छत्तीसगढ़ में RTE की फीस बढ़ाने की तैयारी, सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय कमेटी, निजी स्कूलों के खर्च का होगा आकलन
Umeshwari Baghel | Nov 05, 2026, 22:50 IST
छत्तीसगढ़ में RTE फीस की समीक्षा के लिए सरकार ने 7 सदस्यीय कमेटी बनाई
रायपुर।छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति राशि में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। प्रदेश सरकार ने इस राशि की समीक्षा और नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने सात अधिकारियों की एक विशेष समिति गठित की है।
समिति शिक्षा पर होने वाले खर्च का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर फीस प्रतिपूर्ति की नई दर तय करने पर विचार होगा। राज्य के निजी स्कूल संगठन लंबे समय से RTE के अंतर्गत प्रवेश लेने वाले बच्चों की पढ़ाई के बदले मिलने वाली सरकारी राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में शैक्षणिक गतिविधियों और स्कूल संचालन से जुड़े खर्च बढ़े हैं। इसलिए वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि की समीक्षा जरूरी है। इसी मांग को देखते हुए सरकार ने समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार समिति की कमान रायपुर शिक्षा संभाग के संयुक्त संचालक को सौंपी गई है, जिन्हें समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों के शिक्षा अधिकारियों को भी समिति में शामिल किया गया है। समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वित्तीय मामलों से जुड़े अधिकारी को भी स्थान दिया गया है, ताकि शिक्षा पर होने वाले खर्च का आकलन किया जा सके।
संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर: अध्यक्ष
जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर: सदस्य
एसके सारस्वत, उप संचालक, समग्र शिक्षा: सदस्य सचिव
पोषण लाल वर्मा, सहायक संचालक (वित्त), लोक शिक्षण संचालनालय: सदस्य
सहायक संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय दुर्ग: सदस्य
विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डोंगरगांव, जिला राजनांदगांव: सदस्य
सहायक संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायपुर: सदस्य
समिति का प्रमुख काम RTE के तहत दी जाने वाली फीस प्रतिपूर्ति की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करना है। इसके लिए शिक्षा पर होने वाले खर्च से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे। सरकारी स्कूलों में प्रति विद्यार्थी होने वाले व्यय का भी आकलन किया जाएगा।
इस अध्ययन की जानकारी के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि के पुनर्निर्धारण पर विचार होगा। फिलहाल सरकार ने नई दर की घोषणा नहीं की है। समिति की रिपोर्ट आने और शासन स्तर पर निर्णय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निजी स्कूलों को मिलने वाली राशि में कितनी बढ़ोतरी होगी।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध दर्ज कराया था। एसोसिएशन के अनुसार उसने 1 मार्च से 17 मई तक असहयोग आंदोलन चलाया।
इस दौरान प्रमुख मांगों में फीस प्रतिपूर्ति का पुनर्निर्धारण और इसके लिए समिति का गठन शामिल था। अब राज्य सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने को संगठन अपनी मांग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रहा है।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने समिति गठन पर मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के प्रति आभार जताया है। उनके अनुसार संगठन लंबे समय से RTE के तहत दी जाने वाली राशि की समीक्षा चाहता था, और समिति के गठन से इस प्रक्रिया का रास्ता खुला है।
एसोसिएशन के अनुसार नई राशि तय होने के बाद राज्य सरकार इसकी जानकारी केंद्र सरकार को भेजेगी, और निर्धारित प्रतिपूर्ति राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से दिया जाएगा।
सरकार के इस निर्णय के बाद निजी स्कूल संचालकों की नजर समिति की आगामी कार्यवाही पर रहेगी। स्कूल प्रबंधन को उम्मीद है कि खर्च का वास्तविक आकलन होने से फीस प्रतिपूर्ति की दरों में उचित संशोधन हो सकेगा। हालांकि, समिति गठन का अर्थ तत्काल फीस बढ़ोतरी नहीं है। नई दर लागू करने से पहले खर्च संबंधी आंकड़ों की समीक्षा, समिति की अनुशंसा और शासन की स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च स्कूल उठाते हैं और उसकी भरपाई सरकारी प्रतिपूर्ति से होती है। यदि यह राशि लंबे समय से न बढ़ी हो, तो स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है, और इसका असर गरीब बच्चों के प्रवेश और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसलिए इस समिति का काम सीधे उन परिवारों से जुड़ा है जो RTE कोटे से बच्चों को निजी स्कूल भेजते हैं।
FAQs
सवाल 1: RTE के तहत फीस प्रतिपूर्ति क्या है?
जवाब: RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूल वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई के बदले सरकार स्कूलों को जो राशि देती है, उसे फीस प्रतिपूर्ति कहा जाता है।
सवाल 2: सरकार ने किस तरह की समिति बनाई है?
जवाब: स्कूल शिक्षा विभाग ने सात अधिकारियों की समिति बनाई है। इसकी अध्यक्षता रायपुर शिक्षा संभाग के संयुक्त संचालक करेंगे। समिति शिक्षा पर होने वाले खर्च का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट देगी।
सवाल 3: क्या समिति बनने से फीस तुरंत बढ़ेगी?
