विधानसभा चुनाव 2026: कांग्रेस की केरल के अलावा चार राज्यों में हार, जानें पूरा रिपोर्ट कार्ड

Jitendra Shrivastava | May 04, 2026, 18:27 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। केरल में UDF गठबंधन की बड़ी जीत, बंगाल में शून्य सीटें—जानिए पांचों राज्यों का पूरा विश्लेषण।

News In Short

  • केरल में UDF ने 74+ सीटें जीतकर सत्ता हासिल की।
  • बंगाल में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिल सकी।
  • असम में 41% वोट के बाद भी केवल 29 सीटें मिलीं।
  • तमिलनाडु में DMK गठबंधन से कांग्रेस को 28 सीटें।
  • पुदुचेरी में 7 सीटें, NDA ने बहुमत से सत्ता बनाई।

News In Detail

vidhansabha election 2026 :2026 के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections 2026) में कांग्रेस (Congress) का प्रदर्शन पांच राज्यों में मिला-जुला रहा। केरल में UDF गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि पश्चिम बंगाल में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। असम, तमिलनाडु और पुदुचेरी में भी नतीजे उम्मीद से कम रहे। इस लेख में पांचों राज्यों की हार-जीत के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।



पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का हाल

2026 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2026) में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के लिए सबसे निराशाजनक राज्य रहा। 294 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी।



BJP ने 194 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि TMC+ को 94 सीटें मिलीं। कांग्रेस का वोट शेयर एक प्रतिशत से भी कम रहा। 2021 की तरह 2026 में भी पार्टी का खाता नहीं खुला। यह पूर्वी भारत में कांग्रेस की गहरी कमजोरी को दर्शाता है।



TMC-BJP ध्रुवीकरण बना हार की वजह

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की हार (Congress Defeat West Bengal) के पीछे TMC और BJP के बीच तीखे वोट ध्रुवीकरण की भूमिका सबसे बड़ी रही। मुस्लिम वोट पूरी तरह TMC की झोली में गए।



पार्टी ने गठबंधन बनाने की बजाय अकेले चुनाव लड़ा, जिससे वोट बिखर गए। आंतरिक कलह और कमजोर कैंपेनिंग ने हार को और गहरा किया। ओपिनियन पोल्स ने पहले ही BJP को 140 से अधिक सीटें दी थीं। कांग्रेस ने इन संकेतों को नजरअंदाज किया और रणनीति नहीं बदली।



असम में वोट शेयर अच्छा, सीटें कम

असम विधानसभा चुनाव 2026 (Assam Assembly Election 2026) में कांग्रेस गठबंधन को 41.2% वोट शेयर मिला। लेकिन सीटों में पार्टी केवल 28-29 पर सिमट गई। BJP+ ने 84-95 सीटें जीतकर बहुमत बनाए रखा।



हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने विकास एजेंडे को प्रभावी ढंग से भुनाया। गौरव गोगोई जैसे बड़े नेता भी अपनी सीट नहीं बचा सके। बोडो और मुस्लिम वोटों का विभाजन कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हुआ।



असम में गठबंधन रणनीति की चूक

असम में कांग्रेस की हार के कारण (Reasons for Congress Loss Assam) आंतरिक और बाहरी दोनों थे। 41% वोट शेयर के बावजूद सीटों की कमी दिखाती है कि वोट बड़े पैमाने पर 'वेस्ट' हो गए। गठबंधन में सीट शेयरिंग असंतुलित रही, जो पार्टी को महंगी पड़ी।



हिमंता सरमा की मजबूत छवि के सामने कांग्रेस का नेतृत्व कमजोर दिखा। आंतरिक विद्रोह और उम्मीदवार चयन में गलतियों ने भी भारी नुकसान किया। 2027 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2027) के लिए यह बड़ा सबक है।



2026 में कांग्रेस का प्रदर्शन...

