26 मार्च का इतिहास: चिपको आंदोलन, जब पेड़ों को बचाने के लिए ढाल बन गईं पहाड़ की बेटियां
Kaushiki | Mar 26, 2026, 08:00 IST
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1974 में उत्तराखंड के रेणी गाँव से चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी। गौरा देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने पेड़ों को चिपककर कटने से बचाया था। चिपको आंदोलन 1974 की पूरी कहानी यहां पढ़ें...
आज के दिन की कहानी: साल 1974 की वो सुबह देवभूमि उत्तराखंड के रेणी गांव के लिए कोई साधारण सुबह नहीं थी। पुरुषों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर जब सरकारी ठेकेदार कुल्हाड़ियों के साथ जंगलों को तबाह करने पहुंचे। तब उनके सामने गौरा देवी के नेतृत्व में गांव की जांबाज महिलाओं की एक अटूट दीवार खड़ी हो गई।
पेड़ काटने से पहले हमें काटो के निडर जयघोष। इसके साथ शुरू हुआ ये चिपको आंदोलन महज। ये एक विरोध नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के गहरे प्रेम की एक ऐसी अमर गाथा बन गया। इसने पूरी दुनिया को अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण का नया रास्ता दिखाया।
![चिपको आंदोलन: आधी सदी के बाद किस हाल में हैं गौरा देवी की सहेलियां?]()
तारीख थी 26 मार्च और साल था 1974 का। चमोली जिले के रेणी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। गांव के पुरुष किसी काम से शहर गए हुए थे। इसी मौके का फायदा उठाकर ठेकेदार जंगल पहुंच गए थे।
तभी 50 साल की गौरा देवी ने उन्हें देख लिया। उन्होंने तुरंत गांव की अन्य महिलाओं को इकट्ठा किया था। गौरा देवी ने निडर होकर कुल्हाड़ी वालों का रास्ता रोका।
![गौरा देवी: चिपको आंदोलन की जननी - हिमालयन बज़]()
गौरा देवी और 27 महिलाओं ने अद्भुत साहस दिखाया था। वे पेड़ों से चिपक गईं और ठेकेदारों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि पेड़ काटने के लिए हमें मारना होगा।
कुल्हाड़ी चलाने वाले मजदूर महिलाओं का यह साहस देख सहम गए। घंटों तक यह टकराव जंगल के बीच चलता रहा था। आखिर में ठेकेदार को अपनी हार माननी ही पड़ी थी। इस अहिंसक विरोध ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था।
![चिपको आंदोलन के 50 साल: ज़िंदगी बदल जाने की कहानी, उत्तराखंड के ग्रामीणों की ज़ुबानी]()
इस आंदोलन को बड़े नेताओं ने नई दिशा दी थी। सुंदरलाल बहुगुणा ने गांवों में पैदल यात्राएं शुरू की थीं। उन्होंने पारिस्थितिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है का नारा दिया था। चंडी प्रसाद भट्ट ने भी लोगों को बहुत जागरूक किया।
इन दिग्गजों ने इस लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। इनके प्रयासों से ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी प्रभावित हुईं। सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में पेड़ काटने पर रोक लगाई।
![चिपको आंदोलन वर्षगांठ: गौरा देवी के बुलंद हौसलों को बंदूकें भी नहीं डिगा सकी, पूरी रात पेड़ों से चिपकी रही महिलाएं]()
ये सिर्फ पेड़ बचाने की एक छोटी लड़ाई नहीं थी। ये जल, जंगल और जमीन बचाने का बड़ा संकल्प था। ग्रामीणों ने साबित किया कि प्रकृति ही जीवन का आधार है।
आंदोलन की वजह से 15 साल तक कटाई रुकी रही। इससे पहाड़ों में होने वाला भूस्खलन काफी हद तक थमा। यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बना। आज भी पर्यावरण प्रेमी इस गौरवशाली इतिहास को याद करते हैं।
![जन्म शताब्दी विशेष:आपदाओं का संकट, याद आने लगा गौरा देवी का चिपको आंदोलन - Gaura Devi Birth Centenary Special: Crisis Looms Large, Recalling Gaura Devi Chipko Movement - Amar Ujala Hindi News]()
चिपको आंदोलन (भारतीय चिपको आंदोलन) ने दुनिया को अहिंसा का रास्ता दिखाया। अमेरिका और यूरोप में भी इसके जैसे आंदोलन हुए। इस आंदोलन को राइट लाइवलीहुड जैसा सम्मान मिला था।
इसने पर्यावरण नीति में स्थानीय लोगों की भूमिका तय की। अब दुनिया सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बातें करने लगी है। गौरा देवी आज भी पर्यावरण रक्षकों की प्रेरणा बनी हुई हैं। यह जीत भारत के पर्यावरण इतिहास का स्वर्ण अक्षत है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 26 मार्च का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 26 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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पेड़ काटने से पहले हमें काटो के निडर जयघोष। इसके साथ शुरू हुआ ये चिपको आंदोलन महज। ये एक विरोध नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के गहरे प्रेम की एक ऐसी अमर गाथा बन गया। इसने पूरी दुनिया को अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण का नया रास्ता दिखाया।
चिपको आंदोलन: आधी सदी के बाद किस हाल में हैं गौरा देवी की सहेलियां?
