अभिजीत दिपके के पिता बोले- कभी राजनीति में नहीं जाएगा मेरा बेटा
समझें क्या है पूरा मामला
- सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता ने बड़ा बयान दिया है।
- उन्होंने कहा, अभिजीत कभी राजनीति में नहीं जाएगा।
- पिता का सपना था, बेटा यूपीएससी पास कर सिविल सेवा में जाए।
- जंतर-मंतर पर 37 दिन चला आंदोलन अब खत्म हो चुका है।
- बेटे की पढ़ाई के लिए लिया एजुकेशन लोन पिता आज भी चुका रहे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक हैं अभिजीत दिपके। उनके पिता का बयान अब चर्चा में है। पिता भगवान शंकर दिपके ने साफ कहा है कि बेटा राजनीति में नहीं जाएगा। यह बयान जंतर-मंतर पर चला आंदोलन खत्म होने के बाद आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस लिया। यह आंदोलन 37 दिन तक चला था। पिता ने बेटे की पढ़ाई और संघर्ष को लेकर भी दिल की बात कही।
राजनीति से क्यों रहेंगे दूर
भगवान शंकर दिपके ने एक इंटरव्यू में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटा इतनी बड़ी पहचान बना लेगा। लेकिन उनका मानना है कि अभिजीत का भविष्य राजनीति में नहीं है। उन्होंने बताया कि परिवार में कोई कभी राजनीति में नहीं रहा। यहां तक कि परिवार में कोई सरपंच भी नहीं बना। पिता का सपना हमेशा से यही था। बेटा यूपीएससी (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) पास करे, यही उनकी इच्छा थी। वह चाहते थे कि अभिजीत सिविल सेवा में जाए। इससे उसका भविष्य सुरक्षित रहता।
लाठीचार्ज की खबर सुन रोए पिता
पिता ने बताया कि आंदोलन के दौरान वह लगातार चिंतित रहते थे। उन्हें हर पल बेटे की सेहत की फिक्र रहती थी। इसी बीच अभिजीत डेंगू और टाइफाइड की चपेट में भी आ गया। इससे पूरे परिवार की चिंता और बढ़ गई थी। कई बार उनका मन हुआ कि दिल्ली जाकर बेटे को वापस घर ले आएं। लेकिन छात्रों के लिए उसके संघर्ष को देखते हुए उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके उलट वह लगातार बेटे का हौसला बढ़ाते रहे। पिता ने बताया कि 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज हुआ था। इसकी खबर सुनकर वह पूरे दिन भावुक रहे। उनके आंसू पूरे दिन नहीं रुके।
इंजीनियर नहीं, पत्रकार बने
भगवान दिपके खुद सिविल इंजीनियर हैं। वह चाहते थे कि उनका बेटा भी इंजीनियर बने। अभिजीत ने छत्रपति संभाजीनगर के सरस्वती भुवन कॉलेज से स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसने पुणे के सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। लेकिन उसका मन इंजीनियरिंग में नहीं लगा। बाद में उसने तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की। उसने साल 2021 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री पूरी की। इसी दौरान उसने आम आदमी पार्टी के लिए भी काम किया। वह पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ा रहा। साथ ही वह दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन एडवाइजर भी रहा।
विदेश में पढ़ाई के लिए लिया लोन
पत्रकारिता के बाद अभिजीत ने आगे पढ़ाई की इच्छा जताई। उसने पीआर (पब्लिक रिलेशंस) में उच्च शिक्षा लेने की बात कही। उस समय पिता रिटायरमेंट के करीब थे। फिर भी उन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लिया। उन्होंने बताया कि लोन लेकर उन्होंने बेटे को बोस्टन यूनिवर्सिटी भेजा था। आज भी वह उसी लोन की किस्तें चुका रहे हैं। पिता ने यह भी बताया। अभिजीत को बचपन में क्रिकेट का काफी शौक था। लेकिन उन्होंने बेटे से हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा।
ऐसे शुरू हुई सीजेपी
अभिजीत उस समय बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर रहा था। 15 मई को एक टिप्पणी सामने आई थी। यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) जस्टिस सूर्यकांत ने दी थी। इसके अगले दिन यानी 16 मई को अभिजीत ने एक सवाल पूछा। उसने यह सवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा। उसने पूछा कि अगर सारे कॉकरोच एक हो जाएं तो क्या होगा। इसी विचार से कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की शुरुआत हुई। कुछ ही दिनों में सीजेपी को सोशल मीडिया पर खूब समर्थन मिलने लगा। खासकर इंस्टाग्राम पर लाखों लोगों ने इसे सपोर्ट किया। धीरे-धीरे यह ऑनलाइन अभियान जंतर-मंतर के बड़े आंदोलन में बदल गया। यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था। यह आंदोलन 37 दिन तक चला। आखिरकार केंद्र सरकार ने प्रमुख मांग मान ली। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।
जरूरी FAQ
अभिजीत दिपके कौन हैं?
अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर 37 दिन तक आंदोलन चलाया। उनकी पढ़ाई पत्रकारिता और पीआर में हुई है।
सीजेपी की शुरुआत कैसे हुई?
15 मई को सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी आई थी। इसके अगले दिन अभिजीत ने एक्स पर सवाल पूछा था। इसी सवाल से कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की शुरुआत हुई।
क्या अभिजीत दीपके राजनीति में आएंगे?
नहीं, उनके पिता भगवान शंकर दिपके ने साफ कहा है कि अभिजीत कभी राजनीति में नहीं जाएगा। परिवार का सपना उसे सिविल सेवा में देखने का रहा है।
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