एमपी समेत देशभर में 221 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल, दर्द से लेकर डायबिटीज तक की दवाइयां शामिल

Sourabh Bhatnagar | Sept 23, 2026, 11:53 IST
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CDSCO के अगस्त ड्रग अलर्ट में देशभर की 221 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश की 63 और उत्तराखंड की 39 दवाएं शामिल हैं। राज्य औषधि नियंत्रक ने कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

केंद्र सरकार की एक एजेंसी हर महीने दवाओं की जांच करती है। इसे CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) कहा जाता है। अगस्त महीने में इस एजेंसी ने बड़ा अलर्ट जारी किया है।



देशभर की 221 दवाओं और कॉस्मेटिक सामान के सैंपल फेल मिले। इनमें से 191 सैंपल राज्यों की लैब में फेल हुए। बाकी 29 सैंपल केंद्र की लैब में फेल पाए गए।



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किन राज्यों में कितनी दवाएं जांच में फेल मिलीं?

दवा जांच में हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 63 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके बाद उत्तराखंड में 39 और गुजरात में 17 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं।



महाराष्ट्र में 16 दवाओं के सैंपल फेल मिले हैं, जबकि मध्य प्रदेश में 12 दवाएं जांच में फेल पाई गईं। तमिलनाडु और हरियाणा में 11-11 दवाओं के सैंपल खराब मिले हैं।



इसके अलावा सिक्किम और उत्तर प्रदेश में 9-9, पंजाब में 8 और तेलंगाना में 6 दवाएं तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।



आंध्र प्रदेश में 4 दवाओं, जबकि दमन, केरल और पुडुचेरी में 3-3 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं।



जम्मू-कश्मीर में 2 दवाएं जांच में फेल मिलीं। वहीं पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और राजस्थान में 1-1 दवा मानकों पर खरी नहीं उतर पाई।



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मध्य प्रदेश में 12 दवाओं के सैंपल फेल

मध्य प्रदेश में भी दवाओं की गुणवत्ता को लेकर जांच में कुछ सैंपल फेल पाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की 12 दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतर सकीं। जांच में इन दवाओं में कुछ कमियां मिली हैं।



अब संबंधित दवा कंपनियों और इन बैच की जांच की जा रही है। दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए औषधि विभाग आगे की कार्रवाई कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि देशभर में फेल हुए दवा सैंपल की तरह मध्य प्रदेश के मामलों की भी नियमों के अनुसार जांच की जाएगी।



हिमाचल में सबसे ज्यादा फेल

हिमाचल प्रदेश की दवा फैक्ट्रियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। यहां बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। झाड़माजरी, भुड्ड और गुल्लरवालां में भी फैक्ट्रियां हैं। कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा में भी यूनिट हैं। इन सभी जगहों की दवा फैक्ट्रियों के सैंपल जांच में फेल हुए। हिमाचल देश में दवा बनाने का बड़ा केंद्र माना जाता है।



किन दवाओं में मिली खामी

जांच में कई तरह की दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। इनमें एंटीबायोटिक, दिल की बीमारी की दवाएं, दर्द और बुखार की दवाएं शामिल हैं। बच्चों को दी जाने वाली कुछ सीरप, किडनी, खांसी और पेट की दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए हैं।



इसके अलावा आंखों की दवा, इंजेक्शन और विटामिन से जुड़े प्रोडक्ट भी जांच में खराब पाए गए हैं। ज्यादातर दवाओं में घुलने की क्षमता, दवा में मौजूद तत्वों की मात्रा और संक्रमण मुक्त होने जैसे टेस्ट में कमी मिली है।



कुछ दवाओं में पीएच लेवल और छोटे-छोटे कणों (पार्टिकुलेट मैटर) से जुड़ी गड़बड़ी भी सामने आई है। वहीं कई दवाओं में जरूरी सक्रिय तत्व (API यानी दवा का असर करने वाला मुख्य हिस्सा) तय मात्रा में नहीं मिला।



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कौन सी दवाएं निकलीं फेल

लखनऊ की स्टेडमैड कंपनी की एक दवा जांच में फेल मिली है। यह दवा किडनी की पथरी के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है। वहीं सिरमौर की सिंबायोसिस फार्मास्युटिकल्स की डायबिटीज की दवा भी तय मानकों पर खरी नहीं उतरी। इस दवा का बैच नंबर TG242142 है और इसकी एक्सपायरी नवंबर 2026 है।



इसके अलावा उत्तराखंड की एचएसएन बायोटेक की खांसी की सीरप भी फेल पाई गई है। यह सीरप सर्दी और सूखी खांसी में दी जाती है। महाराष्ट्र के पालघर की नियोन लैबोरेट्री का इंजेक्शन भी जांच में खराब मिला है, जिसका इस्तेमाल प्रसव के दौरान किया जाता है।



