Air India रोजाना रद्द करेगी 100 उड़ानें, सबसे ज्यादा विदेशी रूट होंगे प्रभावित, जानें कारण
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपने परिचालन में एक बड़ी कटौती का फैसला किया है। आसमान छूती जेट ईंधन की कीमतों और विमानों के कलपुर्जों की भारी कमी के कारण एयरलाइन रोजाना लगभग 100 उड़ानों को बंद करने जा रही है।
यह बदलाव अक्टूबर के अंत में शुरू होने वाले विंटर शेड्यूल के साथ प्रभावी होगा। वर्तमान में करीब 900 से 1,100 उड़ानें संचालित करने वाली इस एयरलाइन के बेड़े पर अब आर्थिक दबाव साफ दिखने लगा है।
ईंधन की मार से ठप पड़े विमान
इस बड़े फैसले के पीछे सबसे मुख्य कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती लागत है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है।
अप्रैल के अंत तक वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की कीमतें $179.46 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो फरवरी के मुकाबले 80% अधिक है। इसके अलावा, air india के लगभग 30 बड़े विमान इंजन और स्पेयर पार्ट्स की कमी की वजह से जमीन पर ही खड़े हैं।
इन देशों के लिए उड़ान भरना होगा मुश्किल
एयर इंडिया के इस फैसले का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर पड़ेगा। भारत को उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने वाली उड़ानों (हवाई सेवा) की संख्या में भारी कमी की जाएगी।
विशेष रूप से सैन फ्रांसिस्को, शिकागो, लंदन और सिडनी जैसे शहरों के लिए साप्ताहिक उड़ानों को कम किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, जिन रूट्स पर अभी रोजाना उड़ानें हैं, वहां अब हफ्ते में सिर्फ 4 या 5 दिन ही सेवा मिल पाएगी। जून के महीने में सिंगापुर और यूरोप की सेवाओं में सबसे तीखी कटौती देखने को मिल सकती है।
घरेलू नेटवर्क और ऑन-टाइम परफॉरमेंस पर फोकस
सिर्फ विदेश ही नहीं, बल्कि घरेलू रूट्स पर भी एयर इंडिया अपनी रणनीति बदल रही है। कंपनी बड़े महानगरों को जोड़ने वाले मेट्रो-टू-मेट्रो रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम करेगी।
इस कदम का उद्देश्य अपने उपलब्ध विमानों को उन रूट्स पर लगाना है जो अधिक मुनाफे वाले हों। साथ ही, इससे एयरलाइन को अपनी ऑन-टाइम परफॉरमेंस (OTP) सुधारने और विमानों को स्टैंडबाय पर रखने में मदद मिलेगी।
पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से बढ़ा बोझ
कॉम्पिटिटर एयरलाइनों की तुलना में एयर इंडिया को अंतरराष्ट्रीय परिचालन के कारण ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। पाकिस्तानी एयरस्पेस (Airspace) बंद होने की वजह से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।
इससे ईंधन की खपत और क्रू की लागत दोनों बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब वियना या स्टॉकहोम में रुकना पड़ रहा है। एयरलाइन पहले ही 20 हजार करोड़ से अधिक का घाटा सह चुकी है, ऐसे में टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस के लिए लागत पर नियंत्रण करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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