CJP के प्रोटेस्ट से पहले छावनी में तब्दील हुआ दिल्ली, जंतर-मंतर पर अघोषित लॉकडाउन!
पुलिस हर होटल में जाकर पड़ताल कर रही है कि बाहर से कौन-कौन आया है? किसलिए आया है? कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों को तो ट्रेनों से उतार लिया गया।
क्या होगा आंदोलन?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रोटेस्ट का ऐलान किया है। लेकिन दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की तैयारियों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सीजेपी का आंदोलन आसान नहीं होने वाला। पुलिस ने जंतर-मंतर के पास भारी बैरिकेडिंग की है। किसी को भी मौके पर जुटने नहीं दिया जा रहा है।
मीडिया को हिदायत
जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पहुंचने वाले सभी रास्तों पर लाउडस्पीकर और कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस मीडिया को भी मौके पर जमा नहीं होने दे रही है। मीडिया को प्रदर्शनकारियों से दूर रहने को कहा जा रहा है। जंतर-मंतर पर BNS की धारा 163 लगाई गई है।
9 अक्टूबर की शाम जंतर-मंतर पर कुछ प्रदर्शनकारी जमा हुए, जिन्हें पुलिस ने खदेड़ दिया। पूरी दिल्ली के बाजार भी पुलिस बंद करवा रही है। दूसरी तरफ CJP समर्थक सरकार को ही चेतावनी दे रहे हैं। द सूत्र से बातचीत में कुछ युवाओं ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा। ज्ञानेश कुमार अगर इस्तीफा नहीं देते और प्रदर्शनकारियों को रोकते हैं, तो जहां रोका जाएगा, वहीं आंदोलन होगा।
पड़ोसी राज्यों से बुलाई पुलिस
केंद्र सरकार इस आंदोलन को किसी भी कीमत पर होने नहीं देना चाहती। सरकार की तैयारी कितनी है, यह इससे पता चलता है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी भारी पुलिस बल बुलाया गया है। दिल्ली की सड़कों पर पुलिस की गाड़ियां, वैन और सीआरपीएफ की बटालियन ही घूमती नजर आ रही हैं।
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में युवाओं को हिरासत में रखने का आरोप
दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले भोपाल में भी विरोध शुरू हो गया है। दिल्ली जा रहे युवाओं को हिरासत में रखने के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस को अस्थायी हिरासत केंद्र बनाया गया है। वहां दिल्ली जा रहे युवाओं को रखा गया है।
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार और जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। उन्होंने हिरासत में रखे गए युवाओं से मुलाकात कराने की मांग की। साथ ही सभी को तत्काल रिहा करने को कहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
रवि परमार बोले- युवाओं की आवाज दबा रही सरकार
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। दिल्ली जा रहे युवाओं को भोपाल और इटारसी सहित कई जगह रोका जा रहा है।
परमार ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज दबाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि वोट चोरों को बचाने के लिए युवाओं को दिल्ली जाने से रोका जा रहा है। सरकार चाहे जितने प्रतिबंध लगा ले, युवा अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
अक्षय तोमर ने युवाओं की रिहाई की मांग की
NSUI के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। युवाओं को हिरासत में रखकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
तोमर ने हिरासत में रखे गए युवाओं को तत्काल रिहा करने की मांग की। साथ ही प्रशासन से उन्हें रोके जाने का कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा।
NSUI ने चेतावनी दी कि युवाओं के अधिकारों का हनन जारी रहा तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा।
इस प्रदर्शन में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी इकाई के आशीष शर्मा, विकास ठाकुर और प्रतीक यादव शामिल हुए। इनके अलावा जिला उपाध्यक्ष अमित हाटिया, अभिषेक द्विवेदी, राजवीर सिंह, हर्ष पटेल और निशांत ठाकुर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राष्ट्रपति से मिला INDIA गठबंधन
इन सब बातों के बीच INDIA गठबंधन के सांसद राष्ट्रपति से मिले हैं। विपक्ष लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहा है। विपक्षी सांसदों ने पिछले चार दिनों में यह तीसरी बार मार्च निकाला है। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े हैं।
दिल्ली में अघोषित लॉकडाउन जैसे हालात पर अभिजीत दीपके ने भी तंज कसा है। दीपके ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि तानाशाह तय की गई जगह पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की इजाजत देने के बजाय पूरी राष्ट्रीय राजधानी को बंद करना और लाखों नागरिकों को परेशानी में डालना ज्यादा पसंद करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदियों पर क्या कहा?
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो और रेल सेवाओं पर पाबंदियों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अदालत ने यात्रियों को होने वाली परेशानी पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि नियम लागू किए जा सकते हैं, लेकिन सब कुछ बंद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों पर दोबारा विचार करने को भी कहा है।
धारा 163 क्या है और इसका क्या असर होता है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकता है। इसके जरिए किसी इलाके में लोगों के जुटने या कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, हर आदेश में पाबंदियों का दायरा अलग हो सकता है। इसलिए जंतर-मंतर पर कितने लोगों के जुटने पर रोक है और किन गतिविधियों की अनुमति नहीं है, यह संबंधित आदेश से स्पष्ट होगा।
अब 10 अक्टूबर को क्या होगा?
CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन (Jantar Mantar Protest) करने का ऐलान किया है। वहीं, पुलिस की तैयारियों से प्रदर्शनकारियों के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं। CJP समर्थकों का कहना है कि दिल्ली पहुंचने से रोकने पर वे उसी जगह आंदोलन करेंगे। ऐसे में अब सवाल है कि क्या प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक पहुंच पाएंगे? क्या पुलिस उन्हें प्रदर्शन की अनुमति देगी? और क्या परिवहन पर लगी पाबंदियों में बदलाव होगा? इन सवालों के जवाब 10 अक्टूबर को सामने आ सकते हैं।