बच्चों का मोटापा घटाने के लिए दवा या सर्जरी? Childhood obesity पर WHO ने जारी की नई गाइडलाइन, जानिए क्या है सलाह
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 08, 2026, 18:18 IST
WHO की बच्चों में मोटापे पर बड़ी चेतावनी, दवा से कम नहीं होगा मोटापा?
बच्चों में बढ़ता मोटापा अब बड़ी स्वास्थ्य चिंता बन गया है। WHO के मुताबिक 9 साल से छोटे बच्चों को वजन घटाने की दवा या बैरिएट्रिक सर्जरी की सलाह नहीं दी गई है। किशोरों (Adolescents)में भी इनका इस्तेमाल तय शर्तों के साथ ही किया जा सकता है। 1990 के बाद से बच्चों में मोटापा चार गुना बढ़ चुका है। भारत में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
समझें क्या है पूरा मामला
- डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को बच्चों और किशोरों के मोटापे पर नई गाइडलाइन जारी की है।
- इसमें 9 साल से कम उम्र में दवा और सर्जरी से बचने की सलाह दी गई है।
- 10 से 19 साल के किशोरों (Adolescents) में इनका इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए।
- इलाज की नींव सेहतमंद खानपान, कसरत और व्यवहार में बदलाव है।
- भारत में भी बच्चों में मोटापे के मामले तेजी से ज्यादा हो रहे हैं।
बच्चों में मोटापा : क्या कहते हैं नंबर?
इनमें 5 से 9 साल के 7 करोड बच्चे थे। 10 से 19 साल के किशोरों की संख्या 10 करोड थी। सोचिए, इन बच्चों को आगे कितनी दिक्कतें हो सकती हैं?
मोटापे का इलाज दवा नहीं, आदतें
बच्चों और किशोरों के लिए मोटापे की देखभाल की नींव दवा या सर्जरी नहीं है। नींव है ऐसे व्यापक सहयोग तक पहुंच, जो सेहतमंद खानपान, शारीरिक गतिविधि और टिकाऊ व्यवहार बदलाव को मुमकिन बनाए।
By: डॉ. लुज मारिया डे रेगिल, डायरेक्टर, पोषण और खाद्य सुरक्षा विभाग, डब्ल्यूएचओ
बच्चों में मोटापे की दवा पर क्या राय?
सेमाग्लूटाइड और जीएलपी-1 पर डॉक्टर क्या बोले?
सर्जरी से बच्चों की ग्रोथ पर क्या असर?
भारत में बच्चों का मोटापा , हाल क्या?
एनएफएचएस (NFHS – National Family Health Survey) का डेटा भी यही कहानी कहता है। 5 साल से कम के बच्चों में ओवरवेट और मोटापा 127 फीसदी उछला। यह दौर 2005-06 से 2019-21 का है। किशोरियों में 125 फीसदी और किशोरों में 288 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ।
मोटापे के साथ आ रही दूसरी बीमारियां
ज्यादातर बच्चे दूसरी बीमारियों के साथ आते हैं, जैसे फैटी लिवर, प्री-डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल। अब तक इलाज के विकल्प सीमित थे। लेकिन अब 12 साल से ऊपर के बच्चों में सेमाग्लूटाइड के इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है। फिर भी इसे सिर्फ उन बच्चों तक सीमित रखना चाहिए, जिन्हें गंभीर मोटापा है और जटिलताएं भी हैं।
By: डॉ. अनुराग बाजपेयी, अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंड एडोलसेंट एंडोक्रिनोलॉजी (आईएसपीएई – ISPAE)
बचपन का मोटापा और आगे की बीमारियां
मोटापे से जूझ रहे बच्चों और किशोरों को जीवनशैली की बीमारियां बहुत पहले हो सकती हैं। उन्हें इनकी जटिलताओं के साथ ज्यादा लंबा जीवन गुजारना होता है। अब हम जानते हैं कि वजन घटाने से उनकी उम्र लंबी हो सकती है। इसीलिए शुरुआती सालों में हमें सख्ती से कदम उठाने होंगे।
By: डॉ. ज्योतिदेव केशवदेव, चेयरपर्सन, ज्योतिदेव्स डायबिटीज एंड रिसर्च सेंटर
FAQ
- डब्ल्यूएचओ द्वारा बच्चों और किशोरों के मोटापे के इलाज के लिए क्या नई गाइडलाइन जारी की गई है?
डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी है कि 9 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दवा और सर्जरी का उपयोग नहीं करना चाहिए, जबकि 10 से 19 साल के किशोरों में इनका उपयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए। मोटापे का इलाज स्वस्थ खानपान, कसरत और व्यवहार में बदलाव पर आधारित होना चाहिए। - भारत में बच्चों के मोटापे की स्थिति क्या है?
भारत में बच्चों के मोटापे की स्थिति चिंताजनक है, जहां मोटापे की दर 5 से 19 साल के बच्चों में तेजी से बढ़ रही है। 2030 तक अनुमान है कि भारत में 2 करोड़ 70 लाख बच्चे-किशोर मोटापे से प्रभावित होंगे। - क्या बच्चों में मोटापे के इलाज के लिए दवा का उपयोग किया जा सकता है?
9 साल से छोटे बच्चों के लिए दवा का उपयोग सख्ती से मना किया गया है, जबकि किशोरों के लिए, दवा का उपयोग केवल गंभीर मोटापे और जीवनशैली संबंधी बीमारियों के मामले में ही किया जा सकता है।
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