मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार फिर चर्चा में, कैसे होती है CEC की नियुक्ति
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद के केंद्र में हैं। SIR अभियान के फैसलों को लेकर विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों का खुलासा हुआ है। ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 2029 तक है। उनके बाद विवेक जोशी अगले CEC बन सकते हैं।
आयोग के अंदर मतभेद की बात सामने आई
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट से चुनाव आयोग के अंदर चल रहे मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई बार आपत्तियां जताईं।
यह आपत्तियां एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक रूप से दर्ज हुईं। इसी बीच विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। यह मामला अभी सियासी घमासान का केंद्र बना हुआ है।
कौन हैं CEC ज्ञानेश कुमार
ज्ञानेश कुमार उत्तराखंड कैडर के 1988 बैच के आईएएस (IAS – Indian Administrative Service) अधिकारी हैं। उन्होंने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा।
उन्होंने आईआईटी (IIT – Indian Institute of Technology) कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने ICFAI (Institute of Chartered Financial Analysts of India) से बिजनेस फाइनेंस की डिग्री ली। अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उन्होंने एनवायर्नमेंटल इकोनॉमिक्स की पढ़ाई भी की है।
अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने केरल सरकार में कई अहम पदों पर काम किया। केंद्र में आने के बाद वे रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहे। इसके बाद गृह मंत्रालय (MHA – Ministry of Home Affairs) में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव भी रहे। बाद में वे संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव के पद पर रहे।
गृह मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद के प्रशासनिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में भी उनकी बड़ी भूमिका रही।
ज्ञानेश कुमार के बाद कौन बनेगा CEC
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल पूरा होने के बाद वरिष्ठता के आधार पर विवेक जोशी अगले मुख्य चुनाव आयुक्त बन सकते हैं। विवेक जोशी हरियाणा कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे इससे पहले हरियाणा के मुख्य सचिव रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति भी 2023 में बने नए कानून के तहत तय प्रक्रिया से ही होगी।
कैसे होती है CEC की नियुक्ति
दिसंबर 2023 में संसद ने एक नया कानून पास किया। इसी कानून के तहत अब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति होती है। सबसे पहले एक सर्च कमेटी योग्यता के आधार पर 5 नाम शॉर्टलिस्ट करती है। इस कमेटी की अध्यक्षता कानून मंत्री करते हैं। इसमें केंद्र सरकार के दो सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल होते हैं।
इसके बाद एक तीन-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति अंतिम नाम तय करती है। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर नियुक्ति को मंजूरी देते हैं।
2023 से पहले यह नियुक्ति सीधे राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर होती थी।
नई प्रक्रिया पर उठा विवाद
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के समय से ही इस नई प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार मामले में एक अहम फैसला दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब तक संसद नया कानून नहीं बनाती, तब तक नियुक्ति पैनल में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI – Chief Justice of India) शामिल रहेंगे।
लेकिन दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने नया कानून बनाकर पैनल से CJI को हटा दिया। उनकी जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। विपक्ष का कहना है कि इस व्यवस्था में तीन में से दो सदस्य सीधे सरकार के होते हैं। इससे बहुमत हमेशा सत्तापक्ष के पास रहता है।
इस नए कानून की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने इस मामले पर एक विभाजित फैसला सुनाया। यानी यह विवाद अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।
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