अरविंद केजरीवाल ने पूछा, जज कैसे देंगे फैसला जब उनके बच्चे CBI के वकील के साथ

Sandeep Kumar | Apr 15, 2026, 16:45 IST
Justice Swarn Kanta Sharma
अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाला केस में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि जज के बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से संबंध हैं, जो CBI के वकील हैं, और इससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

News in Short

  • केजरीवाल ने शराब घोटाला केस की सुनवाई कर रही जज को हटाने की मांग की।
  • आरोप है कि जज के परिवार का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से संबंध है।
  • केजरीवाल का कहना है कि जज की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
  • जज ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बदलने में बहुत जल्दी की, केजरीवाल ने इसे गलत ठहराया।
  • अब अदालत को इस मामले में निष्पक्ष निर्णय लेने की उम्मीद है।

News in Detail

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की मांग की है। केजरीवाल का कहना है कि जज के बच्चों के तुषार मेहता से संबंध हैं। तुषार मेहता CBI के वकील हैं। उनका आरोप है कि तुषार मेहता जज के बच्चों को केस सौंपते हैं। ऐसे में जज उनके खिलाफ आदेश नहीं दे सकतीं।



केजरीवाल की दूसरी अर्जी

अरविंद केजरीवाल ने 13 अप्रैल को हलफनामा दायर किया था। इसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। केजरीवाल का कहना था कि जज के बच्चों के तुषार मेहता से करीबी संबंध हैं। तुषार मेहता सॉलिसिटर जनरल हैं। उन्होंने कहा कि इस वजह से जज की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। अगर जज के परिवार के सदस्य सीबीआई के वकील से जुड़े हैं, तो जज को मामले से हटा दिया जाना चाहिए।



केजरीवाल के आरोप

केजरीवाल ने अपनी याचिका में कहा कि जज ने 5 मिनट की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेश को बदल दिया, जो बहुत जल्दी था। केजरीवाल का यह भी कहना है कि उनके मामले की सुनवाई इतनी तेजी से हो रही है, जबकि अन्य मामलों में इतनी जल्दी नहीं होती।



केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जज का संघ से जुड़ा होना एक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। उन्होंने कहा कि जज के राजनीतिक जुड़ाव को देखते हुए निष्पक्षता पर शक हो सकता है। उनके अनुसार, जज के परिवार के सदस्य सॉलिसिटर जनरल से जुड़े होने के कारण उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।



आरटीआई से मिली जानकारी

केजरीवाल ने सोशल मीडिया रिपोर्ट और आरटीआई से मिली जानकारी को आधार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि 2023 में 2,487 मामले, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 मामले जज के पुत्र को सौंपे गए थे। केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ उनके पेशेवर संबंध 'जीवंत, निरंतर और ठोस' हैं, न कि आकस्मिक। उन्होंने दस्तावेजों से यह साबित करने की कोशिश की कि इनका संबंध गहरा है।



केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि धारणा मायने रखती है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को निष्पक्ष होना चाहिए और ऐसा दिखना भी चाहिए। केजरीवाल के अनुसार, यह एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील आपराधिक मुकदमा है। चूंकि वह केंद्र सरकार के प्रमुख विरोधी हैं, उन्हें डर है कि इस स्थिति में उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।



हलफनामे में एक और बिंदु उठाया

AAP संयोजक केजरीवाल ने हलफनामे में एक और बिंदु उठाया है। उन्होंने कहा कि जब उनकी 'रिक्यूजल' अर्जी लंबित थी, तब भी अदालत ने प्रभावी आदेश दिए। केजरीवाल का मानना है कि जब तक अर्जी पर फैसला नहीं हो, तब तक कोई प्रभावी आदेश नहीं दिया जाना चाहिए था। इससे उनका अविश्वास बढ़ गया है।



हलफनामे में केजरीवाल ने यह भी कहा कि किसी निजी विवाद में वह इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन जब केंद्र के सर्वोच्च विधि अधिकारी जज के सामने पेश हों तो यह अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने जस्टिस शर्मा से अपील की कि वह इस मामले से अलग हो जाएं।



27 फरवरी को हुई थी रिहाई

शराब घोटाला केस में 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और अन्य 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। लेकिन CBI ने इस आदेश को चुनौती दी और अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में इसकी सुनवाई हो रही है। जज ने 9 मार्च को ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को गलत बताया और जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को रोक दिया।



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