भूख हड़ताल का शरीर पर क्या असर, जानें हेल्थ एक्सपर्ट से सवालों के जवाब
thesootr Desk | Jul 21, 2026, 16:40 IST
hunger strike health effects
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब कोई भूख हड़ताल पर बैठा है। इससे पहले भी कई लोग अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? विशेषज्ञों से जानेंगे इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब।
ऐसा पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इससे पहले भी वह कई बार अलग-अलग मुद्दों को लेकर हड़ताल कर चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण से लेकर लद्दाख को प्रभावित करने वाले केंद्र के फैसलों तक, उन्होंने भूख हड़ताल का सहारा लिया है। वर्तमान समय में वह नीट पेपर लीक मामले को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भूख हड़ताल का शरीर पर क्या असर होता है? खाना न मिलने पर शरीर किस तरह प्रतिक्रिया करता है? आज हम विशेषज्ञों से समझेंगे कि लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं।
सोनम वांगचुक दिल्ली में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। यह हड़ताल 28 जून को शुरू हुई थी। 18 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने की चिंता के बीच उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने भारत में अहिंसक विरोध की परंपरा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के उपवासों से लेकर अन्ना हजारे और इरोम शर्मिला के आंदोलनों तक, अपनी मांगों के समर्थन में लंबे समय से भूख हड़ताल का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल की चर्चा काफी हो रही है। लेकिन इससे कम चर्चा इस बात की है कि लंबे समय तक भूखा रहने का शरीर पर क्या असर पड़ता है।
लंबे उपवास का शरीर पर क्या असर होता है?
जब कोई व्यक्ति भूख हड़ताल करता है तो शुरुआती 24 घंटों में शरीर ऊर्जा के लिए लिवर में जमा ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। इसे ग्लाइकोजन कहा जाता है।
एक नियंत्रित या चिकित्सीय उपवास में व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी चिंता होने पर उपवास रोक सकता है। लेकिन भूख हड़ताल के दौरान कई बार स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद व्यक्ति इसे जारी रखता है।
पानी और नमक शरीर में डिहाइड्रेशन को कम करने और सोडियम के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, ये भोजन का विकल्प नहीं बन सकते।सैफी अस्पताल, मुंबई के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. गौरव गुप्ता के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बावजूद मांसपेशियों का नुकसान, लो ब्लड शुगर, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और शरीर के अंगों पर दबाव जैसे खतरे बने रहते हैं।
डॉ. चौरसिया के अनुसार, भूख हड़ताल के दौरान इन लक्षणों को गंभीर चेतावनी संकेत माना जाता है:
उपवास से दिल पर कैसे पड़ता है दबाव?
लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर में दिल सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंगों में शामिल है। इसका कारण यह है कि उपवास के दौरान दिल की मांसपेशियों और उसकी विद्युत गतिविधि (Electrical Activity) दोनों पर असर पड़ सकता है।
जितना लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना शरीर के लिए नुकसानदायक है, उतना ही जोखिम इसे खत्म करने के बाद अचानक खाना शुरू करना भी हो सकता है।
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लेकिन क्या आप जानते हैं कि भूख हड़ताल का शरीर पर क्या असर होता है? खाना न मिलने पर शरीर किस तरह प्रतिक्रिया करता है? आज हम विशेषज्ञों से समझेंगे कि लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं।
28 जून से भूख हड़ताल पर हैं सोनम
जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने भारत में अहिंसक विरोध की परंपरा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के उपवासों से लेकर अन्ना हजारे और इरोम शर्मिला के आंदोलनों तक, अपनी मांगों के समर्थन में लंबे समय से भूख हड़ताल का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
शरीर पर भूख हड़ताल का असर
- विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे उपवास लंबा होता जाता है, शरीर में मौजूद ग्लूकोज का भंडार खत्म होने लगता है। इसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल करता है। लंबे समय तक भूखे रहने पर मांसपेशियां टूटने लगती हैं, इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलित हो सकते हैं और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव बढ़ सकता है।
भूख हड़ताल का शरीर पर क्या असर?
