एमपी में 95 से ज्यादा गांवो में शादी पर बैन! अपने ही घर में फेरे नहीं ले पा रहीं बेटियां
Aman Vaishnav | Jun 30, 2026, 13:45 IST
एमपी में 95 से ज्यादा गांवो में शादी पर बैन
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के टकनेरी और करीब 100 अन्य गांवों में शादियों पर रोक लगी है। एक महिला की हत्या के बाद से ही गांव में शादियों पर एक तरह का अघोषित कर्फ्यू लगा हुआ है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के टकनेरी गांव में डेढ़ साल से बेटी की शादी अपने से नहीं हुई है।
- गांव की अनूठी परंपरा के कारण ऐसा हुआ है।
- करीब डेढ़ साल पहले गांव में एक महिला की हत्या हुई थी।
- इसके बाद से पूरे गांव में शादियों पर कर्फ्यू लगा हुआ है।
- मजबूरी में गांव की सीमा से बाहर जाकर शादियां करनी पड़ रही हैं।
यहां किसी भी घर में खुशियों के गीत नहीं गाए जा रहे हैं। अशोकनगर शहर से सटे इस टकनेरी गांव में किसी भी बेटी की डोली उसके अपने आंगन से नहीं उठ पा रही है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके पीछे की वजह कोई पैसों की तंगी नहीं है। इसकी वजह एक बेहद अजीबोगरीब और रूढ़िवादी परंपरा है। इस अनोखी परंपराने पूरे गांव की खुशियों पर जैसे ताला लगा दिया है।
क्या है यह अजीबोगरीब परंपरा?
डेढ़ साल पहले गांव में एक महिला की हत्या हुई थी। बस तभी से इस पूरे गांव में शहनाई बजना ही बंद हो गई।
गरीब परिवारों के लिए बनी समस्या
जो परिवार संपन्न हैं और जिनके पास पैसा है, वे तो शहरों में जाकर मैरिज गार्डन या हॉल बुक कर लेते हैं।
असली मुसीबत तो उन गरीब परिवारों की है, जिनके पास न तो मैरिज गार्डन बुक करने के पैसे हैं और न ही बाहर से आने वाले मेहमानों को ठहराने का कोई इंतजाम है।
इन परिवारों को मजबूरन गांव की सीमा से बाहर जाकर आयोजन करने पड़ रहे हैं।
अपने ही घर से विदा नहीं हो सकी बेटी
हर पिता की तरह उनके भी अरमान थे कि वे अपनी बेटी को अपने ही आंगन से विदा करेंगे। लेकिन गांव की इस सख्त परंपरा के आगे उनके पिता की भावनाएं हार गईं।
मजबूरी में उन्हें गांव की सीमा लांघनी पड़ी और पंवारगढ़ में जाकर अपनी बेटी के हाथ पीले करने पड़े। अकेले मेहरबान सिंह ही नहीं, गांव के करीब 9 से 10 परिवारों को इसी तरह गांव से बाहर जाकर अपने बच्चों की शादियां रचानी पड़ी हैं।
100 से ज्यादा गांवों में बंद है शहनाई
इन गांवों में बरसों से कोई मांगलिक कार्य नहीं हुआ है। कोई भी अप्रिय घटना होने के बाद यहां के लोग अपने बच्चों की शादी के लिए दूसरे गांवों, शहरों और धर्मशालाओं के चक्कर काटने को पूरी तरह मजबूर हैं।
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