Ebola Virus: इबोला का नया स्ट्रेन, WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी किया घोषित

Manya Jain | May 18, 2026, 15:10 IST
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अफ्रीका में इबोला वायरस के नए बुंडीबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo Strain) ने चिंता बढ़ा दी है। इस वायरस का कोई टीका उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे लेकर आपातकाल घोषित किया है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस तेजी से फैल रहा है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है।
  • इबोला का नया बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बिना किसी इलाज के फैल रहा है।
  • भारत में अभी तक इबोला का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
  • एक्सपर्ट्स के अनुसार इबोला का संक्रमण हवा के जरिए नहीं फैलता है।

इबोला वायरस का नया स्ट्रेन बना मुसीबत

दुनिया अभी पुरानी महामारियों को भूली नहीं है कि एक नया खतरा आ गया है। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एक जानलेवा वायरस ने फिर पैर पसार रहा है। हालात को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बड़ा कदम उठाया है। संस्था ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है।



यह खतरनाक वायरस डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहा है। कांगो के इटुरी प्रांत में अब तक इसके 246 संदिग्ध मामले मिल चुके हैं। हलांकि भारत में भी लोग इस वायरस को लेकर टेंशन में हैं। लेकिन भारतीय डॉक्टरों ने कहना है कि हमें घबराने की जरूरत नहीं है। इस वायरस का फिलहाल भारत में असर नहीं है लेकिन हमें सर्तक रहने की जरूरत है।



भारत में क्या हैं स्थिति?

राहत की बात यह है कि भारत में अभी तक कोई मामला नहीं मिला है। देश के वरिष्ठ डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने इस पर महत्वपूर्ण बात कही है। उनके अनुसार भारत के लोगों को पैनिक करने की कोई जरूरत नहीं है।



यह वायरस केवल सीधे संपर्क से ही एक से दूसरे इंसान में जाता है। जब तक मरीज में लक्षण न दिखें वह संक्रमण नहीं फैला सकता। हमारा स्वास्थ्य मंत्रालय एयरपोर्ट और मेडिकल स्तर पर लगातार नजर रख रहा है।



खतरनाक है इबोला का नया बुंडीबुग्यो स्ट्रेन

कांगो के स्वास्थ्य मंत्री के एक बयान ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। उनके अनुसार इस बार जो खतरनाक स्ट्रेनलोगों को बीमार कर रहा है वह अलग है। इस नए बुंडीबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo Strain) की कोई वैक्सीन बाजार में मौजूद नहीं है। विज्ञान ने पहले जो भी दवाइयां बनाई थीं वे इस पर बेअसर हैं।



पुरानी वैक्सीन केवल जाइरे (Zaire) स्ट्रेन पर ही काम करती हैं। इलाज न होने से डॉक्टरों के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वे मरीजों को सिर्फ सपोर्टिव केयर यानी जरूरी ऑक्सीजन और पानी दे पा रहे हैं। इस नए स्ट्रेन में मरीजों की मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक देखी गई है।



अफ्रीका में भी घोषित हुई इमरजेंसी

सिर्फ WHO ही नहीं, बल्कि अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे इस वायरस को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने इसे 'महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHECS) घोषित कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, वहां इबोला का 'बुंडीबुग्यो स्ट्रेन' (Bundibugyo strain) फैल रहा है, जिसे बेहद संक्रामक और गंभीर प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।



इंसानों के बीच कैसे फैलता है यह वायरस?

यह मूल रूप से जानवरों से इंसानों में फैलने वाली एक खतरनाक बीमारी है। माना जाता है कि कुछ खास चमगादड़ इस वायरस को फैलाते हैं। जब कोई इंसान संक्रमित जानवर के खून के संपर्क में आता है तो बीमार हो जाता है।



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अच्छी बात यह है कि यह वायरस कोरोना की तरह हवा से नहीं फैलता है। यह मरीज के थूक, खून या उल्टी को सीधे छूने से ही फैलता है। इसलिए मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। जब तक मरीज में लक्षण न दिखें तब तक बीमारी नहीं फैलती।



शरीर में कैसे असर दिखाता है इबोला वायरस?

इबोला वायरस शरीर में जाने के बाद तुरंत असर नहीं दिखाता है। यह लक्षण दिखाने में 2 से 21 दिन का समय ले सकता है। शुरुआत में मरीज को तेज बुखार, बदन दर्द और गले में खराश होती है। ये लक्षण सामान्य मलेरिया या टाइफाइड जैसे लगते हैं।



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शुरुआती दौर में डॉक्टर भी अक्सर धोखा खा जाते हैं और जांच में देरी होती है। इसके बाद मरीज को उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द होने लगता है। गंभीर स्थिति में शरीर के अंदरूनी अंगों से खून भी बहने लगता है। इसका सीधा असर मरीज के दिमाग पर भी पड़ता है।



बचाव ही है सबसे बड़ा हथियार

इबोला का इतिहास पुराना और बहुत ही खौफनाक रहा है। साल 2013 से 2016 के बीच इसने अफ्रीका में 11 हजार लोगों की जान ली थी। आज जब इस नए स्ट्रेन का कोई इलाज नहीं है तो सावधानी ही एकमात्र रास्ता है।



कांगो के इन प्रभावित इलाकों में लोगों का आना-जाना बहुत अधिक है। युद्ध प्रभावित क्षेत्र होने के कारण वहां मेडिकल टीमें भी आसानी से नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में लोगों को जागरूक करना और मरीजों को तुरंत अलग रखना ही सबसे जरूरी कदम है।



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