गुजरात की मैक्सिला मेडिसाइंस की दर्द की दवा भी मानकों पर खरी नहीं उतरी। यह दवा तेज दर्द कम करने के लिए उपयोग की जाती है। वहीं सोलन की जेएम लैबोरेट्री की एंटीबायोटिक दवा भी फेल मिली, जो गले और फेफड़ों के संक्रमण के इलाज में दी जाती है।



इसके अलावा बद्दी की स्ट्रासवैल ऑर्गेनिक्स की बच्चों की पैरासिटामोल सीरप और पंजाब की डीआर स्किन केयर की काले धब्बे हटाने वाली साबुन भी जांच में फेल पाई गई है।



कंपनियों पर क्या होगी कार्रवाई

हिमाचल के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि जिन कंपनियों की दवाएं जांच में फेल मिली हैं, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। कंपनियों से कारण बताओ नोटिस के जरिए जवाब मांगा गया है।



इसके साथ ही संबंधित दवाओं के बैच की बिक्री और सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।



हालांकि, ज्यादातर दवा कंपनियों ने जांच में फेल हुए सैंपल की रिपोर्ट को चुनौती दी है। कंपनियों का कहना है कि वे इन नतीजों की दोबारा जांच की मांग कर रही हैं।



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दिल्ली में मिली नकली दवा

स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस मामले को लेकर जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय लैब में जांच के दौरान 29 दवाएं NSQ (Not of Standard Quality यानी मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं) पाई गई हैं।



वहीं, अलग-अलग राज्यों की लैब में जांच के दौरान 191 दवाएं भी तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।



इसके अलावा दिल्ली में एक दवा नकली भी मिली है। जांच में पता चला कि यह दवा किसी दूसरी कंपनी के नाम से बनाई जा रही थी। इसे बिना अनुमति वाले निर्माताओं ने तैयार किया था।



फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई कर रहे हैं।



NSQ मिलने से क्यों न डरें

एनएसक्यू का मतलब हर बार बड़ा खतरा नहीं होता है। यह सिर्फ जांचे गए बैच पर लागू होता है। बाजार में मौजूद उसी दवा के बाकी बैच सुरक्षित हो सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य मिलकर हर महीने ऐसी जांच करते हैं। इसका मकसद बाजार से खराब दवाएं हटाना है। इससे मरीजों को सुरक्षित और असरदार दवा मिल सकेगी।



मरीजों के लिए जरूरी सलाह

आम लोगों के लिए इस खबर से जुड़ी कुछ जरूरी बातें हैं। दवा खरीदते समय हमेशा बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए। कोशिश करें कि दवा किसी भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही खरीदें।



अगर दवा लेने के बाद भी बीमारी में सुधार नहीं हो रहा है या कोई परेशानी महसूस हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। किसी दवा को लेकर शिकायत होने पर औषधि विभाग को इसकी जानकारी दी जा सकती है। इससे खराब और नकली दवाओं पर रोक लगाने में मदद मिलती है।



देश में हर महीने हजारों दवाओं के सैंपल की जांच की जाती है। इनमें ज्यादातर दवाएं तय गुणवत्ता मानकों पर सही पाई जाती हैं। केवल कुछ दवाओं के सैंपल ही जांच में फेल होते हैं।



हालांकि, जो भी दवा सैंपल फेल मिलता है, उसकी गंभीरता से जांच की जाती है। इससे दवा कंपनियों को गुणवत्ता बनाए रखने और नियमों का पालन करने के लिए जवाबदेह बनाया जाता है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से जुड़ी है। जब दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल होती हैं, तो मरीजों की सेहत खतरे में पड़ सकती है। नकली दवा बनाना और बेचना कानूनन अपराध है। नागरिकों को यह जानने का हक है कि बाजार में मिलने वाली दवाएं कितनी सुरक्षित हैं। यह खबर सरकार, कंपनियों और आम लोगों तीनों के लिए जवाबदेही का संदेश देती है।



FAQ

  1. सवाल: CDSCO के अगस्त अलर्ट में कुल कितनी दवाएं फेल पाई गईं?
    जवाब: देशभर में 221 दवाओं और कॉस्मेटिक सामान के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए। इनमें से 191 सैंपल राज्यों की लैब में और 29 सैंपल केंद्र की लैब में फेल हुए। इनमें हिमाचल प्रदेश की सबसे ज्यादा 63 दवाएं शामिल हैं।
  2. सवाल: अगस्त में फेल पाई गई दवाओं वाली कंपनियों पर क्या कार्रवाई हो रही है?
    जवाब: हिमाचल के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के मुताबिक कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित बैच की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने पर कानून के तहत आगे कार्रवाई होगी।
  3. सवाल: क्या NSQ मिलने पर सभी दवाओं से डरना चाहिए?
    जवाब: नहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक NSQ सिर्फ जांचे गए बैच पर लागू होता है। बाजार में मौजूद उसी दवा के बाकी बैच सुरक्षित हो सकते हैं। हालांकि दिल्ली में एक दवा नकली भी मिली है, जिसकी अलग से जांच चल रही है।

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