अमरनाथ यात्रा 2026: क्या आपने कराया रजिस्ट्रेशन? दर्शन से पहले पढ़ लें ये जरूरी गाइडलाइंस

Anjali Dwivedi | Apr 11, 2026, 16:17 IST
amarnath yatra 2026
बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए बड़ी खबर, अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए एडवांस रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू हो गया है। तीन जुलाई से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए बैंक और ऑनलाइन माध्यम से परमिट लिए जा सकेंगे।

महादेव के भक्तों के लिए साल का सबसे बड़ा इंतजार खत्म हो चुका है। दक्षिण कश्मीर के हिमालय में स्थित बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा की यात्रा के लिए बिगुल बज चुका है। साल 2026 की अमरनाथ यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। अगर आप भी इस साल बर्फानी बाबा के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।



अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से

इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्राइन बोर्ड ने डेली कोटा लागू किया है। इसके तहत यात्रा के दोनों मुख्य रास्तों पर हर दिन श्रद्धालुओं की एक तय संख्या को ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।



आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इस बार आधार आधारित बायोमेट्रिक जांच और ऑनलाइन परमिट की सुविधा भी दी जा रही है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रहे।



कौन कर सकता है यात्रा?

अमरनाथ की कठिन चढ़ाई के लिए स्वास्थ्य और आयु का विशेष ध्यान रखा गया है। यात्रा के लिए 13 साल से 70 साल तक की आयु के श्रद्धालु ही रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। सुरक्षा कारणों से 13 साल से कम उम्र के बच्चों, 70 साल से अधिक के बुजुर्गों और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को इस यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।



अमरनाथ यात्रा का पौराणिक महत्व

अमरनाथ यात्रा का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा यानी अमरत्व का रहस्य सुनाया था।



इस रहस्य को गुप्त रखने के लिए महादेव ने अपने वाहन नंदी, नागों और गणों को पीछे छोड़ दिया था। माना जाता है कि उस समय गुफा में मौजूद कबूतरों के एक जोड़े ने वह कथा सुन ली थी, जो आज भी वहां दिखाई देते हैं और उन्हें अमर माना जाता है।



दुर्गम रास्ता और अटूट आस्था

यह पवित्र गुफा (अमरनाथ गुफा) समुद्र तल से करीब 12 हजार 756 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालुओं को बाबा बर्फानी के स्वयंभू हिमलिंग के दर्शन के लिए 30 से 40 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है।



रास्ते संकरे, फिसलन भरे और दुर्गम हैं, जहां तापमान कई बार शून्य से नीचे चला जाता है। इसके बावजूद, हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर और अटूट विश्वास के साथ इस अलौकिक यात्रा का हिस्सा बनते हैं।



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