ASI सर्वे : रिपोर्ट से तय होगा संभल के कल्कि विष्णु मंदिर का इतिहास
Sambhal violence : ASI ने संभल जिले में स्थित श्री प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर का निरीक्षण किया। शनिवार 21 दिसंबर को एएसआई की टीम ने मंदिर के कुएं और गर्भगृह का गहन सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य मंदिर के ऐतिहासिक महत्व का मूल्यांकन करना था। एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर इन स्थलों के संरक्षण या पुनर्निर्माण के लिए कदम उठाए जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद इन धार्मिक स्थलों के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।
कल्कि विष्णु मंदिर का निरीक्षण
ASI की टीम ने श्री प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर के कुएं का निरीक्षण किया। इसके बाद टीम ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और कल्कि भगवान की मूर्ति की फोटोग्राफी की। इस निरीक्षण का उद्देश्य मंदिर की संरचनात्मक स्थिति और धार्मिक महत्व का मूल्यांकन करना था। एसडीएम वंदना मिश्रा का कहना है कि एएसआई टीम ने कृष्ण कूप का भी निरीक्षण किया। इससे इस कूप की पुरानी स्थिति का आकलन किया गया। कूपों के निरीक्षण से एएसआई को संभल के पुरातात्विक स्थलों के इतिहास और उनके संरक्षण की आवश्यकता का सही अंदाजा मिल सकेगा।
19 कूपों का गहन निरीक्षण
संभल जिले में एएसआई ने 5 तीर्थ स्थलों और 19 कुओं का निरीक्षण किया। शुक्रवार को टीम ने गुप्त सर्वेक्षण किया। शनिवार को मंदिर के कुएं और गर्भगृह का गहन निरीक्षण किया। इन स्थलों के मूल्यांकन के बाद इनकी संरचना और सुरक्षा पर निर्णय लिया जाएगा।
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एएसआई रिपोर्ट का इंतजार
मंदिर का सर्वेक्षण हुआ पूरा
संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया का कहना है कि मंदिर का सर्वेक्षण सुरक्षित तरीके से पूरा कर लिया गया है। संभल के प्राचीन कार्तिकेय मंदिर की कार्बन डेटिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा गोपनीय तरीके से की गई थी। सुरक्षा कारणों से इस प्रक्रिया को मीडिया कवरेज से दूर रखा गया। एएसआई की चार सदस्यीय टीम ने प्रशासन से निरीक्षण को गोपनीय रखने का अनुरोध किया था। जिलाधिकारी संभल राजेंद्र पेंसिया के अनुसार मंदिर का सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
46 साल पूराना है मंदिर
संभल में हिंसा के बाद उपद्रवियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान बिजली चोरी का मामला सामने आया। 14 दिसंबर को पुलिस को दीपा राय इलाके में एक मंदिर मिला। यह मंदिर 1978 का बताया गया और 46 साल से बंद था। मंदिर सपा सांसद के घर से 200 मीटर की दूरी पर था। 15 दिसंबर को मंदिर खोला गया और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद एक कुएं के बारे में जानकारी मिली और उसकी खुदाई की गई। इसी बीच सरायतरीन इलाके में भी एक मंदिर मिला।
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