स्मार्टफोन से डरा तालिबान? सरकारी कर्मचारियों के लिए जारी हुआ नो मोबाइल फरमान
अफगानिस्तान में तालिबान ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर सख्त रोक लगा दी है। आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है। नियम तोड़ने पर फोन मौके पर तोड़ा जाएगा और शरिया के तहत सजा दी जाएगी। छूट चाहिए तो सर्वोच्च नेता की लिखित मंजूरी लेनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अलग कर सकता है।
किस पर लागू होता है यह बैन?
यह आदेश केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसमें उच्च पदस्थ अधिकारी, सामान्य कर्मचारी और मुजाहिदीन तक सभी शामिल हैं। हालांकि यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान नहीं है। कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है। कुछ प्रांतों में असर ज्यादा दूर तक गया है। वहां महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।
कैसे हो रहा है लागू?
ब्रिटिश न्यूज प्लेटफॉर्म द गार्डियन के मुताबिक सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं। इनमें तालिबान अधिकारी आदेश पढ़ते और लोगों के फोन तोड़ते दिखे। हेरात के एक कर्मचारी ने बताया कि जब वह मोबाइल लेकर दफ्तर पहुंचा तो अधिकारियों ने उसका फोन जब्त कर लिया। बाद में वह फोन तोड़ दिया गया।तालिबान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
तालिबान क्यों कर रहा स्मार्टफोन बैन?
तालिबान को डर है कि अधिकारी मोबाइल के जरिए गोपनीय दस्तावेज लीक कर रहे हैं। कई बार सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गई थी।
इसके अलावा हेरात शहर में हुए महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। ये प्रदर्शन महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ थे। वीडियो फैलने के बाद तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेलनी पड़ी।
तालिबान का एक और तर्क है कि कर्मचारी काम के वक्त घंटों मोबाइल पर समय बर्बाद करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में है, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध इसका हल नहीं है।
इंटरनेट पर पाबंदी की पुरानी कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब तालिबान ने डिजिटल दुनिया पर नियंत्रण की कोशिश की हो। पिछले साल सितंबर में पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं।
तालिबान ने इसे अनैतिक सामग्री रोकने के लिए जरूरी बताया था। लेकिन इस फैसले से व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गहरा असर पड़ा। आखिरकार इंटरनेट फिर से बहाल करना पड़ा।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान अभी लोगों की प्रतिक्रिया देख रहा है। संभव है कि भविष्य में पूरे देश में स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कोशिश हो। यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अलग-थलग कर सकता है। पहले से बदहाल देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका और बुरा असर पड़ने की आशंका है।
FAQ
- तालिबान ने स्मार्टफोन पर बैन क्यों लगाया?
तालिबान को डर है कि सरकारी कर्मचारी मोबाइल से गोपनीय जानकारी लीक कर रहे हैं। हेरात में महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के वीडियो वायरल होने से भी तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेलनी पड़ी थी। काम के वक्त मोबाइल पर समय बर्बाद होने का तर्क भी दिया गया है। - बैन तोड़ने पर क्या सजा मिलेगी?
आदेश के मुताबिक उल्लंघन पर फोन मौके पर तोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही शरिया (Sharia – इस्लामिक धार्मिक कानून) के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। किसी को छूट चाहिए तो सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी अनिवार्य है।
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