नो सात फेरे, नो वैलिड शादी: मैरिज रजिस्ट्रेशन पर गुजरात हाईकोर्ट सख्त

Anjali Dwivedi | Jul 03, 2026, 12:04 IST
मैरिज रजिस्ट्रेशन पर गुजरात हाईकोर्ट सख्त
गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि सिर्फ मैरिज रजिस्ट्रेशन से हिंदू शादी वैध नहीं होगी। इसके लिए सप्तपदी (सात फेरे) जैसी रस्में जरूरी हैं। कोर्ट ने बिना रस्मों के हुई एक शादी को अमान्य घोषित कर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सिर्फ मैरिज रजिस्ट्रेशन से हिंदू शादी वैध नहीं मानी जा सकती है।
  • शादी को कानूनी मान्यता के लिए सप्तपदी (सात फेरे) अनिवार्य है।
  • यूके निवासी कौशल सोनार की बिना रस्मों वाली शादी अमान्य घोषित हुई।
  • हाईकोर्ट ने रस्में न होने पर फैमिली कोर्ट का पुराना फैसला पलट दिया।
  • कोर्ट ने कहा कि शादी कोई सौदा नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्था है।

गुजरात हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मैरिज रजिस्ट्रेशन से शादी वैध नहीं मानी जा सकती है। शादी को कानूनी रूप से सही मानने के लिए सप्तपदी (सात फेरे) जैसी रस्में निभाना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी सिर्फ गाने-बजाने या खाने-पीने का मौका नहीं है। यह एक पवित्र और गंभीर रिश्ता है।



यह फैसला जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आर टी वच्छानी की बेंच ने 23 जून को दिया। इसकी कॉपी सोमवार 29 जून को सार्वजनिक हुई। यह मामला ब्रिटेन में रहने वाले कौशल सोनार की याचिका से जुड़ा है।



मैरिज सर्टिफिकेट


शादी को लेकर था विवाद

सोनार ने कोर्ट को बताया कि वह यूके में रहते हैं। सोनार का कहना था कि उसे पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब एक महिला उसके माता-पिता के पास मैरिज सर्टिफिकेट लेकर पहुंची और खुद को उसकी कानूनी पत्नी बताने लगी।



सोनार ने तब अदालत में दावा किया कि उसने उस महिला के साथ कभी विवाह नहीं किया। दोनों कभी पति-पत्नी के रूप में साथ नहीं रहे और न ही उनके बीच किसी प्रकार की वैवाहिक रस्म हुई।



साथ ही सोनार ने यह भी आरोप लगाया कि वह महिला के पिता की कंपनी में काम करता था। उसी दौरान उसे पदोन्नति का लालच दिया गया या नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। इस तरह दबाव बनाकर विवाह संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और उसके साथ धोखाधड़ी की गई।



फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी अर्जी

सोनार ने पहले फैमिली कोर्ट में शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। लेकिन नवंबर 2025 में फैमिली कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद सोनार ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया।



हाईकोर्ट ने पाया कि सामने वाले पक्ष ने खुद फैमिली कोर्ट में यह स्वीकार किया था कि कोई शादी की रस्म नहीं हुई। दोनों कभी पति-पत्नी की तरह साथ नहीं रहे। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने इसे गलती माना और फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।



कोर्ट ने सात फेरे को बताया शादी की नींव

हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा सात का हवाला दिया। इस धारा में कहा गया है कि हिंदू शादी को रीति-रिवाजों के अनुसार ही पूरा माना जाता है। इनमें सात फेरे जैसी रस्में शामिल हैं।



कोर्ट ने कहा कि सप्तपदी में दुल्हा-दुल्हन पवित्र अग्नि के सामने सात फेरे लेते हैं। यह रस्म शादी को आध्यात्मिक, सामाजिक और कानूनी दर्जा देती है। कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कोई रस्म नहीं निभाई गई, इसलिए शादी की बुनियादी शर्त ही पूरी नहीं हुई।



हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शादी के महत्व पर भी बात की। कोर्ट ने कहा कि हिंदू परंपरा में पत्नी को पति की अर्धांगिनी माना जाता है। साथ ही उसकी अपनी अलग पहचान भी होती है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू कानून में शादी एक संस्कार मानी जाती है। यह नए परिवार की नींव रखती है।



इसी के साथ कोर्ट ने युवाओं से भी अपील की। कोर्ट ने कहा कि शादी का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। रिश्ते की पवित्रता को समझना जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि शादी कोई व्यावसायिक सौदा नहीं है। यह जीवनभर का सम्मानजनक और बराबरी का रिश्ता है।



क्या होगा असर

इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट होना काफी नहीं है। अगर असल में रस्में नहीं निभाई गईं, तो कानूनी तौर पर शादी को चुनौती दी जा सकती है। यह फैसला उन मामलों में मददगार होगा, जहां रजिस्ट्रेशन को लेकर विवाद रहता है।



FAQ

  1. क्या सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट से हिंदू शादी वैध हो जाती है?
    नहीं। गुजरात हाईकोर्ट के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ रस्में भी निभानी जरूरी हैं। सिर्फ कागजी प्रमाण काफी नहीं है।
  2. सप्तपदी क्या होती है?
    सप्तपदी में दुल्हा-दुल्हन पवित्र अग्नि के सामने सात फेरे लेते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम में इसे जरूरी रस्म माना गया है।

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