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केरल में UDF की ऐतिहासिक वापसी

केरल विधानसभा चुनाव 2026 (Kerala Assembly Election 2026) में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF गठबंधन ने 74 से अधिक सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। LDF को केवल 33 और NDA को 4 सीटें मिलीं। यह 10 साल बाद केरल में कांग्रेस की सत्ता में वापसी है।



एग्जिट पोल्स ने UDF को 69 सीटें दी थीं, पर असली नतीजे और बेहतर रहे। UDF के तहत कांग्रेस ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा और 20 विधायकों को दोबारा मैदान में उतारा। यह दक्षिण भारत में पार्टी की सबसे बड़ी और यादगार जीत बनी।



केरल जीत के पीछे ये रहे कारण

केरल में कांग्रेस की जीत (Congress Win Kerala 2026) के पीछे कई ठोस और स्पष्ट कारण थे। LDF सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी मजबूत थी और जनता बदलाव चाहती थी। UDF की एकजुटता ने वोटों को बिखरने से बचाया।



कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। अनुभवी नेताओं की रणनीति और युवा मतदाताओं का समर्थन निर्णायक रहा। यह जीत 2027 के चुनाव के लिए पार्टी को नई उम्मीद और ऊर्जा देती है।



तमिलनाडु में गठबंधन की भूमिका

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 (Tamil Nadu Assembly Election 2026) में कांग्रेस को DMK गठबंधन में 28 सीटें मिलीं। यह 2021 की 18 सीटों से बेहतर जरूर था, पर पार्टी का वोट शेयर केवल 5% रहा।



MK स्टालिन के नेतृत्व में DMK ने गठबंधन को मजबूत रखा। कांग्रेस ने सीट शेयरिंग में समझौता किया, जिससे पार्टी की स्वतंत्र पहचान कमजोर हुई। NDA को बड़ी चुनौती नहीं मिल सकी और एंटी-इनकंबेंसी वोट बिखरे। यह स्थिर लेकिन संतोषजनक नहीं कहा जा सकने वाला प्रदर्शन है।



तमिलनाडु में DMK पर निर्भरता

तमिलनाडु में कांग्रेस की स्थिति (Congress Tamil Nadu Performance) गठबंधन पर पूरी तरह निर्भर होने के कारण चिंताजनक है। पार्टी का अपना वोट बेस मात्र 5% है, जो स्वतंत्र रूप से सीटें जीतने में असमर्थ बनाता है।



स्थानीय स्तर पर संगठन बेहद कमजोर है और जनाधार घटता जा रहा है। DMK पर लंबे समय की निर्भरता पार्टी की अपनी पहचान को धीरे-धीरे मिटा रही है। एंटी-इनकंबेंसी वोट का फायदा कांग्रेस नहीं उठा सकी। यह लंबे समय में पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।



पुदुचेरी में मामूली सुधार, NDA मजबूत

पुदुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 (Puducherry Assembly Election 2026) में कांग्रेस+ को 7 सीटें मिलीं। यह 2021 की 2 सीटों से बेहतर जरूर है, लेकिन AINRC+BJP ने बहुमत हासिल कर सत्ता बनाए रखी।



कांग्रेस ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा, पर सफलता सीमित रही। 2016 में 15 सीटें जीतने वाली पार्टी का लगातार गिरता जनाधार गंभीर चिंता का विषय है। DMK के साथ गठबंधन में सीट शेयरिंग विवाद नुकसानदायक रहा। नरेशन रंगास्वामी जैसे नेताओं के मुकाबले कांग्रेस का संगठन कमजोर साबित हुआ।



पांच राज्यों का पूरा हिसाब-किताब

2026 विधानसभा चुनाव परिणाम (2026 Assembly Election Results) में पांचों राज्यों की 824 सीटों पर कांग्रेस का कुल प्रदर्शन अनुमानित 137 सीटें रहा। पश्चिम बंगाल में 0, असम में 28-29, केरल में 74+, तमिलनाडु में 28 और पुदुचेरी में 7 सीटें मिलीं।



केरल की जीत ने पार्टी को संजीवनी जरूर दी, लेकिन अन्य राज्यों के नतीजे चिंताजनक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। 2025 में दिल्ली और बिहार की हार का असर भी पार्टी के मनोबल पर दिखा।



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बंगाल और असम की हार एक सबक

2026 के विधानसभा चुनाव (2026 Vidhansabha Chunav) कांग्रेस के लिए मिले-जुले संदेश लेकर आए हैं। केरल की जीत बताती है कि एकजुट गठबंधन और स्थानीय मुद्दे चुनाव जिताते हैं। बंगाल और असम की हार यह सबक देती है कि अकेले या कमजोर रणनीति से चुनाव नहीं जीता जा सकता।



संगठनात्मक कमजोरी, गठबंधन की असंगत नीति और राष्ट्रीय नेतृत्व पर सवाल पार्टी की बड़ी चुनौतियां हैं। 2027 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2027) में दक्षिण भारत की मजबूती पार्टी का आधार बनेगी। उत्तर और पूर्व भारत में संगठन तुरंत मजबूत करना कांग्रेस की जरूरत है।



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