रेणी गांव की वो ऐतिहासिक सुबह
तभी 50 साल की गौरा देवी ने उन्हें देख लिया। उन्होंने तुरंत गांव की अन्य महिलाओं को इकट्ठा किया था। गौरा देवी ने निडर होकर कुल्हाड़ी वालों का रास्ता रोका।
गौरा देवी: चिपको आंदोलन की जननी - हिमालयन बज़
पेड़ काटने से पहले हमें काटो का नारा
कुल्हाड़ी चलाने वाले मजदूर महिलाओं का यह साहस देख सहम गए। घंटों तक यह टकराव जंगल के बीच चलता रहा था। आखिर में ठेकेदार को अपनी हार माननी ही पड़ी थी। इस अहिंसक विरोध ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था।
चिपको आंदोलन के 50 साल: ज़िंदगी बदल जाने की कहानी, उत्तराखंड के ग्रामीणों की ज़ुबानी
सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट का योगदान
इन दिग्गजों ने इस लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। इनके प्रयासों से ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी प्रभावित हुईं। सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में पेड़ काटने पर रोक लगाई।
चिपको आंदोलन वर्षगांठ: गौरा देवी के बुलंद हौसलों को बंदूकें भी नहीं डिगा सकी, पूरी रात पेड़ों से चिपकी रही महिलाएं
चिपको आंदोलन का असली मकसद
आंदोलन की वजह से 15 साल तक कटाई रुकी रही। इससे पहाड़ों में होने वाला भूस्खलन काफी हद तक थमा। यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बना। आज भी पर्यावरण प्रेमी इस गौरवशाली इतिहास को याद करते हैं।
जन्म शताब्दी विशेष:आपदाओं का संकट, याद आने लगा गौरा देवी का चिपको आंदोलन - Gaura Devi Birth Centenary Special: Crisis Looms Large, Recalling Gaura Devi Chipko Movement - Amar Ujala Hindi News
विश्व स्तर पर चिपको आंदोलन की गूंज
इसने पर्यावरण नीति में स्थानीय लोगों की भूमिका तय की। अब दुनिया सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बातें करने लगी है। गौरा देवी आज भी पर्यावरण रक्षकों की प्रेरणा बनी हुई हैं। यह जीत भारत के पर्यावरण इतिहास का स्वर्ण अक्षत है।
Reference Links
- PIB - Evolution of Environment Movements in India
- Encyclopedia Britannica - Chipko Movement
- NCERT - Environmental Movements Overview
- Uttarakhand Government Official Portal - History
26 मार्च की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 26 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 590: बीजान्टिन सम्राट मौरिस ने अपने पुत्र थियोडोसियस को सह-सम्राट घोषित किया।
- 1169: महान योद्धा सलादीन को मिस्र के अमीर के रूप में नियुक्त किया गया।
- 1344: लंबी घेराबंदी के बाद मुस्लिम शहर अलगेकिरास ने कैस्टिल राज्य के सामने आत्मसमर्पण किया।
- 1351: फ्रांस और इंग्लैंड के बीच प्रसिद्ध 'तीस शूरवीरों का युद्ध' लड़ा गया।
- 1484: विलियम कैक्सटन ने 'ईसप की दंतकथाओं' का पहला अंग्रेजी अनुवाद छापा।
- 1770: जेम्स कुक और उनके दल ने न्यूजीलैंड के समुद्री चक्कर (Circumnavigation) को पूरा किया।
