जोर दिया।



मध्य प्रदेश में क्या स्थिति?

मध्य प्रदेश भी उन छह राज्यों में शामिल है, जिनके मुख्य सचिव समिति के सामने पेश नहीं हुए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मध्य प्रदेश से जुड़े अलग आंकड़े नहीं दिए गए हैं। राज्य में कितने छात्रों की छात्रवृत्ति लंबित है, यह स्पष्ट नहीं है। अपात्र लोगों को भुगतान के कितने मामले सामने आए, इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।



छात्रवृत्ति की आय सीमा बढ़ाने की मांग

PAC अध्यक्ष ने SC छात्रवृत्ति योजनाओं की आय सीमा बढ़ाने की जरूरत भी बताई है। इस संबंध में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव से चर्चा हुई। आय सीमा बढ़ने से अधिक विद्यार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।



विशेषाधिकार हनन क्या है?

संसद और उसकी समितियों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं। इनके तहत समितियां अधिकारियों को तलब कर सकती हैं। उनसे दस्तावेज और स्पष्टीकरण भी मांग सकती हैं। संसदीय कार्यवाही में अनुचित बाधा डालना विशेषाधिकार हनन का विषय बन सकता है। हालांकि, इसका फैसला निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के तहत होता है। इस मामले में PAC ने लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई का आग्रह करने का निर्णय लिया है। अभी किसी अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का दोष तय नहीं हुआ है।

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