विशेषज्ञों ने दिए 5 सवालों के जवाब
जब कोई व्यक्ति भूख हड़ताल करता है तो शुरुआती 24 घंटों में शरीर ऊर्जा के लिए लिवर में जमा ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। इसे ग्लाइकोजन कहा जाता है।
- एसएल रहेजा अस्पताल, मुंबई के कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. मनीष शेट्टी के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू करने के दो से तीन दिनों के भीतर शरीर में जमा ग्लाइकोजन का भंडार खत्म होने लगता है। इसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए फैट और कुछ हद तक मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है।
- इस दौरान बनने वाली कीटोन बॉडीज (Ketone bodies) दिमाग के लिए ऊर्जा का स्रोत बन जाती हैं।
- पहले सप्ताह के बाद शरीर ऊर्जा बचाने के लिए मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। इस दौरान मांसपेशियों का टूटना जारी रहता है। दो से तीन सप्ताह बाद शरीर में प्रोटीन की कमी बढ़ने लगती है। इससे मांसपेशियों की ताकत कम होती है, इम्युनिटी कमजोर होती है और शरीर के अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
- जो लोग पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए खतरा और बढ़ जाता है।
- डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बदल सकता है। उन्हें डायबिटिक केटोएसिडोसिस (Diabetic Ketoacidosis) का खतरा हो सकता है। वहीं हृदय रोगियों में दिल की धड़कन अनियमित होने या हार्ट फेलियर का जोखिम बढ़ सकता है।
- लंबे उपवास के दौरान ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मिर्गी या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं का असर भी बदल सकता है।
एक नियंत्रित या चिकित्सीय उपवास में व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी चिंता होने पर उपवास रोक सकता है। लेकिन भूख हड़ताल के दौरान कई बार स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद व्यक्ति इसे जारी रखता है।
- डॉ. शेट्टी कहते हैं, "कुछ विशेष परिस्थितियों में इंसान बिना भोजन के लंबे समय तक जीवित रह सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में लगातार चिकित्सकीय निगरानी और पोषक तत्वों की सप्लीमेंटेशन शामिल होती है। वहीं, विरोध के लिए किया जाने वाला उपवास, जिसमें व्यक्ति राजनीतिक या सामाजिक कारणों से भोजन और चिकित्सा सहायता लेने से इनकार कर सकता है, अधिक जोखिम भरा हो सकता है।"
- कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. बी. ए. चौरसिया के अनुसार, चिकित्सकीय निगरानी में शुरू किए जाने वाले उपवास से पहले ब्लड ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट्स, किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट, ईसीजी (ECG) सहित कई जरूरी जांच की जाती हैं। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर दवाओं में बदलाव किया जा सकता है। इस दौरान वजन, ब्लड प्रेशर, पल्स और शरीर में पानी की मात्रा (Hydration) की लगातार निगरानी की जाती है।
- भूख हड़ताल के दौरान वजन कम होना सिर्फ फैट कम होने का संकेत नहीं होता। शुरुआत में शरीर पानी और ग्लाइकोजन खोता है। इसके बाद ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल शुरू होता है। लेकिन लंबे समय तक भूखा रहने पर शरीर को महत्वपूर्ण अंगों की मांसपेशियों सहित प्रोटीन स्टोर का इस्तेमाल करना पड़ता है।
- मांसपेशियों का यह नुकसान गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे दिल कमजोर हो सकता है, इम्युनिटी कम हो सकती है और शरीर की रिकवरी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
पानी और नमक शरीर में डिहाइड्रेशन को कम करने और सोडियम के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, ये भोजन का विकल्प नहीं बन सकते।सैफी अस्पताल, मुंबई के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. गौरव गुप्ता के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बावजूद मांसपेशियों का नुकसान, लो ब्लड शुगर, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और शरीर के अंगों पर दबाव जैसे खतरे बने रहते हैं।
डॉ. चौरसिया के अनुसार, भूख हड़ताल के दौरान इन लक्षणों को गंभीर चेतावनी संकेत माना जाता है:
- अत्यधिक चक्कर आना या बेहोशी
- बहुत कम ब्लड प्रेशर
- मानसिक भ्रम (Confusion)
- दिल की धड़कन का असामान्य होना
- ठीक से चलने या बोलने में परेशानी
- गंभीर डिहाइड्रेशन और चेतना में बदलाव
उपवास से दिल पर कैसे पड़ता है दबाव?
लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर में दिल सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंगों में शामिल है। इसका कारण यह है कि उपवास के दौरान दिल की मांसपेशियों और उसकी विद्युत गतिविधि (Electrical Activity) दोनों पर असर पड़ सकता है।
- जसलोक अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निहार मेहता के अनुसार, जब शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है तो वह फैट मेटाबॉलिज्म पर निर्भर होने लगता है। लेकिन लंबे समय तक भूखा रहने पर शरीर दिल की मांसपेशियों सहित प्रोटीन को भी तोड़ना शुरू कर सकता है। इससे दिल की ताकत और काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, खासतौर पर पोटेशियम और सोडियम की कमी, दिल की धड़कनों को प्रभावित कर सकती है और जीवन के लिए खतरनाक अतालता (Arrhythmia) का कारण बन सकती है।
- गंभीर डिहाइड्रेशन से शरीर में रक्त की मात्रा कम हो जाती है, ब्लड प्रेशर गिर सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
- डॉ. मेहता कहते हैं कि लगभग दो से चार सप्ताह के उपवास के बाद ये खतरे और गंभीर हो सकते हैं। प्रोटीन की कमी, मांसपेशियों का क्षय और मेटाबॉलिक तनाव दिल के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मामलों में यह कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) जैसी समस्या का कारण भी बन सकता है। डिहाइड्रेशन के कारण किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से दिल पर दबाव और बढ़ सकता है।
जितना लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना शरीर के लिए नुकसानदायक है, उतना ही जोखिम इसे खत्म करने के बाद अचानक खाना शुरू करना भी हो सकता है।
- लंबे उपवास को तोड़ना उतना ही सावधानी भरा कदम होता है जितना इसे जारी रखना। अचानक सामान्य खान-पान शुरू करने से रीफीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) हो सकता है। यह शरीर में तरल पदार्थों और इलेक्ट्रोलाइट्स के खतरनाक असंतुलन की स्थिति होती है, जो तब पैदा होती है जब शरीर दोबारा कार्बोहाइड्रेट को प्रोसेस करना शुरू करता है।
- डॉ. चौरसिया के अनुसार, लंबे उपवास के बाद भोजन की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। शुरुआत में आसानी से पचने वाले हल्के भोजन जैसे सूप, दही, फल, चावल, दाल और खिचड़ी का सेवन किया जा सकता है।
- इस दौरान भारी, तैलीय भोजन और शराब से बचना चाहिए। फास्फेट, पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन B1 सहित जरूरी पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
- डॉ. शेट्टी आगे बताते हैं कि रीफीडिंग शुरू करने से पहले और इसके दौरान थियामिन (Thiamine) सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है।
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