जवाब: नहीं। समिति गठन का मतलब तत्काल बढ़ोतरी नहीं है। पहले आंकड़ों की समीक्षा, समिति की सिफारिश और शासन की मंजूरी होगी।
सवाल 4: इस फैसले से अभिभावकों पर क्या असर होगा?
जवाब: खबर में अभिभावकों के लिए सीधे किसी बदलाव का उल्लेख नहीं है। RTE कोटे में प्रवेश पाने वाले बच्चों के लिए प्रतिपूर्ति व्यवस्था का असर भविष्य में पड़ सकता है।
स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में शैक्षणिक गतिविधियों और स्कूल संचालन से जुड़े खर्च बढ़े हैं। इसलिए वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि की समीक्षा जरूरी है। इसी मांग को देखते हुए सरकार ने समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
रायपुर के संयुक्त संचालक को समिति की जिम्मेदारी
समिति में शामिल सात अधिकारी
जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर: सदस्य
एसके सारस्वत, उप संचालक, समग्र शिक्षा: सदस्य सचिव
पोषण लाल वर्मा, सहायक संचालक (वित्त), लोक शिक्षण संचालनालय: सदस्य
सहायक संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय दुर्ग: सदस्य
विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डोंगरगांव, जिला राजनांदगांव: सदस्य
सहायक संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायपुर: सदस्य
खर्च की समीक्षा के बाद तय होगी नई राशि
इस अध्ययन की जानकारी के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि के पुनर्निर्धारण पर विचार होगा। फिलहाल सरकार ने नई दर की घोषणा नहीं की है। समिति की रिपोर्ट आने और शासन स्तर पर निर्णय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निजी स्कूलों को मिलने वाली राशि में कितनी बढ़ोतरी होगी।
निजी स्कूल संगठनों का लंबा आंदोलन
इस दौरान प्रमुख मांगों में फीस प्रतिपूर्ति का पुनर्निर्धारण और इसके लिए समिति का गठन शामिल था। अब राज्य सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने को संगठन अपनी मांग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मान रहा है।
एसोसिएशन ने फैसले का स्वागत किया
एसोसिएशन के अनुसार नई राशि तय होने के बाद राज्य सरकार इसकी जानकारी केंद्र सरकार को भेजेगी, और निर्धारित प्रतिपूर्ति राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से दिया जाएगा।
समिति की रिपोर्ट पर टिकी नजर
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQs
सवाल 1: RTE के तहत फीस प्रतिपूर्ति क्या है?
जवाब: RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूल वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई के बदले सरकार स्कूलों को जो राशि देती है, उसे फीस प्रतिपूर्ति कहा जाता है।
सवाल 2: सरकार ने किस तरह की समिति बनाई है?
जवाब: स्कूल शिक्षा विभाग ने सात अधिकारियों की समिति बनाई है। इसकी अध्यक्षता रायपुर शिक्षा संभाग के संयुक्त संचालक करेंगे। समिति शिक्षा पर होने वाले खर्च का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट देगी।
सवाल 3: क्या समिति बनने से फीस तुरंत बढ़ेगी?
जवाब: नहीं। समिति गठन का मतलब तत्काल बढ़ोतरी नहीं है। पहले आंकड़ों की समीक्षा, समिति की सिफारिश और शासन की मंजूरी होगी।
सवाल 4: इस फैसले से अभिभावकों पर क्या असर होगा?
जवाब: खबर में अभिभावकों के लिए सीधे किसी बदलाव का उल्लेख नहीं है। RTE कोटे में प्रवेश पाने वाले बच्चों के लिए प्रतिपूर्ति व्यवस्था का असर भविष्य में पड़ सकता है।
महाकाल मंदिर में सबसे पहले मनेगी दीपावली, चारों आरतियों में जलाई जाएगी फूलझड़ी, मंदिर में आतिशबाजी पर रहेगी रोक
By Amresh Kushwaha
पंडित धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान पर समर्थन में उतरे कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, कही ये बात
By Sandeep Kumar
अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ीं: महू कोर्ट ने चेक बाउंस केस में जारी किया गिरफ्तारी वारंट
By Amresh Kushwaha
रायपुर में बवाल, 400 से ज्यादा D.Ed कैंडिडेट्स ने घेरा शिक्षा मंत्री का बंगला, पुलिस ने परिजनों संग घसीटकर बस में ठूंसा
By Umeshwari Baghel
MPPSC को हाई कोर्ट ने दिखाया आईना, नौकरी देने वाली सरकार है, आयोग नहीं, फिर कैसे दायर की अपील?
By Neel Tiwari
राजस्थान यूथ कांग्रेस में नई शुरुआत, अभिषेक चौधरी बने प्रदेश अध्यक्ष, अनिल चोपड़ा वरिष्ठ उपाध्यक्ष
By Jageshwar Prasad
जहरीली शराब कांड में होटल सील कर प्रशासन ने लूटी वाहवाही, HC में नहीं दिखा पाए सीलिंग का आदेश
By Neel Tiwari