8th Pay Commission: कर्मचारियों की मांग- 52 हजार से अधिक हो बेसिक सैलरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- 8वें वेतन आयोग की दिल्ली बैठकें आज खत्म हो गई हैं।
- कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें आयोग के सामने रखी हैं।
- आईआरटीएसए ने न्यूनतम सैलरी 52 हजार 600 रुपए करने की मांग की है।
- एसोसिएशन ने 2.92 का फिटमेंट फैक्टर भी सुझाया है।
- आयोग अगले साल मई-जून तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा।
बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग तेज
आठवें वेतन आयोग को लेकर दिल्ली में जारी अहम परामर्श बैठकें आज यानी 10 अगस्त को खत्म हो गई हैं। इन बैठकों में दिल्ली और आसपास के केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों ने हिस्सा लिया। पेंशनभोगियों और एसोसिएशनों को भी अपनी मांगें रखने का मौका मिला। सभी संगठनों ने सैलरी और भत्तों को लेकर अपने सुझाव आयोग के सामने रखे।
पहले भी सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन
इससे पहले भी कई बड़ी यूनियनें अपनी मांगें आयोग तक पहुंचा चुकी हैं। नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी एनसी-जेसीएम (National Council Joint Consultative Machinery) ने ज्ञापन सौंपा था। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस यानी एफएनपीओ (Federation of National Postal Organisations) ने भी अपनी मांगें रखी थीं। इन संगठनों ने सैलरी, पेंशन और भत्तों में संशोधन की मांग की है। वेतन आयोग अब इन सभी सुझावों का अध्ययन कर रहा है।
52,600 रुपए न्यूनतम सैलरी की मांग
इस बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन यानी आईआरटीएसए (Indian Railway Technical Supervisors Association) ने भी विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 52 हजार 600 रुपए प्रति माह करने की मांग की है।
अभी सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम सैलरी सिर्फ 18 हजार रुपए है। एसोसिएशन का कहना है कि यह रकम आज के खर्चों के हिसाब से बहुत कम है। इसीलिए इसे बढ़ाने की जोरदार मांग रखी गई है।
फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने का सुझाव
आईआरटीएसए ने न्यूनतम सैलरी की गणना के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है। फिटमेंट फैक्टर वह आंकड़ा होता है जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय होती है। एसोसिएशन का तर्क है कि पुरानी गणना का तरीका अब पुराना पड़ चुका है।
आज के दौर में इंटरनेट, पैकेज्ड पानी, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल इंश्योरेंस जैसे खर्च बढ़ गए हैं। इन सभी खर्चों को ध्यान में रखते हुए नई गणना जरूरी है। एसोसिएशन ने रेलवे सुरक्षा और तकनीकी श्रेणियों के लिए भी खास मांग रखी है। पे-लेवल छह से आगे के कर्मचारियों के लिए अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की गई है।
पद के हिसाब से अलग फिटमेंट फैक्टर
एसोसिएशन चाहती है कि सभी पे-लेवल के लिए एक जैसा फिटमेंट फैक्टर न रखा जाए। इसके बजाय कर्मचारियों के पद और जिम्मेदारी के हिसाब से अलग अलग फिटमेंट फैक्टर तय होना चाहिए। एसोसिएशन का मानना है कि इससे वेतन ढांचा ज्यादा न्यायसंगत बनेगा। ऊंचे पद और ज्यादा जिम्मेदारी वाले कर्मचारियों को इसका बेहतर फायदा मिलेगा। यह मांग खासतौर पर तकनीकी और सुरक्षा श्रेणी के कर्मचारियों के लिए रखी गई है।
सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की मांग
आईआरटीएसए ने सिर्फ सैलरी बढ़ाने तक ही मांग सीमित नहीं रखी है। एसोसिएशन ने करियर ग्रोथ और भत्तों में भी सुधार की मांग की है। अभी कर्मचारियों को सालाना तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट मिलता है। एसोसिएशन चाहती है कि इसे बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाए। इससे कर्मचारियों की सैलरी हर साल ज्यादा तेजी से बढ़ेगी।
ग्रुप-बी दर्जे की भी मांग
जूनियर इंजीनियर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर के करियर में लंबे समय से ठहराव देखा जा रहा है। इसे दूर करने के लिए सीनियर सेक्शन इंजीनियर को ग्रुप-बी गजेटेड दर्जा देने की मांग की गई है। इससे इन कर्मचारियों को बेहतर पदोन्नति के मौके मिल सकेंगे। एसोसिएशन का कहना है कि यह मांग लंबे समय से लंबित है।
एमएसीपी और भत्तों में बदलाव की मांग
एसोसिएशन ने मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन यानी एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) के नियमों में ढील देने की मांग की है। इसके साथ ही नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम और रिस्क अलाउंस बढ़ाने की भी मांग रखी गई है। एसोसिएशन का तर्क है कि यह सभी भत्ते आज की महंगाई के हिसाब से बहुत कम हैं। इन्हें मौजूदा महंगाई दर के अनुसार संशोधित करना जरूरी है।
आगे का पूरा शेड्यूल
दिल्ली की बैठकें खत्म होने के बाद भी सलाह मशविरे की प्रक्रिया जारी रहेगी। आयोग 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच जयपुर का दौरा करेगा। इसके बाद 7 और 8 सितंबर को चेन्नई में बैठकें होंगी। 9 सितंबर को पुडुचेरी में भी कर्मचारी संगठनों से चर्चा होगी। 16 से 18 सितंबर के बीच चंडीगढ़ में भी आयोग अलग अलग संगठनों से मिलेगा। इन सभी बैठकों में देशभर के कर्मचारी संगठनों के सुझाव लिए जाएंगे।
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ
फिलहाल न्यूनतम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आयोग या केंद्र सरकार की तरफ से भी अभी कोई घोषणा नहीं की गई है। देशभर के सभी प्रमुख कर्मचारी संगठनों से बातचीत के बाद ही आयोग ड्राफ्ट तैयार करेगा। आयोग की योजना है कि मई-जून 2027 तक अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप दी जाएं। इसके बाद सरकार इन सिफारिशों पर अंतिम फैसला लेगी।
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