कौन हैं आईएएस पुलकित गर्ग जिन्होंने आंगनबाड़ी में कराया बेटी का एडमिशन? बने मिसाल

Kaushiki | Feb 03, 2026, 12:42 IST
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आईएएस पुलकित गर्ग ने अपनी 3 साल की बेटी का एडमिशन आंगनबाड़ी में कराया है। उन्होंने सरकारी शिक्षा पर भरोसा जताते हुए समाज को एक प्रेरणा दी...

Motivation Story: आज के दौर में जहां लोग अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट स्कूलों में भेजने को ही कामयाबी की पहली सीढ़ी मानते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से एक दिल जीत लेने वाली खबर सामने आई है।



यहां के जिलाधिकारीआईएएस पुलकित गर्ग ने समाज की पुरानी सोच को तोड़ दिया है। पुलकित गर्ग नें अपनी 3 साल की बेटी का एडमिशन एक आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है।



यह कदम सरकारी शिक्षा सिस्टम पर एक बड़ा भरोसा दिखाता है। साथ ही, आम लोगों के लिए एक शानदार मोटिवेशन भी है। जब जिले का सबसे बड़ा अफसर अपनी संतान को सरकारी स्कूल में बैठाता है, तो पूरी व्यवस्था की इज्जत अपने आप बढ़ जाती है।



यह पहल लोगों के लिए एक बड़ा उदाहरण है। यह साबित करती है कि व्यवस्था में सुधार सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि खुद उदाहरण पेश करके आता है।



आईएएस पुलकित गर्ग की अपील

आईएएस पुलकित गर्ग का मानना है कि बच्चों के शुरुआती सालों में उन्हें एक सुरक्षित माहौल और अच्छे संस्कारों की जरूरत होती है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों को खेल-खेल में सीखने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म दे रहे हैं।



आईएएस पुलकित गर्ग ने इस फैसले के पीछे की वजह बहुत ही सीधी और सरल भाषा में समझाई। उन्होंने कहा कि अगर एक आईएएस अधिकारी अपनी बेटी को सरकारी संस्थान में पढ़ा सकता है, तो आम माता-पिता को संकोच क्यों होना चाहिए?



उनका मानना है कि अब सरकारी स्कूलों की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। अब यहां कोई रिसोर्सेज की कमी नहीं है। शिक्षा की क्वालिटी में भी काफी सुधार हुआ है। उन्होंने ग्रामीणों और अधिकारियों से अपील की है कि वे प्राइवेट स्कूलों की भारी फीस और दिखावे से बाहर निकलें।



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आईएएस पुलकित गर्ग कौन हैं

पुलकित गर्ग 2016 बैच के आईएएस अफसर हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। चित्रकूट के डीएम बनने से पहले वे वाराणसी डेवलपमेंट अथॉरिटी में वाइस चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। पुलकित गर्ग ने जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कुछ शानदार काम किए हैं।



महज दो महीनों में उन्होंने 15 हजार से ज्यादा वाटर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स किए, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।



बतौर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, पुलकित की चित्रकूट में ये पहली पोस्टिंग है। सिर्फ 4 महीने के छोटे से समय में उन्होंने पानी बचाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उनकी पत्नी चारु भी कलेक्ट्रेट में भारतीय स्टेट बैंक में काम करती हैं।



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समाज के लिए एक पावरफुल मैसेज

स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएम के इस फैसले से सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा। अक्सर लोग सोचते हैं कि सरकारी स्कूल केवल गरीबों के लिए होते हैं। लेकिन इस सोच को अब ब्रेक लग गया है।



जब बड़े अधिकारी खुद इस सिस्टम का हिस्सा बनते हैं, तो स्कूल के स्टाफ और शिक्षकों का मनोबल भी बढ़ता है। ये पहल आने वाले समय में सरकारी शिक्षा की तस्वीर बदलने के लिए एक नींव का पत्थर साबित हो सकती है। चित्रकूट की ये कहानी पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुकी है।



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तन्वी ने भी पेश किया था ऐसा ही मिसाल

इससे पहले भी खंडवा की कलेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल ने भी ऐसा ही मिसाल पेश किया था। उन्होंने अपनी 14 माह की बेटी का दाखिला सरकारी आंगनवाड़ी में कराया। उनके पति डॉ. पंकज जैन (IAS) ने भी कटनी कलेक्टर रहते हुए बेटी को आंगनवाड़ी भेजा था।



इसके लिए राज्यपाल से लेकर सभी लोगों ने उनकी प्रशंसा की थी। इस कदम से सिस्टम पर जनता का भरोसा बढ़ा है और जिले की आंगनवाड़ियों की व्यवस्थाएं भी सुधरने लगी हैं। यह फैसला वीआईपी कल्चर को छोड़कर सरकारी सुविधाओं को अपनाने का एक प्रेरणादायक संदेश है।



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