आईएएस दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा, पोस्ट में लिखा- मैं मूर्ख थी...

Amresh Kushwaha | Aug 30, 2026, 11:04 IST
आईएएस दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा
आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर अपने 13 साल के सफर, देवरिया और मीरजापुर की तैनाती और आम लोगों के साथ जुड़े अनुभव साझा किए हैं। जानें उन्होंने खुद को मूर्ख क्यों बताया...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दे दिया है।
  • उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर यह जानकारी साझा की।
  • वे 2013 बैच की अधिकारी हैं और 13 साल सेवा दी।
  • उन्होंने देवरिया और मीरजापुर में बतौर अधिकारी काम किया है।
  • पोस्ट में उन्होंने अपने पूरे सफर और सीख को याद किया है।

उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस (Indian Administrative Service) अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया है। यह जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी। दिव्या 2013 बैच की अधिकारी रही हैं।



उन्होंने अपनी 13 साल की नौकरी को अपनी मर्जी से खत्म किया है। पोस्ट लिखते हुए उन्होंने अपने पूरे सफर को याद किया। उनकी यह पोस्ट अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। कई लोग उनके फैसले पर हैरानी जता रहे हैं तो कई उनकी सेवाओं को याद कर रहे हैं।



क्या लिखा पोस्ट में

अपने कार्यकाल को याद करते हुए दिव्या भावुक भी हुईं। उन्होंने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा संतोष उन कामों से मिला, जिनसे आम लोगों की जिंदगी बदली। जिस परिवार को पहली बार अपनी जमीन का हक मिला, उसकी खुशी उन्हें आज भी याद है। जिस दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान से जीने का मौका मिला, वह पल भी उनके लिए खास रहा।



जिस किसान के सूखे खेत तक आखिरकार पानी पहुंचा, उसका चेहरा भी वे नहीं भूल पातीं। इन अनुभवों से उन्होंने एक बड़ी सीख हासिल की। उनके मुताबिक हर सरकारी फाइल के पीछे असल में एक इंसान की जिंदगी जुड़ी होती है। इसलिए हर व्यक्ति की गरिमा बनाए रखना ही असली न्याय माना जाना चाहिए।



अपनी पोस्ट में दिव्या ने अपने बारे में एक बेहद ईमानदार बात भी लिखी। उन्होंने कहा कि मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं। आगे उन्होंने बताया कि सच में तो उन्हें ही सबसे ज्यादा मिला। लोगों का प्यार और भरोसा हर दिन उनका हौसला बढ़ाता रहा।



उन्होंने यह भी माना कि जब वे खुद थक जाती थीं या टूट जाती थीं, तब भी लोगों का विश्वास कम नहीं हुआ। यही भरोसा उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता रहा। उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसका श्रेय दिया।



लोगों के लिए क्या संदेश

पोस्ट के आखिर में दिव्या ने एक भावुक याद भी साझा की। उन्होंने लहुरिया दह गांव की एक बुजुर्ग महिला का जिक्र किया। उस महिला के गांव में पहली बार पानी पहुंचा था। यह देखकर वह महिला कुछ बोल नहीं पाई थी। उसने कांपते हाथों से दिव्या का सिर छूकर उन्हें आशीर्वाद दिया था।



आईएएस दिव्या ने लिखा कि आज उनका पद जरूर छूट गया है, लेकिन वह स्पर्श उनके जीवन भर साथ रहेगा। उनके मुताबिक देश की मिट्टी ने उन्हें जो सपना दिया, वह भी हमेशा उनके साथ रहेगा।



दिव्या मित्तल के इस्तीफे की खबर के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार आ रही हैं। कई लोग उनकी सेवा और ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं। कुछ लोग उनके इस्तीफे के पीछे की वजह जानने को उत्सुक भी दिख रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में इस्तीफे की सीधी वजह नहीं बताई। फिलहाल उनकी पोस्ट को हजारों लोग पढ़ और शेयर कर रहे हैं।



उनकी यह पोस्ट सिर्फ इस्तीफे की जानकारी भर नहीं है। यह एक अफसर के तेरह साल के जमीनी अनुभव की कहानी भी है। इसमें आम आदमी की परेशानियों को समझने की झलक भी दिखती है। यही वजह है कि यह पोस्ट लोगों के दिलों को छू रही है।



कैसा रहा उनका सफर

आईएएस दिव्या मित्तल का बचपन एक साधारण परिवार में बीता। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने हमेशा एक अच्छे और सफल जीवन का सपना देखा था। कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने आईआईएम बैंगलोर से भी डिग्री हासिल की।



पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें लंदन में अच्छी नौकरी मिल गई थी। वहीं, विदेश में रहते हुए भी उन्हें कुछ अधूरा सा महसूस होता रहा। अपने देश से दूर रहना उन्हें लगातार खलता रहा। उन्होंने महसूस किया कि उनकी पढ़ाई, आत्मविश्वास और पहचान, सब कुछ अपनी मिट्टी की देन है। इसी सोच के साथ वे वापस भारत लौट आईं। कड़ी मेहनत के बाद उन्हें आईएएस अधिकारी बनने का मौका मिला था।



किन जिलों में की सेवा

अपनी पोस्ट में दिव्या ने अपनी पोस्टिंग वाली जगहों का भी खास जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देवरिया में तैनाती के दौरान उन्हें बड़ी सीख मिली। वहां उन्होंने समझा कि सही बात के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। इसके बाद मीरजापुर में उनकी पोस्टिंग हुई।



वहां रहते हुए उन्होंने सीखा कि कोई भी काम असंभव नहीं होता, यह सिर्फ एक राय भर होती है। मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी मंदिर से जुड़े अनुभव का भी उन्होंने अपनी पोस्ट में जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि असली ताकत किसी बड़े पद से नहीं आती। यह लोगों के भरोसे और उनकी दुआओं से मिलती है।



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