अयोध्या राम मंदिर घोटाला, 17 गुना महंगी जमीन खरीद और चढ़ावे पर SIT ने खोला राज
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब गहराता जा रहा है। SIT की जांच में सामने आया है कि मंदिर प्रबंधन में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के भतीजे और रिश्तेदार सक्रिय थे। आरोप है कि इन्हीं के जरिए चढ़ावे की रकम की बंदरबांट होती थी।
जांच में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव के परिजनों की भूमिका सामने आई है। SIT को निर्माण कार्य और जमीन खरीद में भी अनियमितता मिली है।
सूत्रों के मुताबिक SIT अपनी शुरुआती रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। इसके बाद ट्रस्ट को भंग करने और नए सिरे से गठन की संभावना जताई जा रही है।
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जमीन खरीद में भतीजे की भूमिका
बता दें कि चंदन राय ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का भतीजा है। राम मंदिर के लिए जमीन खरीद शुरू होने के साथ ही वह सक्रिय हो गया था। सूत्रों के अनुसार चंदन पिछले साल तक किराए के मकान में रहता था।
अब उसने अयोध्या के माझा इलाके में कई बीघा जमीन खरीदी है। हरिद्वार में भी उसका एक होटल बनाया गया बताया जाता है। आरोप है कि एक जमीन की रजिस्ट्री 10 मिनट के भीतर दो बार हुई थी।
सर्किल रेट से 17 गुना ज्यादा भुगतान
मंदिर विस्तार के लिए कुल 107 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई थी। ट्रस्ट ने पांच साल में राम जन्मभूमि के आसपास की जमीनें खरीदी। यह जमीन सर्किल रेट से लगबग 17 गुना ज्यादा कीमत पर खरीदी गई।
कई जमीनें नजूल और मंदिरों के नाम दर्ज थीं। नियमानुसार ऐसी जमीनों की खरीद-बिक्री संभव नहीं होती है। आरोप है कि इस पूरे सौदे में चंदन राय की अहम भूमिका रही है। SIT ने जमीन खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।
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VVIP पास जारी करने की पावर
वहीं सोमेश आनंद विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का भतीजा है। दोनों कर्नाटक के हुबली से हैं। दावा किया जा रहा है कि सोमेश बोरों में सामग्री भरकर ट्रेन से कर्नाटक भेजता था। फिर खाली हाथ फ्लाइट से लौट आता था।
सूत्रों के मुताबिक बिना सोमेश की मंजूरी के किसी ठेकेदार का भुगतान नहीं होता था। निर्माण सामग्री की खरीद का भुगतान भी उसके जरिए ही होता था। उसके पास VVIP पास जारी कराने का अधिकार भी था। आरोप है कि उसकी पहुंच चढ़ावा गिनने वाले कमरे तक भी थी।
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भतीजे के घर से मिले 36 लाख रुपए
साथ ही मनीष, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का भतीजा है। टिन्नू को चंपत राय का करीबी सहयोगी बताया जाता है। मनीष की ड्यूटी चढ़ावा गिनने वाले कमरे में लगाई गई थी।
SIT को बताया गया कि उसकी निशानदेही पर टिन्नू के पुश्तैनी घर से 36 लाख रुपए बरामद हुए। आरोप है कि टिन्नू ने वहां अपने भरोसेमंद लोगों की टीम तैयार कर ली थी। वहीं 13 जून को पूछताछ के बाद मनीष के मंदिर परिसर से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई।
मिश्रा परिवार पर भी आरोप
अनुकल्प और लवकुश मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। दोनों आपस में जीजा-साला हैं। अनुकल्प की ड्यूटी चढ़ावा गिनने में लगाई गई थी। पांच महीने पहले लवकुश को भी वहां नौकरी मिल गई थी।
मामला सामने आने के बाद लवकुश के घर से 12 लाख रुपए बरामद हुए। यह रकम उपले के ढेर में छिपाई गई थी। अनुकल्प ने हाल ही में अयोध्या में 65 लाख रुपए का मकान भी खरीदा है।
सिफारिश पर मिली काउंटिंग की ड्यूटी
रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप सिंह किसी ट्रस्ट सदस्य के रिश्तेदार नहीं हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार दोनों चंपत राय के करीबी माने जाते हैं। दोनों बैंक की चढ़ावा गिनती टीम में शामिल थे।
आरोप है कि चढ़ावे की रकम बैंक ले जाने के दौरान तीनों मंदिर न लौटकर किसी और जगह जाते थे। वहीं रकम का बंटवारा होने की बात कही जा रही है। SIT ने दोनों को संदिग्ध मानते हुए पूछताछ की है।
SIT तीन तरह की गड़बड़ी की जांच कर रही
- SIT फिलहाल तीन मुख्य बिंदुओं पर जांच कर रही है।
- पहला: दानपेटियों में आए चढ़ावे और कीमती धातुओं की चोरी।
- दूसरा: जमीन खरीद में सर्किल रेट से ज्यादा भुगतान।
- तीसरा: निर्माण सामग्री खरीद में करीब 40% कमीशनखोरी।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। इसके आधार पर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और नए सिरे से गठित करने की चर्चा चल रही है। आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।