अब रिपोर्ट कार्ड में नंबरों के साथ जुड़ेगा यह खास स्कोर, जानें ICMR की नई तैयारी
Health Nutrition Report Card: आजकल बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। खराब डाइट और लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है। इसे रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में ICMR और UNICEF ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसमें स्कूलों के लिए खास प्लान बनाया गया है। अब बच्चों को हेल्थ एजुकेशन दी जाएगी। हर छात्र का एक न्यूट्रिशन रिपोर्ट कार्ड बनेगा।
यह कार्ड बच्चों की पूरी फिटनेस का ट्रैक रखेगा। भारत में 2025 तक करोड़ों बच्चे ओवरवेट हैं। लगभग 4.1 करोड़ बच्चे मोटापे से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा बेहद डरावना और चिंताजनक है। इसलिए बचपन में ही आदतें सुधारना बहुत जरूरी है। स्कूल टाइमटेबल में अब बदलाव देखने को मिलेंगे। बच्चों को पढ़ाई के साथ सेहत का पाठ पढ़ाएंगे।
सही खान-पान की आदतें विकसित की जाएंगी। यह पहल बच्चों का फ्यूचर बेहतर बनाएगी। माता-पिता भी इस पहल से बहुत खुश हैं। बच्चों की सेहत पर अब पूरा ध्यान रहेगा। स्कूल और फैमिली मिलकर काम करेंगे। इससे बच्चों का ओवरऑल डेवलपमेंट काफी तेजी से होगा।
पोषण के नए नियम क्या बनाए गए हैं
Class 1 से 12 तक खास क्लास चलेगी। हर हफ्ते 45 से 60 मिनट दिए जाएंगे। इसमें न्यूट्रिशन और हेल्दी डाइट के बारे में बताएंगे। बच्चे समझेंगे कि क्या खाना सही है।
इसके साथ ही फिजिकल एक्टिविटी पर जोर रहेगा। Class 11 और 12 के छात्रों को समय मिलेगा। रोजाना कम से कम एक घंटा एक्सरसाइज करनी होगी। खेलकूद को टाइमटेबल में शामिल किया जाएगा।
लड़कियों की फिटनेस पर विशेष ध्यान
लड़कियों की फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। रिसर्च बताती है कि लड़कियां बहुत कम खेलती हैं। 15 से 19 साल की लड़कियाँ एक्सरसाइज कम करती हैं। वे केवल 10 मिनट ही एक्टिव रहती हैं। अब सभी बच्चों की बराबर भागीदारी तय होगी।
मैदान में खेलना हर बच्चे के लिए जरूरी होगा। इससे शरीर मजबूत होगा और आलस दूर भागेगा। टीचर्स भी बच्चों को मोटिवेट करेंगे। वर्कआउट और योग को रूटीन में जोड़ा जाएगा। रोजाना पसीना बहाने से बच्चे फ्रेश महसूस करेंगे। बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक टल जाएगा।
न्यूट्रिशन रिपोर्ट कार्ड क्यों जरूरी है
रिपोर्ट कार्ड से बच्चे की ग्रोथ का पता चलेगा। हर साल छात्र का हेल्थ टेस्ट किया जाएगा। डॉक्टर और एक्सपर्ट्स मिलकर डेटा तैयार करेंगे। इसमें बच्चे की हाइट और वजन दर्ज होगा।
यह कार्ड बच्चे के न्यूट्रिशन लेवल (icmr food guidelines) को बताएगा। खान-पान की आदतों का पूरा रिकॉर्ड रहेगा। शारीरिक फिटनेस का स्कोर भी इसमें जोड़ा जाएगा। इससे समय रहते कमियों का पता चलेगा।
अगर किसी बच्चे में न्यूट्रिशन की कमी है या फिर कोई बच्चा मोटापे का शिकार है। तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है। पेरेंट्स को तुरंत सही सलाह मिल जाएगी। स्मार्ट ट्रैकिंग से बच्चों की सेहत सुधरेगी।
यह केवल मार्क्स देने वाला कार्ड नहीं होगा। यह जीवन भर काम आने वाली हेल्थ गाइड होगी। घर पर भी पेरेंट्स इस कार्ड को देखेंगे। वे बच्चे की डाइट में सुधार कर पाएंगे। टाइम पर अलर्ट मिलने से बीमारियां नहीं फैलेंगी। बच्चा हमेशा एक्टिव और फिट नजर आएगा।
स्कूल कैंटीन के लिए सख्त निर्देश
