चिपको आंदोलन के बीच उत्तराखंड सरकार ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक

Sandeep Kumar | Jul 19, 2026, 19:50 IST
उत्तराखंड सरकार ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक
देहरादून-ऋषिकेश हाइवे में पेड़ कटाई के बाद शुरू हुए चिपको आंदोलन के बीच उत्तराखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने केंद्र से बातचीत कर पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • देहरादून-ऋषिकेश सिक्स लेन परियोजना चल रही है।
  • भनियावाला-ऋषिकेश के बीच पेड़ काटे जा रहे थे।
  • सरकार ने केंद्र से बातचीत कर रोक लगा दी है।
  • कटते जंगल से वन्यजीव संकट की तस्वीरें आईं।
  • जंगल संरक्षण को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी।

क्या है पूरा प्रोजेक्ट

देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एनएचएआई (NHAI – National Highways Authority of India) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है। इस पर उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी जरूरी वैधानिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों का पालन करते हुए काम चल रहा था। भनियावाला और ऋषिकेश के बीच सड़क को चौड़ा किया जाना है, ताकि यातायात का दबाव कम हो सके।



4 हजार पेड़ों पर संकट

इसी चौड़ीकरण के लिए रास्ते में आने वाले करीब 4 हजार पेड़ों को काटा जा रहा था। पिछले कुछ दिनों से कई नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने इस कटान का विरोध किया। उनकी चिंताओं और सुझावों को अब गंभीरता से लिया गया है।



सरकार ने कटाई पर रोक लगाई

चिपको आंदोलन के बाद राज्य सरकार हरकत में आई। सरकार ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सभी पक्षों से दोबारा विस्तृत संवाद करने को कहा गया है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की राय भी ली जाएगी। विशेषज्ञों से भी इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।



वन्यजीव के लिए इंतजाम

परियोजना में वन्यजीव संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। इसमें करीब 4.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास बनाया जा रहा है। छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए अलग से कल्वट जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं। इसका मकसद इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव कम करना और सड़क हादसों में वन्यजीवों की मौत रोकना है, जो इस रास्ते पर अक्सर देखने को मिलता है।



ऋषिकेश में पेड़ों की कटाई

ऋषिकेश क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का काम जारी है। देहरादून से ऋषिकेश जाने वाली भानियावाला रोड को चौड़ा किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 4 हजार पेड़ों को काटने की योजना है। पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध शुरू कर दिया है।



लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है। लेकिन पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण पर असर पड़ेगा।



पर्यावरण प्रेमियों का विरोध

पेड़ों की कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों ने मोर्चा खोल दिया है। कई संगठन सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। लोग पेड़ों की पूजा कर रहे हैं। कुछ लोग पेड़ों से चिपककर विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड में पहले भी चिपको आंदोलन पर्यावरण संरक्षण का बड़ा उदाहरण रहा है। वर्तमान विरोध को भी लोग उसी भावना से जोड़ रहे हैं।



चौड़ीकरण और पर्यावरण बहस

सड़क चौड़ीकरण किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी माना जाता है। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर हो सकती है। लेकिन बड़े निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों की कटाई के साथ उचित भरपाई योजना भी जरूरी है। नए पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है।



सैकड़ों पेड़ कट चुके

ऋषिकेश-देहरादून रोड पर सात मोड़ के पास पेड़ कटाई का काम शुरू हुआ है। जानकारी के अनुसार अब तक सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं। इससे स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों में नाराजगी है।



चिपको आंदोलन क्या है ?

चिपको आंदोलन 1970 के दशक में शुरू हुआ था। यह उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र का पर्यावरण आंदोलन था। ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई का विरोध किया था। महिलाएं पेड़ों से चिपककर उन्हें बचाने आगे आई थीं। उनका उद्देश्य जंगलों की रक्षा करना था।



चिपको आंदोलन नाम खेजरी गांव की घटना से जुड़ा माना जाता है। वहां महिलाओं ने पेड़ों को बचाने के लिए बलिदान दिया था। इस आंदोलन को सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट का समर्थन मिला। धीरे-धीरे यह आंदोलन जनआंदोलन बन गया। लोगों ने एकजुट होकर जंगलों की रक्षा की मांग उठाई। इस आंदोलन से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली।



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