ChatGPT से सावधान, करोड़ों भारतीयों का डेटा पहुंचा अमेरिका!
क्या आप जानते हैं कि जब आप अपने फोन पर चैटजीपीटी (ChatGPT) से कोई सवाल पूछते हैं, तो वह जानकारी सिर्फ आपके और बॉट के बीच नहीं रहती? हालिया घटनाक्रमों और रिपोर्ट्स ने एक बड़ी चिंता को जन्म दे दिया है।
भारत, जो दुनिया में चैटबॉट डाउनलोड करने के मामले में अमेरिका के ठीक बाद दूसरे स्थान पर है, अब अनजाने में एक वैश्विक डेटा युद्ध और सैन्य रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है।
OpenAI का दूसरा सबसे बड़ा यूजर भारत
दुनिया भर में जो चैटबॉट डाउनलोड हो रहे हैं, उनमें से 29 प्रतिशत केवल अमेरिका से होते हैं और 20 प्रतिशत भारत से। ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ (को-फाउंडर सैम ऑल्टमैन) ने यह भी बताया है कि भारत में चैटजीपीटी के साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 करोड़ को पार कर चुकी है।
इस विशाल संख्या को देखते हुए कंपनी ने भारत में चैटजीपीटी गो (ChatGPT Go) का मुफ्त सब्सक्रिप्शन भी शुरू किया है। हालांकि, इस मुफ्त सुविधा के पीछे डेटा की एक गहरी रणनीति छिपी हुई है।
पेंटागन और टेक कंपनियों के बीच हुई सीक्रेट डील
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल निबंध लिखने या कोडिंग करने तक सीमित नहीं है। यह अब जियोपॉलिटिक्स (Geopolitics) और युद्ध तकनीक (War Technology) का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन (Pentagon) ने हाल ही में प्रमुख AI कंपनियों के साथ अपने सिस्टम में इन टूल्स का उपयोग करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना बनाई है। इसी योजना ने तकनीक की दुनिया में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
एंथ्रोपिक का इनकार बनाम OpenAI का इकरार
जब अमेरिकी सरकार ने AI मॉडल्स को मिलिट्री और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा, तो कंपनियों के बीच मतभेद सामने आ गए। क्लाउड (Claude) नाम का AI मॉडल बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) ने इस पर कड़ा विरोध जताया है।
उन्होंने साफ किया कि उनका AI सिस्टम सामूहिक निगरानी (Mass Surveillance) या स्वायत्त हथियार (Autonomous Weapons) बनाने के लिए नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
इसके विपरीत, ओपनएआई ने पेंटागन के साथ डील साइन कर ली है। इसका मतलब है कि करोड़ों भारतीयों के जरिए फीड किया गया डेटा और एल्गोरिदम अब अमेरिकी रक्षा प्रणाली का हिस्सा बन सकते हैं।
हालांकि, विवाद बढ़ता देख सैम ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने डील को रिवाइज (Revise) किया है ताकि इसका उपयोग घातक हथियारों के लिए न हो।
कर्मचारियों का विद्रोह और अमेरिका में बॉयकॉट
ओपनएआई के इस फैसले ने कंपनी के भीतर ही गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। गूगल (Google) और ओपनएआई के सैकड़ों कर्मचारियों ने एक खुला पत्र लिखकर इसका विरोध किया है।
इस विरोध का असर यह हुआ कि अमेरिका में लोगों ने तेजी से अपने मोबाइल से ChatGPT हटाना शुरू कर दिया है। इससे एंथ्रोपिक का क्लाउड वहां नंबर-1 बन गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि जिस तकनीक को मानवता की भलाई के लिए बनाया गया था, उसे युद्ध के मैदान में उतारना खतरनाक साबित हो सकता है।
यह विवाद इतना गंभीर क्यों है?
दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग प्रोजेक्ट मेवेन (Project Maven) जैसे प्रोग्राम्स पर काम कर रहा है। यह प्रोग्राम सैटेलाइट और ड्रोन डेटा का विश्लेषण करके संभावित लक्ष्यों (Potential Targets) की पहचान करता है। चूंकि भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में डेटा का यह विशाल भंडार अमेरिकी मिलिट्री इंटेलिजेंस के विश्लेषण को और अधिक सटीक बनाने में सहायक हो सकता है।
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