स्कूल की कैंटीन पर अब नकेल कसेगी। जंक फूड की बिक्री पूरी तरह बंद होगी। हाई फैट और शुगर वाले सामान नहीं बिकेंगे। ज्यादा नमक वाले पैकेट बंद फूड पर बैन रहेगा।
यह नियम स्कूल के 50 मीटर दायरे में लगेगा। विज्ञापनों पर भी पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। समोसे, कचोरी और चिप्स अब कैंटीन में नहीं मिलेंगे। कोल्ड ड्रिंक्स पर भी पूरी पाबंदी रहेगी।
कैंटीन में अब हेल्दी फूड के ऑप्शन मिलेंगे। ताजे फल और अंकुरित अनाज बेचे जाएंगे। छाछ, लस्सी और बाजरा से बनी चीजें होंगी। सूखे मेवे और मखाना भी बच्चों को मिलेंगे। सस्ता और पौष्टिक खाना ही मेनू में रहेगा। बच्चे जब ब्रेक में कैंटीन जाएंगे।
तो उन्हें सिर्फ सेहतमंद ऑप्शन ही दिखाई देंगे। इससे उनकी खाने की पसंद अपने आप बदलेगी। शुरुआत में बच्चों को थोड़ा अजीब लग सकता है। लेकिन धीरे-धीरे हेल्दी खाने की आदत पड़ जाएगी। कैंटीन अब सेहत सुधारने का जरिया बनेगी।
बच्चों में ओबेसिटी की वजह और हल
अस्वस्थ खान-पान मोटापे का सबसे बड़ा कारण है। बच्चे पैकेज्ड फूड बहुत ज्यादा खा रहे हैं। मोबाइल और स्क्रीन टाइम भी काफी बढ़ गया है। मैदानी खेल अब लगभग गायब हो चुके हैं।
इस वजह से कम उम्र में बीमारियां आ रही हैं। डायबिटीज और बीपी की समस्या बढ़ रही है। बच्चों की मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ता है। वे जल्दी थक जाते हैं और चिड़चिड़े होते हैं।
ICMR की यह रिपोर्ट बेहद मददगार साबित होगी। स्कूल का माहौल बदलने से आदतें बदलेंगी। जब सभी बच्चे एक साथ हेल्दी खाएंगे। तो एक-दूसरे को देखकर बदलाव आसानी से आएगा।
पेरेंट्स को भी घर का माहौल बदलना होगा। टिफिन में पैकेज्ड फूड देना बंद करना होगा। हरी सब्जियां और फल देना बहुत जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल ही इस समस्या का एकमात्र हल है। सही पोषण से बच्चों का दिमाग तेज होगा। वे पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
पेरेंट्स और स्कूल का पार्टनरशिप रोल
बच्चों की सेहत सुधारना सिर्फ स्कूल का काम नहीं। इसमें माता-पिता की भूमिका बहुत बड़ी है। पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में हेल्थ पर चर्चा होगी। रिपोर्ट कार्ड के नतीजों पर बात की जाएगी।
घर में जंक फूड लाने से बचना होगा। बच्चों के सामने खुद भी हेल्दी खाना खाएं। जब पेरेंट्स फिट रहेंगे तो बच्चे भी सीखेंगे। परिवार के साथ बाहर जाकर खेलकूद करें।
स्कूल प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। गाइडलाइंस का पालन सख्ती से करना होगा। स्पोर्ट्स टीचर को नई जिम्मेदारी दी जाएगी। वे बच्चों की एक्टिविटी पर नजर रखेंगे।
कम्युनिटी लेवल पर भी जागरूकता फैलानी होगी। बच्चों को जंक फूड के नुकसान बताने होंगे। विज्ञापनों के बहकावे से उन्हें बचाना होगा। जब स्कूल और परिवार एक साथ आएंगे। तभी मोटापे जैसी बीमारी को हराया जा सकेगा। एक स्वस्थ भारत के लिए यह कदम बहुत जरूरी है।
अगर इसे सही से लागू किया गया तो आने वाले समय में बड़े बदलाव दिखेंगे। बच्चे न केवल पढ़ाई में आगे रहेंगे, बल्कि शारीरिक रूप से भी बेहद मजबूत बनेंगे।
Reference Links:
- Indian Council of Medical Research (ICMR)
- UNICEF Joint Guidelines
- Public Health Foundation of India (PHFI)
- ICMR-NIN 'Let's Fix Our Food' Consortium Report
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