नीट कांड में धर्मेंद्र प्रधान हटे, डीजी हटे, स्टाफ हटा लेकिन फिर बचे NTA प्रमुख प्रदीप जोशी
Sanjay Gupta | Jul 26, 2026, 13:20 IST
NTA प्रमुख प्रदीप जोशी
नीट पेपर लीक कांड के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए Gen-Z आंदोलन से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हट गए। स्टाफ भी हटाया गया। इसके पूर्व 2024 के कांड में डीजी सुबोध भी हटे थे। वहीं, सभी हंगामों के बीच एक बार फिर NTA प्रमुख प्रदीप जोशी बच गए।
नीट यूजी 2026 पेपर लीक कांड के बाद देश भर में हुए छात्र आंदोलन के चलते आखिरकार केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। आंदोलन शुरू हुआ तो एनटीए के 47 स्टाफ को भी हटाया गया। इसके पहले साल 2024 के कांड के बाद डीजी सुबोध कुमार सिंह को हटाया गया था। वहीं, अपने लगभग हर पद पर किसीन किसी विवाद से जुड़े एनटीए प्रमुख प्रदीप जोशी बच गए।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन से लेकर यूपीएससी चेयरमैन और एनटीए के कार्यकाल तक कई विवाद उठते रहे हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने प्रधान के साथ ही जोशी के इस्तीफे की मांग की थी और कहा था कि यदि ये नहीं हटते तो इन्हें हटा दिया जाना चाहिए।
एनटीए चेयरमैन प्रदीप जोशी मूल रूप से उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के हैं। उनकी पढ़ाई यूपी के कानपुर में हुई। उनकी पहली बड़ी नियुक्ति मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन पद पर साल 2006 में हुई थी। इस नियुक्ति की नोटशीट से ही खुलासा होता है कि वे बीजेपी, संघ में कितनी पकड़ रखते हैं और क्यों हर बार सिस्टम की मार से वे बच जाते हैं?
नियुक्ति की नोटशीट में साफ लिखा था कि जोशी का संबंध बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से होना ज्ञात हुआ है। इनका चरित्र और छवि अच्छी है। जोशी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष रहे हैं। यह बताता है कि जोशी के संबंध उच्च स्तर पर काफी गहरे हैं जो उन्हें हर बार बचा देते हैं।
पीएससी मप्र चेयरमैन पद पर उनका कार्यकाल साल 2006 से 2011 तक रहा। इसके बाद वे छत्तीसगढ़ पीएससी चेयरमैन बने और फिर 2015 से 2020 तक यूपीएससी चेयरमैन हुए। इसके बाद एनटीए में पहुंचे। पीएससी मप्र में उनके कार्यकाल के दौरान साल 2009 में सबसे बड़ा प्रोफेसर भर्ती घोटाला हुआ।
इसमें 350 पदों पर सीधे प्रोफेसर भर्ती हुई। इसमें आज कई बड़े पदों पर बैठे लोग शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में भी आया कि नियुक्तियां गलत हुई थीं और चयनित हुए 54 लोगों के पास जरूरी सर्टिफिकेट नहीं थे। निजी सर्टिफिकेट को ही मान्य किया गया। वहीं, इसके बाद भी मामले को दबा दिया गया था।
साल 2021 में जब वे यूपीएससी चेयरमैन थे, तब स्पीकर ओम बिरला की बेटी स्वाति का केस उछला। आरोप लगे कि बेटी को वेटिंग लिस्ट से अंतिम चयन सूची में जगह दी गई। बाद में सफाई दी गई कि रिक्त पद बढ़ने से उन्हें जगह दी गई।
एनटीए का साल 2024 भी विवादों में रहा। तब भी पेपर लीक का मुद्दा उठा था। लेकिन तब एजेंसी और सरकार ने कहा कि इसका असर केवल कुछ सेंटरों तक सीमित रहा, इसलिए उन सेंटरों पर ही दोबारा परीक्षा कराई गई।
इसके बाद मामला ठंडा हो गया। हालांकि तत्कालीन डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह पर गाज गिरी और उन्हें जून 2024 में पद से हटा दिया गया। लेकिन जोशी पर कोई असर नहीं पड़ा और वे पद पर बने रहे। अब नीट यूजी 2026 में फिर बड़ा विवाद हो गया और इस बार पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी।
एनटीए देश की सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी है, जो करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करती है। यह नीट यूजी, नीट पीजी, CUET, CUET PG, JEE और CLAT जैसी अहम प्रवेश परीक्षाएं कराती है। इसमें हर साल करोड़ों छात्र शामिल होते हैं। देश भर की यूनिवर्सिटियों से लेकर आईआईटी, मेडिकल कॉलेज और लॉ यूनिवर्सिटियों में एडमिशन इसी के जरिए होते हैं।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसद की उच्च शिक्षा समिति ने भी एनटीए को लेकर तीखी टिप्पणी की थी और कार्यशैली को घेरा था। कई परीक्षाओं के उदाहरण देकर कहा था कि सिस्टम में भारी लापरवाही है और समय पर परीक्षा नहीं करा पा रहा है एनटीए। लेकिन इन सभी सलाहों को दरकिनार कर दिया गया।
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पीएससी से लेकर कई कार्यकालों में लगे आरोप
क्यों बच जाते हैं प्रदीप जोशी
नियुक्ति की नोटशीट में साफ लिखा था कि जोशी का संबंध बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से होना ज्ञात हुआ है। इनका चरित्र और छवि अच्छी है। जोशी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष रहे हैं। यह बताता है कि जोशी के संबंध उच्च स्तर पर काफी गहरे हैं जो उन्हें हर बार बचा देते हैं।
पीएससी का सबसे बड़ा प्रोफेसर भर्ती घोटाला
इसमें 350 पदों पर सीधे प्रोफेसर भर्ती हुई। इसमें आज कई बड़े पदों पर बैठे लोग शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में भी आया कि नियुक्तियां गलत हुई थीं और चयनित हुए 54 लोगों के पास जरूरी सर्टिफिकेट नहीं थे। निजी सर्टिफिकेट को ही मान्य किया गया। वहीं, इसके बाद भी मामले को दबा दिया गया था।
यूपीएससी चेयरमैन रहते समय यह विवाद
नीट यूजी 2024 भी विवादित रहा, डीजी हटे
इसके बाद मामला ठंडा हो गया। हालांकि तत्कालीन डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह पर गाज गिरी और उन्हें जून 2024 में पद से हटा दिया गया। लेकिन जोशी पर कोई असर नहीं पड़ा और वे पद पर बने रहे। अब नीट यूजी 2026 में फिर बड़ा विवाद हो गया और इस बार पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी।
करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करती है एनटीए
संसद की समिति ने भी उठाए थे सवाल
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प्रह्लाद जोशी होंगे शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी
NEET कराने वाले NTA प्रमुख प्रदीप जोशी का MPPSC चेयरमैन बनने से भर्ती तक रहा विवादों से नाता
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