- 1780: ब्रिटेन में पहली बार रविवार के दिन अखबारों (ब्रिट गैजेट और संडे मॉनीटर) का प्रकाशन हुआ।
- 1812: वेनेजुएला के कराकास में भीषण भूकंप आया, जिसमें लगभग 20 हजार लोगों की जान गई।
- 1830: न्यूयॉर्क में 'बुक ऑफ मॉर्मन' का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ।
- 1845: दुनिया में पहली बार 'एडहेसिव मेडिकेटेड प्लास्टर' को पेटेंट मिला।
- 1885: कनाडा में लुईस रिएल के नेतृत्व में मेतिस लोगों ने उत्तर-पश्चिम विद्रोह शुरू किया।
- 1904: लंदन के हाइड पार्क में चीनी श्रमिकों के आयात के खिलाफ 80,000 लोगों ने प्रदर्शन किया।
- 1913: प्रथम बाल्कन युद्ध में बुल्गारियाई सेना ने एड्रियानोपल शहर पर कब्जा किया।
- 1917: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गाजा के पहले युद्ध में तुर्क सेना ने अंग्रेजों को हराया।
- 1943: एल्सी एस ओट्ट अमेरिकी 'वायुसेना पदक' पाने वाली पहली महिला बनीं।
- 1953: डॉ. जोनास साल्क ने पोलियो से बचाव के लिए दुनिया के पहले सफल टीके की घोषणा की।
- 1971: शेख मुजीबुर्रहमान ने पूर्वी पाकिस्तान को 'बांग्लादेश' के रूप में स्वतंत्र घोषित किया।
- 1973: लंदन स्टॉक एक्सचेंज के 200 साल के इतिहास में पहली बार महिलाओं की भर्ती हुई।
- 1973: अमेरिका के मशहूर टीवी ड्रामा 'द यंग एंड द रेस्टलेस' का पहला एपिसोड प्रसारित हुआ।
- 1978: जापान के नरीता एयरपोर्ट पर प्रदर्शनकारियों ने नियंत्रण टावर को भारी नुकसान पहुँचाया।
- 1979: मिस्र और इजरायल के बीच ऐतिहासिक शांति संधि हुई, जिससे दशकों पुराना युद्ध विराम हुआ।
- 1983: अमेरिका ने नेवादा रेगिस्तान में परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया।
- 1992: पूर्व हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन माइक टाइसन को दुष्कर्म के आरोप में 6 साल की सजा सुनाई गई।
- 1997: कैलिफोर्निया में पुलिस ने 'हेवेन गेट' पंथ के 39 सदस्यों के शव सामूहिक आत्महत्या की स्थिति में खोजे।
- 1999: डॉ. जैक केवोरियन को एक बीमार व्यक्ति की 'सहायता प्राप्त आत्महत्या' में हत्या का दोषी पाया गया।
- 2000: व्लादिमीर पुतिन पहली बार रूस के राष्ट्रपति के रूप में चुने गए।
- 2006: स्कॉटलैंड ने सार्वजनिक स्थानों जैसे बार और रेस्तरां में धूम्रपान पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया।
- 2011: फुकुशिमा हादसे के बाद टोक्यो की जल आपूर्ति में विकिरण का स्तर सामान्य स्तर पर लौटा।
- 2014: खगोलविदों ने ऊर्ट क्लाउड और कुइपर बेल्ट के बीच एक नए बौने ग्रह '2012 VP-113' की खोज की।
भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1974: चिपको आंदोलन कब हुआ था?,उत्तराखंड के रेणी गाव में गौरा देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की शुरुआत की।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
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